Fastag and Toll: भारत में हो गए 6 करोड़ फास्टैग, जानिए दुनिया के अन्य देशों में कैसे वसूलते हैं टोल

दुनिया के सभी देशों में टोल प्लाजा पर भुगतान करने के लिए अलग-अलग भुगतान सिस्टमों का प्रयोग किया जाता है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन का इस्तेमाल सबसे अधिक होता है। भारत का फास्टैग भी इस ही सिस्टम पर आधारित है।

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Fastag and Toll: कुछ दिनों पहले नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने आंकड़े जारी कर बताया कि पिछले वर्ष 31 अक्टूबर तक लगभग 6 करोड़ वाहनों पर फास्टैग लगवाया जा चुका था। गौरतलब है कि फास्टैग को 2021 में सभी कॉमर्शियल और प्राइवेट वाहनों में लगाना अनिवार्य कर दिया गया था।

फास्टैग (Fastag) एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है जो ऑटोमैटिक टोल भुगतान करने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक का उपयोग करता है। फास्टैग जिन वाहनों पर लगा होता है वो टोल प्लाजा पर रुके बिना टोल का भुगतान कर सकते हैं, क्योंकि फास्टैग से जुड़े प्रीपेड खाते से टोल शुल्क ऑटोमेटिकली कट जाता है। फास्टैग को वाहन के विंडशील्ड पर चिपका दिया जाता है और टोल प्लाजा पर RFID रीडर द्वारा स्कैन कर लिया जाता है।

फास्टैग को टोल प्लाजा पर ट्रैफिक को कम करने और टोल कलेक्शन प्रोसेस में सुधार करने के लिए डिजाइन किया गया था। हालांकि, फास्टैग आने के बाद भी जाम की समस्या बनी रहती है। इसलिए सरकार इस परेशानी से निजात देने के लिए नयी टोल संग्रह प्रणाली शुरू करने की योजना बना रही है।

इसके अंतर्गत, टोल कलेक्शन के लिए ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर) कैमरा जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जायेगा जोकि GPS-आधारित टोल सिस्टम रहेगा। भारत के अलावा, दुनिया के सभी देशों में वाहनों से टोल लिया जाता हैं। आइये समझने की कोशिश करते है दुनिया के कुछ चुनिन्दा देशों में कैसे टोल वसूला जाता है?

अमेरिका

अमेरिका में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम (ETC) का उपयोग किया जाता है। यह एक सिस्टम है जो वाहनों को टोल बूथ पर बिना रुके इलेक्ट्रॉनिक रूप से टोल भुगतान करने की सहायता देता है। अमेरिका में E-ZPass, SunPass और FasTrak जैसे कई अलग-अलग ETC सिस्टम उपयोग किए जाते हैं। यह सिस्टम आमतौर पर टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहन मालिकों के खाते से ऑटोमैटिक टोल शुल्क काटने के लिए RFID तकनीक का उपयोग करते हैं।

ऑस्ट्रेलिया

ई-टोल एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है जिसका उपयोग ऑस्ट्रेलिया में टोल सड़कों पर किया जाता है। यह वाहन में लगे 'ई-टैग' नामक एक छोटे उपकरण का उपयोग करके टोल बूथ पर रुके बिना अपने टोल का भुगतान करने की अनुमति देता है। डिवाइस में लगे सेंसर के माध्यम से राशि ऑटोमेटिक रूप से वाहन मालिक के खाते से कट जाती है।

कनाडा

कनाडा में वीडियो टोल सिस्टम इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें टोल बूथ से गुजरते हुए वाहनों की तस्वीर ली जाती है, और लाइसेंस प्लेट का उपयोग वाहन की पहचान करने और टोल चार्ज करने के लिए किया जाता है। फिर गाड़ी के मालिक को टोल का बिल भेजा जाता है और फिर वाहन मालिक इस राशि का भुगतान करते हैं।

स्विट्जरलैंड

स्विट्जरलैंड में डिस्टेंस बेस्ड टोल सिस्टम चलता है जिसे दूरी-आधारित मूल्य-निर्धारण या भुगतान-प्रति-मील टोल के रूप में भी जाना जाता है। दरअसल, वहां वाहनों से उनके द्वारा तय की गई दूरी के आधार पर शुल्क लिया जाता है। इस प्रकार के टोल सिस्टम किसी वाहन द्वारा तय की गई दूरी को ट्रैक करने के लिए GPS या ओडोमीटर रीडिंग जैसी तकनीक का उपयोग करते हैं और फिर वाहन मालिक को उसी के अनुसार चार्ज करते हैं।

इटली

इटली में ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन से टोल वसूला जाता है। इसके माध्यम से कैमरों और सॉफ्टवेयर की मदद से वाहन लाइसेंस प्लेट नंबरों को स्वचालित रूप से पहचान कर प्रीपेड खाते से टोल शुल्क डेबिट कर लेता है।

सिंगापुर

सिंगापुर में कंजेशन प्राइसिंग टोल कलेक्शन सिस्टम का प्रयोग किया जाता है। इसके अंतर्गत सड़क पर यातायात की भीड़ और समय के आधार पर टोल अलग-अलग होते हैं। जब किसी मार्ग पर अधिक भीड़ अथवा कंजेशन रहेगा तो अधिक टोल वसूला जाता है। कंजेशन प्राइसिंग के पीछे का आईडिया है कि वाहन मालिकों को परिवहन के वैकल्पिक साधनों का उपयोग करने सहित नॉन-पीक अवर्स के दौरान यात्रा करने के लिए प्रोत्साहित करना जिससे ट्रैफिक कंजेशन को कम किया जा सके।

पाकिस्तान

पाकिस्तान में आज भी पुराने समय का मैन्युअल टोल कलेक्शन सिस्टम ही चल रहा है, जिसमें टोल प्लाजा पर वाहनों से मैन्युअल रूप से टोल इकठ्ठा किया जाता है। हालांकि, अब पाकिस्तान में भी भारत के अनुरूप फास्टैग की तरह इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है और वहां के कई टोल प्लाजा पर काम भी शुरू हो गया है।

रूस

रूस में जिस टोल भुगतान सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है उसका नाम प्लेटन है। इसमें राजमार्गों पर वाहनों को ट्रैक करने और चार्ज करने के लिए GPS और कैमरों का उपयोग किया जाता है। यह सिस्टम वाहनों को उनके वजन और यात्रा की दूरी के आधार पर चार्ज लगाता है। टोल का भुगतान एक विशेष खाते के माध्यम से किया जाता है जो वाहन के लाइसेंस प्लेट नंबर से जुड़ा होता है।

स्पेन

स्पेन में कई जगहों पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। जबकि कुछ स्थानों पर सब्सक्रिप्शन बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम का भी प्रयोग होता है। जिसके मुताबिक चालक टोल सड़कों के अनलिमिटेड इस्तेमाल के बदले में मासिक या वार्षिक शुल्क का भुगतान करते हैं।

दक्षिण कोरिया

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    दक्षिण कोरिया में स्मार्टफोन बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें स्मार्टफोन ऐप का उपयोग करके टोल का भुगतान कर सकते हैं। इस प्रकार का सिस्टम एक चालक के स्मार्टफोन के GPS और इंटरनेट का इस्तेमाल करता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे टोल रोड से कब गुजरते हैं, और फिर चालक को जिस टोल से गुजरना होता है वो उसका भुगतान मोबाइल एप के माध्यम से करता है।

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