Puducherry: तीन राज्यों में फैले केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी का क्या है 16 अगस्त से नाता
Puducherry: हमारे देश भारत ने लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आजादी हासिल की। आजादी के जश्न और विभाजन की असहनीय पीड़ा के साथ ही देश में कुछ क्षेत्र ऐसे भी थे जो ब्रिटेन के अलावा अन्य यूरोपीय देशों के नियंत्रण में थे। सुदूर दक्षिण में देश के पूर्वी तटीय क्षेत्र पुडुचेरी (पहले पांडिचेरी) पर फ्रांसीसियों का नियंत्रण था। वहीं पश्चिम तटीय क्षेत्र गोवा पर पुर्तगालियों का नियंत्रण था।
फ्रांसीसियों ने 1 नवंबर 1954 को अपने नियंत्रण वाले बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित सुंदर पुडुचेरी समेत बाकी क्षेत्रों को भारत में स्थानांतरित कर दिया। इस तथ्य को देखते हुए सरकारी तौर पर हरेक साल एक नवंबर को पुडुचेरी मुक्ति दिवस या वास्तविक विलय दिवस (De Facto Merger Day) मनाया जाता है। यहां विशेष तौर पर यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि राज्य का कानूनी रूप से भारत गणराज्य में विलय 16 अगस्त 1962 को हुआ था। क्योंकि भारत और फ्रांस को तमाम दस्तावेजी कार्यवाहियों को भी अंजाम देना पड़ा था।

गणतंत्र दिवस 1955 में पहली बार दिल्ली में राजपथ पर पुडुचेरी की झांकी
ऐतिहासिक अभिलेखों के मुताबिक स्वतंत्रता के बाद देश के पुडुचेरी और गोवा में स्थानीय लोगों ने कई राष्ट्रीय सेनानियों के नेतृत्व में आजादी और भारत में विलय की मांग की। लंबे जन आंदोलनों और संघर्षों के बाद 18 अक्टूबर, 1954 को सीमावर्ती गांव किजूर में हुए जनमत संग्रह के परिणामस्वरूप पुडुचेरी और इसके बाहरी इलाके कराईकल, माहे और यनम का भारतीय संघ में विलय हो गया। साल 1955 के गणतंत्र दिवस में पहली बार दिल्ली में राजपथ पर पुडुचेरी की झांकी शामिल की गई थी।
तत्कालीन फ्रांसीसी और भारतीय सरकार के बीच और वास्तविक विलय 16 अगस्त 1962 को सत्ता के कानूनी हस्तांतरण के साथ हुआ। और सत्ता के कानूनी हस्तांतरण के मद्देनजर अन्य क्षेत्रों के साथ मिलाकर पुडुचेरी को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। हालांकि, वहां की अधिकांश सरकारों की मांग रही है कि पुडुचेरी को राज्य का दर्जा दिया जाए। कई अवसरों पर विधानसभा में प्रस्ताव पारित किए गए और राज्य का दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया। लेकिन अब तक इन प्रस्तावों पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।
पुडुचेरी के निर्माण और शासन का इतिहास
16वीं शताब्दी के दौरान पुडुचेरी क्षेत्र में पहली यूरोपीय शक्ति यानी पुर्तगालियों ने कारखाना स्थापित किया था। पुर्तगालियों के बाद डच पुडुचेरी पर कब्जा करने वाली दूसरी यूरोपीय शक्ति थी। साल 1674 में पांडिचेरी में एक व्यापारिक केंद्र के रूप में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी स्थापित हुई और बाद में भारत में यह सबसे प्रमुख फ्रांसीसी बस्ती बन गई। लेकिन पुडुचेरी में फ्रांसीसियों को लगातार डच और अंग्रेजों के विरोध का सामना करना पड़ा।
