बरसे फेंकू के शोले, पप्पू का दिखा साइड इफेक्ट

पप्पू बिफर पड़े- "पंखा क्यों बंद किया।"
काम वाली बाई- साहब झाड़ू लगा रही हूं।
झाड़़ू का नाम सुनते ही पप्पू गुस्सा आ गया और बाहर चला गया। बाहर निकलते ही पप्पू ने चारों तरफ ढोल नगाड़े बजते दिखे।
हैरान-परेशान पप्पू- "राम लाल ड्राइवर से कहो गाड़ी निकाले, मुझे बाहर जाना है।"
राम लाल- साहब सामने देखिये ड्राइवर भी ढोल नगाड़े के बीच नाच रहा है, क्योंकि नये विधायकों के लिये वाहन तैयार किये जा रहे हैं, उसमें एक गाड़ी वही चलायेगा।
पप्पू- राम लाल मैं क्या करूं, समझ नहीं आ रहा?
राम लाल- साहब ठाकुर साहब के घर पर काम करते वक्त मैंने एक चीज सीखी थी, किसी काम को सफल बनाना हो, तो जय-वीरू जैसे दो हाथ होने चाहिये। लेकिन आपके पास तो दिग्गी और सिब्बू हैं। दिग्गी एमपी में कुछ नहीं कर पाये, सिब्बू दिल्ली में। दिग्गी तो अपने आपको एमपी का पुरोधा समझते हैं और सिब्बू की तो दिल्ली में खूब चलती है। अरे इससे तो अच्छा आप जय-वीरू को ही बुला लेते। जय आज भी अगर खड़े होकर कुछ बोल देता है, तो लोग ध्यान से सुनते हैं और वीरू के तो क्या कहने, दिल्ली के पंजाबी तो उनके फैन हैं। खैर जो हुआ सो हुआ।
पप्पू- नहीं रामलाल ये सब उस गब्बर.... ओह नहीं-नहीं फेंकू की वजह से हुआ है।
राम लाल- साहब फेंकू तो बसंती की तरह बोलता रहा और आप लोगों ने जय की तरह कानों में रुई डाल ली।
पप्पू- नहीं मैंने तो वही किया, जो मां ने कहा।
राम लाल- माता जी की तो बात मत करिये, पिछले महीने आपका रिश्ता लेकर गईं थीं। मैं भी गया था साथ में। वहां जाकर बोलीं.. मेरा बेटा ढंग से भाषण नहीं दे पाता है, लेकिन एक बार बसंती का हाथ दे दिया, तो भाषण देना सीख जायेगा, मेरा बेटा पार्टी के युवाओं को जोड़ नहीं पाता, बात-बात पर गुस्सा हो जाता है, मंच पर खड़े होकर मेनीफेस्टो फाड़ देता है, अपने भाषण रिपीट करता है, खुफिया विभाग के अधिकारी को ढाल बनाकर झूठ बोलता है, मुजफ्फरनगर के दंगा पीडि़तों से हवा में मिलता है, गरीबी को स्टेट ऑफ माइंड समझता है। लेकिन अगर एक बार बसंती का हाथ आप उसके हाथों में दे दीजिये, तो वह सब सीख जायेगा। पता है बसंती की मौसी ने तब क्या कहा था- वाह रे माता जी, आपके पप्पू में तमाम अवगुण क्यों न हों, आपके मुंह से उसके लिये फूल ही झड़ेंगे.....
पप्पू- रामलाल वो वाक्या मत याद दिलाओ, बसंती ने मुझे फोन करके सब बताया था। पता है, सुबह भी उसका फोन आया था। फोन पर बोली, "मैं तुमसे शादी क्यों करूं, आज तुम्हारी पार्टी फेंकू के इफेक्ट नहीं, तुम्हारे साइड इफेक्ट के कारण हारी है..." राम लाल मुझसे बसंती के वो शब्द भुलाये नहीं जा रहे हैं।
राम लाल- साहब मैं आपके दिल का दर्द समझ सकता हूं। आपकी उम्र 42 साल हो गई है, इस हार के बाद पता नहीं कौन बसंती आपका हाथ थामेगी? क्योंकि आज कल की बसंतियां करियर ओरियंटेड और सफल लोगों से ही शादी करना पसंद करती हैं।
पप्पू (रोते हुए)- क्या कह रहे हो रामलाल, क्या अब मेरी जिंदगी में कोई बसंती नहीं आयेगी?
रामलाल- साहब मुझे तो अब ऐसा ही लगता है, क्योंकि दोपहर की नमाज पढ़ने के लिये जाते वक्त रहीम चाचा कह रहे थे, "आज जाकर पूछूंगा परवरदिगार से, देश को दो दोचार केजरीवाल और क्यों नहीं दिये..." जरा सोचिये अगर अल्लाह ने उनकी दुआ सुन ली, तो क्या होगा? एक केजरीवाल ने दिल्ली में ये हाल किया है आपकी पार्टी का, कहीं कर्नाटक, उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों में दो-चार केजरीवाल पैदा हो गये तो क्या होगा?
पप्पू- राम लाल मैं दु:खी हूं, और तुम आम आदमी पार्टी और फेंकू का पक्ष लेने में लगे हो?
राम लाल- साहब मैं सरकारी मुलाजिम हूं, अपने ट्रांसफर की बात अभी से करनी शुरू कर दी है। अगला ट्रांसफर उस घर में करवाउंगा, जहां आप अपना रोबोट रखते हैं। सुबह ड्यूटी पर आते वक्त कालिया और सांभा मिले थे। कह रहे थे माता जी के रिमोट की बैटरी अब सिर्फ 100 दिन और चलेगी, उसके बाद जिस घर में देश चलाने वाला रोबोट रखा है, वहां फेंकू आने वाला है। पिछले 10 साल से इसी बात में उलझा रहता हूं कि किसका हुकूम मानूं- आपका, माता जी का या रोबोट साहब का। अगर फेंकू आया, तो कम से कम तीन-तीन लोगों का हुकुम तो नहीं चलेगा।
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