फिर मत कहियेगा कि पीपल, बरगद पर भूत रहते हैं

पर्यावरणविद छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में बरगद और पीपल के वृक्षों को संरक्षित करने में लगे हैं। ये मानते हैं कि बरगद और पीपल पर्यावरण के अच्छे मित्र हैं। पर्यावरणविद शिवानंद मिश्रा ने लोगों को इन पेड़ों का धार्मिक महत्व बाते हुए इन्हें रोपने के लिए जागरूक भी कर रहे हैं। आज वह अपने खर्च पर सौ से ज्यादा पौधों को संरक्षित करने में लगे हैं।
विलुप्त हो रहे बरगद और पीपल के पेड़ों को संरक्षित करने का बीड़ा उठाए पर्यावरणविद शिवानंद मिश्रा बताते हैं कि इन पेड़ों को संरक्षित करने के लिए उन्होनें खंडहर सहित अन्य जगहों पर उग आए पीपल और बरगद के सौ से भी अधिक पौधों को एकत्र किया है। उन्होंने नगरवासियों से अपील की है कि वे अपने पुरखों की स्मरण और शादी, जन्मदिन जैसे अन्य महत्वपूर्ण अवसर के याद को चिर स्मरणीय बनाए रखने के लिए इन पौधों का रोपण कर देखभाल की जिम्मेदारी लें। अपने इस अभियान के संबंध में मिश्रा ने बताया कि बरगद और पीपल के वृक्ष पर्यावरण के सबसे अच्छे मित्र हैं।
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पीपल को सबसे अधिक ठंडक प्रदान करने वाला वृक्ष माना जाता है। वहीं धार्मिक दृष्टिकोण से भी पीपल का महत्वपूर्ण स्थान है। हिंदू ग्रंथों में पीपल को भगवान विष्णु का रूप माना गया है। मृतक संस्कार भी पीपल वृक्ष के बिना पूर्ण नहीं होते हैं। इन सबके बावजूद पीपल और बरगद के पेड़ों को संरक्षित करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। यहां तक कि सरकारी नर्सरी में भी इनका प्लांटेशन नहीं किया जाता है।
पीपल और बरगद दोनों के पौधे बीज से पल्लवित नहीं होते, बल्कि ये पक्षियों के बीट से ही निकलते हैं। यही कारण है कि पीपल और बरगद के पौधे अक्सर खंडहर या पुराने इमारत के उन दीवारों में पाए जाते हैं, जहां पक्षी बैठा करते हैं। मिश्रा ने बताया कि पीपल और बरगद के पेड़ तेजी से विलुप्त होते जा रहे हैं। पुराने पेड़ों के नष्ट होने और नए पौधे न रोपे जाने से यह स्थिति निर्मित हुई है। इन दोनों पेड़ों को समय रहते संरक्षित नहीं किया गया तो इनके अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगेगा।
पर्यावरण संरक्षण के लिए कई पुरस्कार प्राप्त कर चुके शिवानंद मिश्रा ने नगरवासियों से अपील की है कि वे सड़क के किनारे सहित अन्य जगहों पर विभिन्न अवसरों पर रोपे गए पौधों की देखभाल में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि रोपित पौधे आने वाली पीढ़ी की संपत्ति और इसकी देखभाल करना हम सबकी जिम्मेदारी। इस महत्वपूर्ण कार्य को सिर्फ सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
मिश्रा ने कहा कि भारत समेत पूरे विश्व में ग्लोबल वार्मिग का जो खतरा मंडरा रहा है, उसका असर अब जशपुर में भी देखा जा रहा है। तेजी से असंतुलित होता मौसम इसका सबूत है। ग्लोबल वार्मिग और प्राकृतिक आपदा से बचने का एकमात्र उपाय पर्यावरण संरक्षण ही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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