Election Campaign: राजनीति का गिरा स्तर, जुबान से काटी मर्यादा की डोर
लोकसभा चुनाव 2024 के लिए सात चरणों में होने वाले मतदान को लेकर प्रचार अभियान ने अभी पहला पड़ाव भी पार नहीं किया है, लेकिन राजनेताओं की जुबान की गिरती मर्यादा ने अपने सबसे निचले स्तर को छू लिया है।
हैरत की बात यह है कि इसमें महिला और पुरुष नेताओं का फर्क भी मिटता दिख रहा है। मौजूदा प्रचार अभियान में बदजुबानी का सबसे ज्यादा शिकार केंद्र में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेता हो रहे हैं।

ममता बनर्जी ने मोदी को दी गाली
इसमें सबसे ताजा हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पश्चिम बंगाल में हुआ है। बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने गुरुवार को राजनीतिक गरिमा को तार-तार करते हुए पीएम मोदी के लिए एक ऐसे अपशब्द का इस्तेमाल किया, जिसे लोग गाली के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले राशन के पैकेट पर पीएम मोदी की तस्वीर को लेकर ममता ने हमला किया। बनर्जी ने कहा, "मैं भूखी रहकर मरना पसंद करूंगी, मगर साxx मोदी की तस्वीर वाले राशन को नहीं खाऊंगी।"
पीएम मोदी की जाति, परिवार और राम मंदिर पर बयानबाजी
इसके पहले 31 मार्च को इंडी अलायंस की दिल्ली रैली में राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी पीएम मोदी को धोखेबाज कहा। उसी दिन तृणमूल कांग्रेस नेता पीयूष पांडा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जाति को लेकर बेहद विवादित बयान दिया।
पांडा ने कहा, "एक तेली का बेटा राम मंदिर का उद्घाटन और पूजा कैसे कर सकता है। नरेंद्र मोदी ने अधूरे राम मंदिर का उद्घाटन करके ईशनिंदा की है।" राजद प्रमुख लालू यादव ने पटना रैली में पीएम मोदी का परिवार और संतान नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि वह हिंदू ही नहीं हैं।
पीएम मोदी के पिता पर टिप्पणी
दिल्ली शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी को डरा हुआ तानाशाह कह दिया। इससे पहले उन्होंने वर्ल्ड कप में भारत के हारने पर पीएम मोदी को पनौती कह डाला था।
शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने पीएम मोदी की तुलना मुगल शासक औरंगजेब से कर दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली के शासक महाराष्ट्र पर चढ़ाई कर रहे हैं। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पीएम मोदी को झूठों का सरदार कहते हुए उनके पिता तक पहुंच गए थे।
पीएम मोदी को गोली मारने और टुकड़े-टुकड़े करने की धमकी
रांची में राजद नेता अवधेश नारायण सिंह ने तो पीएम मोदी की खोपड़ी में गोली मारने की बात कह डाली। तमिलनाडु की डीएमके सरकार में मंत्री टी एम अनबरसन ने भरी सभा में मंच से कहा कि मैं मंत्री ना होता तो पीएम मोदी के टुकड़े-टुकड़े कर देता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सबसे ज्यादा अपशब्द और जुबानी हमले का इतिहास काफी लंबा है और विपक्ष की ओर से यह सिलसिला फिलहाल थमता भी नहीं दिख रहा।
हेमा मालिनी के लिए सूरजेवाला के भद्दे कमेंट का वीडियो वायरल
बहरहाल, पीएम मोदी के अलावा भाजपा के नेताओं में हाल ही में सांसद, अभिनेत्री, नृत्यांगना और मथुरा लोकसभा सीट से उम्मीदवार हेमा मालिनी भी बदजुबानी की शिकार हो गई। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वह हेमा मालिनी के लिए बेहद गंदे और अपमानजनक शब्द और लहजे का इस्तेमाल करते दिखते हैं। भाजपा नेताओं ने इसे महिला सम्मान का मुद्दा बना लिया है।
कंगना रानौत पर सुप्रिया श्रीनेत और मृणाल पांडे का विवादित पोस्ट
इससे पहले हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार बनाए जाने पर कंगना रानौत भी कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत का निशाना बनी थीं। श्रीनेत ने कंगना रानौत की एक पुरानी फिल्म की तस्वीर के साथ मंडी सीट को जोड़कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भद्दा सा पोस्ट किया था। हालांकि, श्रीनेत ने विवाद बढ़ने पर पोस्ट डिलीट कर सफाई देने की पूरी कोशिश की। सोशल मीडिया पर पत्रकार मृणाल पांडेय भी इसी तरह की हरकत करती दिखीं।
सनातन और दक्षिण-उत्तर पर डीएमके नेताओं का भड़काऊ बयान
लोकसभा चुनाव से पहले दक्षिण और उत्तर की राजनीति को धार देने की कोशिश में डीएमके नेताओं की ओर से कई बेहद बेतुकी बयानबाजियां की गईं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के मंत्री बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना मलेरिया, डेंगू और एड्स से करते हुए उसे मिटाने की बात की।
इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें कड़ी फटकार लगाई। इसके बावजूद डीएमके के दूसरे नेता दयानिधि मारन ने हिंदी भाषी यूपी-बिहार के लोगों को रोड और टॉयलेट साफ करने वाला कहा। इसके बाद भाजपा आईटी सेल के वर्कर्स को नाई का काम करने वाला बताया।
स्वामी प्रसाद मौर्य और चंद्रशेखर का रामचरितमानस पर हमला
विवादित बयानों का मामला उत्तर प्रदेश में स्वामी प्रसाद मौर्य और बिहार में राजद नेता और तत्कालीन शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर का जिक्र किए बिना पूरा नहीं होता। इन दोनों ही नेताओं ने हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ गोस्वामी तुलसीदास की लिखी हुई रामचरितमानस पर अपशब्द कहते हुए निशाना साधा। हालांकि, ये लोग जल्दी ही सियासी तौर पर पैदल हो गए।
सख्ती से रोका नहीं गया तो सामने आ सकती है और भी गंदी बातें
बहरहाल, अभी लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई है। सात चरणों के मतदान और 04 जून को नतीजे आने के बाद केंद्र में नई सरकार के गठन तक पता नहीं नेताओं के जुबान से और कितनी भद्दी-गंदी बातें सुनने को मिल सकती है। इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। हालांकि, चुनाव आयोग ने इसको लेकर कई नियम बनाए हैं, मगर लंबे सार्वजनिक जीवन के बाद जो सेल्फ रेगुलाइजेशन नहीं कर सकते, उनके लिए बिना सजा या बेहद हल्की सजा के प्रावधान वाले नियमों की क्या ही बिसात है।












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