स्टीव जॉब्स के आखिरी शब्द, जो बन गए लोगों के लिए प्रेरणा

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नई दिल्ली। मोबाइल फोन कंपनी एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की कल यानी 5 अक्टूबर को पुण्यतिथि थी। स्टीव जॉब्स ने एप्पल की स्थापना कर दुनिया को नई मोबाइल क्रांति से रूबरू कराया था। 24 फरवरी 1955 में जन्में जॉब्स ने 5 अक्टूबर 2011 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। जॉब्स पैन्क्रिएटिक कैंसर से जूझ रहे थे। जिंदगीभर लोगों के लिए प्रेरणा बने जॉब्स के आखिरी शब्द भी काफी प्ररेणादायक थे। अपने आखिरी वक्त में जॉब्स ने दुनिया को जीने का अलग नजरिया दिखाया।

Steve Jobs

अपने आखिरी वक्त में जब जॉब्स अस्पताल के बिस्तर पर पड़े थे, तब उन्होंने को को जिंदगी का असली मतलब समझाया। जॉब्स ने कहा था, 'इस वक्त डेथबेड पर पड़े हुए मुझे इस बात का एहसास हो रहा है कि मैंने जितना, शोहरत कमाई, जिसमें मुझे गर्व महसूस होता है, वो सब अब मौत के आगे किसी काम के नहीं हैं।'

स्टीव जॉब्स ने आगे कहा था कि अभी अंधेरे में मैं लाइफ सपोर्टिंग मशीन की हरी लाइट को देख रहा हूं। मैं मौत को अपने और करीब आते देख रहा हूं। मुझे अब मालूम चला, कि जब हम जीवन बिताने जितनी धन-दौलत कमा लेते हैं, तब हमें वो काम करने चाहिए जो ज्यादा जरूरी हों, जिससे रूह को सुकून मिलता हो। जैसे रिश्ते, कला, बचपन के सपने।

'अगर पैसे के पीछे भागना बंद नहीं करेंगे तो कुछ हासिल नहीं होगा और मेरे जैसे बन जाएंगे। भगवान ने हमें प्यार समझने और करने की शक्ति दी है। मैंने अपने जीवन में जितनी धन-दौलत कमाई वो मैं यहां, अस्पताल में अपने साथ नहीं ला सकता। यहां मैं केवल अपने साथ यादें ला पाया हूं। अपने परिवार से साथ समय बिताएं, अपने पार्टनर से प्यार करें और दोस्तों से बातें करें।' अपने डेथबेड पर ये शब्द स्टीव जॉब्स ने कहे थे।

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English summary
Last Words Of Apple Co Founder Steve Jobs, His Famous Deathbed Speech

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