जानिए क्या है 'सत्याग्रह' शताब्दी समारोह का बिहार के 'चंपारण' से रिश्ता?
पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मोतिहारी में चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम को संबोधित किया और इस दौरान उन्होंने गांधी के बताए आदर्शों को याद भी किया। आपको बता दें कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 10 अप्रैल 1917 को अंग्रेजों के खिलाफ चंपारण सत्याग्रह शुरू किया था।

क्या था 'सत्याग्रह'
सत्याग्रह का शाब्दिक अर्थ होता है 'सत्य के लिये आग्रह', आपको बता दें कि एक सदी पहले किसानों से जबरन नील की खेती कराई जा रही थी और गांधी जी ने इसी के खिलाफ आंदोलन किया था। गांधी जी के इस आंदोलन को चंपारण सत्याग्रह के नाम से भी जाना जाता है।

हजारों भूमिहीन मजदूर एवं गरीब किसानों पर हो रहा था अत्याचार
तब हजारों भूमिहीन मजदूर एवं गरीब किसान खाद्यान के बजाय नील और अन्य नकदी फसलों की खेती करने के लिये वाध्य हो गये थे। उनका अंग्रेजों की ओर से खूब शोषण किया जा रहा था। तब महात्मा गांधी ने अप्रैल 1917 में राजकुमार शुक्ला के निमंत्रण पर बिहार के चंपारण में किसानों की हालात का जायजा लिया था। बापू को अपने बीच पाकर किसानों ने अपनी सारी समस्याएं उन्हें बताई थीं। जिसके बाद गांधी लोगों के साथ धरने पर बैठ गए, तब पुलिस सुपरिटेंडंट ने गांधीजी को जिला छोड़ने का आदेश दिया।

गांधीजी ने आदेश मानने से इंकार कर दिया
लेकिन गांधीजी ने आदेश मानने से इंकार कर दिया और उन्हें अरेस्ट कर लिया गया। अगले दिन गांधीजी को कोर्ट में हाजिर होना था। हजारों किसानों की भीड़ कोर्ट के बाहर जमा थी। गांधीजी के समर्थन में नारे लगाये जा रहे थे। हालात की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रेट ने बिना जमानत के गांधीजी को छोड़ने का आदेश दिया।

चंपारण ही भारत में सत्याग्रह की जन्म स्थली बना
लेकिन गांधीजी ने कानून के अनुसार सजा की मांग की।फैसला स्थगित कर दिया गया। चंपारण के इस गांधी अभियान से अंग्रेज सरकार परेशान हो उठी। सरकार ने मजबूर होकर एक जांच आयोग नियुक्त किया, गांधीजी को भी इसका सदस्य बनाया गया।। कानून बनाकर सभी गलत प्रथाओं को समाप्त कर दिया गया। जमींदार के लाभ के लिए नील की खेती करने वाले किसान अब अपने जमीन के मालिक बन गए। गांधीजी ने भारत में सत्याग्रह का शंखनाद किया, और चंपारण ही भारत में सत्याग्रह की जन्म स्थली बना।












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