साल 1693 में फिर से डचों ने पांडिचेरी पर कब्जा कर लिया था। क्योंकि फ्रांसीसी गवर्नर फ्रेंकोइस मार्टिन ने डच गवर्नर के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। हालांकि, 6 साल बाद 1699 में ही फ्रांसीसियों ने डचों के कब्जे से दोबारा पुडुचेरी को हासिल कर लिया। साल 1761 में अंग्रेजों ने पुडुचेरी को फ्रांस से छीन लिया और बाद में पेरिस की संधि (1763) के तहत अंग्रेजों ने इस क्षेत्र को फ्रांस को वापस सौंप दिया। हालांकि, बीच-बीच में पुडुचेरी पर कई बार अंग्रेजों का कब्जा आता-जाता रहा था, लेकिन ज्यादातर फ्रांसीसी ही इस क्षेत्र पर शासन करते थे।
श्रीअरविंदो आश्रम और अंतरराष्ट्रीय टाउनशीप ऑरोविल वाला प्रदेश
पुडुचेरी का फ्रांसीसी सरकार से भारतीय संघ में वास्तविक हस्तांतरण एक नवंबर 1954 में हुआ था, लेकिन पुडुचेरी के कानूनी सत्ता हस्तांतरण को प्रभावित करने वाली संधि को दोनों सरकारों ने 16 अगस्त 1962 को अनुमोदित किया था। भारत सरकार इसे 14वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1962 द्वारा अमल में लाई थी। वहीं, 70वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1991 में राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी शामिल किया गया। पुडुचेरी में महान आध्यात्मिक योगी, क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी श्रीअरविंद का आश्रम और उनकी सहयोगी श्रीमां का बनवाया अद्भुत अंतरराष्ट्रीय टाउनशीप ऑरोविल समेत देखने के लिए बहुत कुछ है। इनमें साफ समुद्र तट, ऐतिहासिक स्मारक और इमारतें, फ्रांसीसी और तमिल मंदिर, चर्च और एक औपनिवेशिक काल का खत्म होता माहौल भी शामिल है।
पुडुचेरी के तीन अलग-अलग राज्यों में फैले होने की क्या है वजह
दक्षिण-पूर्वी तटीय केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी के हिस्से देश के 3 अलग-अलग राज्यों में फैले हुए हैं। सबसे ज्यादा तमिलनाडु राज्य के इलाके से घिरे पुडुचेरी के चार हिस्से हैं जो अलग-अलग राज्यों में आते हैं। इसका साफ मतलब है कि देश के संभवतः सबसे अधिक जनसंख्या वाले केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी के ये इलाके भौगोलिक रूप से जुड़े हुए नहीं हैं।
पुडुचेरी में पुडुचेरी, कराईकल, माहे, चंद्रनगर और यनम नामक पांच पूर्व फ्रांसीसी औपनिवेशिक क्षेत्र थे। इन क्षेत्रों में से पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यनम को मिलाकर ही वर्तमान पुडुचेरी का गठन किया गया था। मौजूदा पुडुचेरी के तीन भौगोलिक हिस्से कराईकल, माहे और यनम क्रमशः तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश राज्य में स्थित हैं। फ्रांसीसी औपनिवेशिक शासन ही इस अनोखी भौगोलिक व्यापकता के पीछे की वजह है।
पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यनम जैसे हिस्सों को 1954 में फ्रांसीसियों द्वारा छोड़े जाने के बाद आजादी मिल गई। बाद में फ्रांस और भारत के बीच हुई संधि में कहा गया कि ये सभी छोटे क्षेत्र जिन पर फ्रांस के द्वारा शासन किया गया था उनको उन्हीं राज्यों में शामिल नहीं किया जाएगा जहां वे पहले थे। इसके बजाय उनकी अपनी खास पहचान और अलग सरकार होनी चाहिए। द्विपक्षीय संधि में इसी खंड के पालन के लिए पुडुचेरी के सभी चार हिस्सों को मिलाकर एक अलग केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया गया था।
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