Naxal Violence: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के बढ़ते हमले, नक्सली हिंसा रोकने हेतु क्या हैं सरकारी प्रयास?
Naxal Violence: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक बार फिर से नक्सलियों ने हमला कर पांच बसों सहित कुछ मोबाइल टावरों को फूंक दिया। कांकेर के पुलिस अधीक्षक के अनुसार कुछ दिनों पहले सुरक्षाबलों ने दर्शन पड्डा और जागेश नाम के दो नक्सलियों को मार गिराया था। उनके साथी नक्सली इस एंकाउन्टर को फर्जी करार दे रहे थे और उसके विरोध में उन्होंने बसों और मोबाइल टावरों में आग लगा दी।

दरअसल, पिछले दिनों जिले में सुरक्षाबलों ने 13 लाख रुपये के इनामी दो नक्सलियों को मार गिराया था। मारे गए नक्सलियों की पहचान प्रतिबंधित सीपीआई माओवादी की उत्तर बस्तर डिवीजन कमेटी के दर्शन पड्डा और माओवादियों की एक्शन टीम के कमांडर जागेश सलाम के रूप में की गई थी। गौरतलब है कि माओवादी हिंसा के लगभग 40 मामलों में पड्डा आरोपी था। वहीं जागेश सलाम भी कई मामलों में वांछित था और उस पर 5 लाख रुपये का इनाम भी रखा हुआ था।
हालाँकि, केंद्र सरकार ने पिछले कई वर्षों के सतत प्रयासों से नक्सलियों और उनकी हिंसात्मक गतिविधियों पर बहुत हद्द तक रोक लगायी है लेकिन फिर भी कांकेर जैसी कई घटनाएं सामने आती रहती है जोकि इन नक्सलियों के पूर्णतः खात्मे पर प्रश्न खड़ा करती है।
क्या है नक्सल हिंसा और उसका फैलाव भारत में कितना है
नक्सल शब्द पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव के नाम से आया है, जोकि इस आंदोलन का जन्मस्थान था। नक्सलियों को उग्र वामपंथी कम्युनिस्टों के रूप में देखा जाता है जो माओवादी राजनीतिक विचारों और विचारधारा का समर्थन करते हैं। इनकी शुरुआत 1967 में हुई और इस आंदोलन का पहला केंद्र पश्चिम बंगाल में था।
आधिकारिक तौर पर नक्सलियों को लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म (LWE) का नाम दिया गया है। LWE या नक्सलियों से प्रभावित क्षेत्रों को 'रेड कॉरिडोर' कहा जाता है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी), पीपुल्स वार ग्रुप (PWG), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी-लेनिनवादी) और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (MCC) जैसे भूमिगत एवं प्रतिबंधित संगठनों की नक्सल और माओवादी विचारधारा फैलाने में मुख्य भूमिका है और इनका कॉरिडोर एक समय में छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश सहित दक्षिणी भारत और पूर्वी भारत तक फैला हुआ था। भारत सरकार ने इन सभी संगठनों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंध लगा रखा है।
सरकारी एजेंसियों का दावा है कि नक्सलियों को चीन और पाकिस्तान का भी समर्थन मिला हुआ है और वे देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है। वर्ष 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नक्सलवाद को सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताते हुए कहा था कि देश के विकास के लिए वामपंथी उग्रवाद पर नियंत्रण जरूरी है।
पिछले कुछ वर्षों में बड़े नक्सली हमले
1. झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर के पूर्व भाजपा विधायक गुरुचरण नायक पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) द्वारा हमला किया। नायक बच गए लेकिन माओवादियों ने उनकी सुरक्षा में तैनात दो पुलिसवालों की गला रेत कर हत्या कर दी।
2. 3 अप्रैल 2021 को छत्तीसगढ़ के बीजापुर में एक बड़े नक्सली हमले में 21 सुरक्षाबलों के जवानों की मृत्यु हो गई और करीब 31 लोग घायल हो गए।
3. मार्च 2020 में छत्तीसगढ़ के सुकमा में एक मुठभेड़ के दौरान स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और अन्य सुरक्षाबलों के 17 जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
4. मई 2019 में नक्सलियों ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में एक लैंडमाइन विस्फोट किया जिससे 16 सुरक्षाबलों के जवानों की हत्या हो गई।
5. मार्च 2018 में छत्तीसगढ़ के सुकमा में 8 केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की नक्सलियों ने आईडी बम धमाके से हत्या कर दी।
6. अप्रैल 2017 में, छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा प्रभावित दक्षिण बस्तर क्षेत्र के मध्य में बुरकापाल-चिंतागुफा क्षेत्र में हुई एक मुठभेड़ के दौरान CRPF के कुल 26 जवान मारे गए थे और आठ अन्य लोग घायल हो गए थे।
भारत सरकार के आंकड़ें क्या कहते है
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार 2018 से 2020 के बीच में 461 नक्सलियों की मौत हुई और 160 सुरक्षा जवान बलिदान हो गए। गृह मंत्रालय द्वारा 2020 में दी जानकारी के मुताबिक वर्ष 2010 में 1005 आम नागरिकों और सुरक्षा जवानों की नक्सली हमलों में जान चली गयी थी लेकिन 2019 में यह संख्या कम होकर आम नागरिक और सुरक्षा जवानों सहित 202 रह गयी है। जबकि 1998 से वर्ष 2018 के बीच में 12000 लोगों ने अपनी जान गंवाई जिसमें से 2700 सुरक्षाबलों के जवान थे, 9300 आम नागरिक थे।
नक्सली इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भारत सरकार के प्रयास
प्रभावी तरीके से वामपंथी उग्रवाद की समस्या का समग्र रूप से हल करने के लिए सरकार ने सुरक्षा, विकास, स्थानीय समुदायों के अधिकारों और पात्रता को सुनिश्चित करने हेतु बहु-आयामी रणनीति अपनाते हुए राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना तैयार की है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 10 राज्यों में 400 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशनों के निर्माण को मंजूरी दी हैं और वे सभी 400 पुलिस स्टेशन पूरे हो चुके हैं। भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 8 राज्यों यानी आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के 34 नक्सली प्रभावित जिलों में सड़क संपर्क में सुधार के लिए रोड रिक्वायरमेंट प्लान स्कीम लागू की हुई है। इस योजना में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों में 5362 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है।
वामपंथी उग्रवाद वाले क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी में सुधार के लिए सरकार ने अगस्त 2014 में टावर लगाने की मंजूरी दी थी। यह योजना 2 चरणों में बनाई गयी थी और अब पूरी हो गयी है। इस स्कीम के मुताबिक चरण-1 में 2343 मोबाइल टावर लगाए गए हैं और चरण-2 में 2543 मोबाइल टावर लगाए गए हैं।
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