Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Kullu Landslide: अतिक्रमण का दंश झेल रहे पहाड़

Kullu Landslide: भारी बरसात में एक के बाद एक हो रही घटनाओं ने हिमाचल प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। कुल्लू ज़िले की आनी तहसील में घर ऐसे ढह गए जैसे ताश के पत्ते ढह जाते हैं। शिमला के कृष्णा नगर में भी इसी तरह के हालात हुए थे। हिमाचल प्रदेश में इस साल सैंकड़ों लोगों ने पहाड़ दरकने की त्रासदी में अपनी जान गंवाई है। घरों से हाथ धोया है। पर कुछ सबक लिया या नहीं ये देखना जरूरी है। आपको बताते हैं कि हिमाचल में अब तक क्या क्या हुआ और क्या पहाड़ हिमाचल में बढ़ रहा अतिक्रमण झेल पाएंगे?

बरसात ने शुरू में ही दिखा दिया था रौद्र रूप

हिमाचल का कुल्लू जिला अपने सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। पर पिछले कुछ वर्षों में यहां होटलों और घरों की संख्या इतनी अधिक हो गई है कि पहाड़ का नजारा कम और इमारतें ज्यादा देखने को मिलती हैं। कुल्लू में हर साल हजारों सैलानी घूमने आते हैं। उनको रहने के लिए आरामदायक होटल चाहिए होते हैं। पहाड़ की खूबसूरती का भी लुत्फ उठाना है। कुल्लू में इन दिनों आलम ये है कि जहां खाली जमीन देखी नहीं कि लोग होटल बना लेते हैं। प्रकृति तो मानो जैसे रूठती ही जा रही हो।

Mountains and encroachment is reason behind Kullu Landslide

प्रकृति से जितना खिलवाड़ हिमाचल में पिछले कुछ दशकों में उद्योग क्रांति और विकास के नाम पर हुआ है, उसका ही असर है कि अब बिना किसी भौगोलिक जांच के बने हुए बहुमंजिला मकान कुछ ही सेकेंड में धराशायी हो रहे हैं। ज्ञात हो कि अभी कुछ दिन पहले ही शिमला के कृष्णा नगर में हुई घटना में कई लोगों के सिर से छत चली गई। इस साल जब बरसात शुरू ही हुई थी तभी मंडी, कुल्लू, मनाली, चम्बा, कांगड़ा, शिमला जैसे पहाड़ी जिले इसकी जद्द में आने शुरू हो गए थे।

कारणों पर डालते हैं एक नजर

हिमाचल में इन दिनों फोरलेन का काम चल रहा है। इसमें जमकर कोताही बरती जा रही है। एक्सपर्ट का मानना है कि फोरलेन के लिए जितनी जमीन जरूरी होती है, उतनी भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाता। कम भूमि होने के कारण सड़क किनारे जितनी भूमि खाली छोड़नी जरूरी होती है, वह नहीं छोड़ पाते। पहाड़ों की वर्टिकल कटिंग भी इसके लिए जिम्मेदार है।

इसके साथ ही जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिए होने वाले विस्फोटों में वृद्धि भी आपदा के लिए जिम्मेदार है। सड़कों और विद्युत परियोजनाओं के लिए सुरंगों की खुदाई ने भी हिमाचल के कई क्षेत्रों की जमीन को कमजोर कर दिया है। इसके साथ ही नदी के किनारों पर अवैध निर्माण प्राकृतिक रिसाव प्रक्रियाओं में बाधा डालते हैं, जिससे बाढ़ आती है। मंडी और कुल्लू जिले में हाल ही में ब्यास नदी ने भारी बरसात में अपना मार्ग बदला था, जो इन अवैध निर्माणों के कारण हुआ था। इसके साथ ही अवैज्ञानिक तरीके से सड़क चौड़ीकरण और नदियों में मलबा गिराना भी आपदाओं का जिम्मेदार है।

पर्यटन के नाम पर विनाश की ओर बढ़ता हिमाचल

हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देना हर सरकार का पहला काम हो चुका है। यही कारण है कि जहां पहले हिमाचल में घूमने आने वाले सैलानियों को पहाड़ों के दीदार होते थे। बर्फ़बारी में नया साल मनाया जाता था, अब सब कुछ धीरे-धीरे समाप्ति की कगार पर है। शिमला में घर के ऊपर घर बनाए गए हैं। और इनको बनाने में नियमों को ताक पर रखा जाता है। शिमला में वर्तमान में 500 से ज्यादा होटल हैं। आप मालरोड चले जाइये या फिर विक्टरी टनल से लक्कड़ बाजार की तरफ चले जाइए आपको सिर्फ होटल ही नजर आएंगे। पहाड़ अपना वजूद खो रहे हैं। नया शिमला के नाम पर संजौली में भी यही हाल है। पुराना शिमला जिसे अंग्रेज ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाकर गए थे, वहां गर्मियों में भी लोग स्वेटर पहने नजर आते थे। अब यहां तापमान इतना अधिक हो चुका है कि लोगों को पंखे लगवाने पड़ रहे हैं।

कुल्लू में भी हालात बद से बदतर

कुल्लू की वादियां अब सिर्फ आपको रोहतांग की तरफ ही देखने को मिलती हैं, क्योंकि कुल्लू मनाली में मौजूदा हालात ऐसे हैं कि होटलों का निर्माण धड़ल्ले से करके इसकी ख़ूबसूरती को दाग लगाया जा रहा है। लोग इमारतें खड़ी कर रहे हैं। पर नियमों को कौन मानता है। बाद में जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है तो लोग त्राहि - त्राहि करते हैं।

इन आपदाओं के लिए हम जिम्मेदार

अब कहा भी जाता है कि जो जैसा करता है वैसा भरता है। हिमाचल में हो रही इन घटनाओं के लिए प्रकृति से ज्यादा जिम्मेदार इंसान खुद है। क्योंकि भूमि की जांच किए बिना भवनों का निर्माण, अवैध कटान, जगह-जगह बांधों का निर्माण, सड़कों को बनाते समय ब्लास्टिंग करना मानव जनित आपदा को निमंत्रण देते हैं जिसका खामियाजा हिमाचल इस बरसात में भुगत रहा है।

शिमला में हुई घटना में सामने आया था कि 45 डिग्री की ढलान से अधिक पर निर्माण की इजाजत ही नहीं होती है। पर शिमला ही नहीं हिमाचल के कई जिलों में इस नियम को अनदेखा किया गया है। जिससे ऐसे परिणाम सामने आ रहे हैं। वहीं जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने जब राज्य में सर्वे किया तब ये जानकारी सामने निकलकर आई थी कि प्रदेश भर में 17,120 साइट ऐसी हैं जहां लैंड स्लाइड की संभावनाएं ज्यादा रहती है।

सरकारों को विकास के नाम पर पहाड़ों में हो रहे विनाश को रोकना ज़रूरी है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार को मिलकर इस बारे में संज्ञान लेने हुए पहाड़ों की खूबसूरती को बचाना होगा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+