Maternal Mortality Rate: गर्भावस्था या प्रसव के दौरान हर दो मिनट में एक महिला की मौत, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

मातृ मृत्यु दर यानी प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत पर संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट जारी हुई है जिसके अनुसार साल 2000 में प्रत्येक एक लाख बच्चों के जन्म के दौरान 339 मांओं की मौत हो गयी थी।

Maternal Mortality Rate report one woman dies every two minutes during pregnancy or childbirth

Maternal Mortality Rate: संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार हर दो मिनट में गर्भावस्था या प्रसव के दौरान एक महिला की मौत हो रही है। 23 फरवरी 2023 को जारी एक रिपोर्ट में विश्व के लगभग सभी क्षेत्रों में मातृत्व मौतों की संख्या में या तो वृद्धि हुई है या फिर ये संख्या हर जगह उसी स्तर पर बनी हुई है। रिपोर्ट पर गौर करें तो साल 2020 में प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 223 मातृत्व मौतें हुईं थीं, जोकि साल 2015 में 227 और साल 2000 में 339 थी।

गौरतलब है कि अगर इस संख्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो साल 2030 तक 10 लाख से अधिक महिलाओं का जीवन खतरे में आ जायेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि दुनियाभर में लाखों महिलाओं के लिए गर्भावस्था अभी भी त्रासदीपूर्ण एक खतरनाक अनुभव है। डब्लूएचओ का कहना है कि आज भी महिलाओं के पास उच्च गुणवत्ता और सम्मानजनक स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच नहीं हैं।

इन मौतों का मुख्य कारण ज्यादा खून बहना, उच्च रक्तचाप, गर्भावस्था-सम्बन्धी संक्रमण, असुरक्षित गर्भपात के कारण जटिलताएं, मलेरिया, एचआईवी/एड्स समेत आदि स्वास्थ्य समस्याएं हैं। प्रसव से पहले आठ बार जांच कराए जाने की बात कही गई हैं लेकिन आंकड़े बताते हैं कि लगभग एक-तिहाई महिलाएं चार बार भी जांच नहीं करवा पाती। जबकि दुनियाभर में 27 करोड़ महिलाओं के पास परिवार नियोजन के लिए आधुनिक उपायों तक पहुंच नहीं है।

तीन लाख के करीब हो रही हैं मातृत्व मौत?

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की 'ट्रेंड्स इन मैटरनल मोर्टेलिटी (Trends in Maternal Mortality)' रिपोर्ट के अनुसार साल 2000 से 2020 के दौरान राष्ट्रीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर मातृत्व मौतों के विषय में जानकारी जुटाई गयी है।

इस रिपोर्ट के अनुसार 2020 में दुनियाभर में अनुमानित 287,000 महिलाओं की मृत्यु हुई थी। साल 2016 में यह संख्या 309,000 थी। रिपोर्ट के मुताबिक कई देशों ने 2015 में टिकाऊ विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) को लागू करने का संकल्प लिया था फिर भी मौतों की संख्या में कोई खास कमी नजर नहीं आ रही हैं।

दरअसल, टिकाऊ विकास लक्ष्यों के अंतर्गत 2030 तक प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 70 से कम मातृत्व मौतों का लक्ष्य रखा गया था। जबकि इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में हर दिन लगभग 800 महिलाओं की मृत्यु गर्भावस्था और प्रसव से संबंधित समस्याओं के कारण हो गयी थी। यानी हर दो मिनट में एक महिला की मौत दर्ज की गयी।

इन देशों के हालात चिंताजनक

ट्रेंड्स इन मैटरनल मोर्टेलिटी की रिपोर्ट के अनुसार उप-सहारा अफ्रीकी देशों में हालात बहुत ही खराब है। दक्षिण सूडान में 1223, चाड में 1063, नाइजीरिया में 1047 में महिलाओं की मौत हो गयी थी। यानी अकेले इन तीन देशों में 2020 में मृत्यु दर प्रति एक लाख पर 1000 से अधिक से भी अधिक थी।

जबकि यह आंकड़ा मध्य अफ्रीकी गणराज्य में 835, गिनीबिसाऊ में 725, लाइबेरिया में 652, सोमालिया में 621, अफगानिस्तान में 620, लेसोथो में 566, गिनी में 553, लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में 547, केन्या में 530 और बेनिन में 523 प्रति लाख है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र के आठ क्षेत्रों में से यूरोप-उत्तरी अमेरिका और लैटिन अमेरिका-कैरिबियन में मातृ मृत्यु दर में 2016 से 2020 तक क्रमशः 17 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

इन देशों की मातृ मृत्यु दर बेहतर

ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड और मध्य एवं दक्षिणी एशिया में इसी अवधि के दौरान मातृ मृत्यु दर में क्रमशः 35 प्रतिशत और 16 प्रतिशत की कमी आई है।

कुल मिलाकर 117 देशों में मातृ मृत्यु दर 100 से नीचे आंकी गई थी। जिनमें से 59 देश ऐसे थे, जहां मातृ मृत्यु दर 20 से नीचे हो गयी है। इन 117 देशों में से 41 यूरोप और उत्तरी अमेरिका में हैं। जबकि 26 देश लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में हैं। वहीं 22 उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया में हैं।

भारत में हुईं 24 हजार मौतें

रिपोर्ट के मुताबिक नाइजीरिया में मातृ मृत्यु की संख्या सबसे अधिक थी। साल 2020 में सभी अनुमानित वैश्विक मातृ मृत्यु दर का लगभग एक चौथाई से भी ज्यादा लगभग 82000 यानि 28.5 प्रतिशत मौत हुईं थी।

दुनिया के तीन अन्य देशों में 2020 में 10,000 से अधिक मातृ मृत्यु हुई थी। जिसमें भारत (24000, 8.3 प्रतिशत), कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (22000, 7.5 प्रतिशत) और इथियोपिया (10000, 3.6 प्रतिशत) मातृ मृत्यु आंकी गईं थी। जबकि छह अन्य देशों में 5,000 से अधिक मातृ मृत्यु (लेकिन 10000 से कम) हुई थी। उसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया, चाड, केन्या और संयुक्त गणराज्य तंजानिया शामिल हैं।

भारत में स्थिति पहले से बेहतर

इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रति एक लाख जन्म पर 103 महिलाओं की मृत्यु हो जाती है। पिछले कुछ सालों के आकड़ों पर गौर करें तो प्रति एक लाख पर साल 2000 में 384 मौतें, 2005 में 286 मौतें, 2010 में 179 मौतें, 2015 में 128 मौतें और 2020 में 103 मौतें दर्ज की गयी हैं। इसका मतलब मातृ मृत्यु दर में बीते 20 सालों में 73.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

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