Hockey World Cup : जानिए हॉकी विश्व कप का इतिहास, कैसा रहा भारत का प्रदर्शन
पहली बार हॉकी विश्व कप का आयोजन स्पेन में 1971 में आयोजित किया गया था। जबकि महिला विश्व कप 1974 में शुरू हुआ।

1970 में हॉकी में केवल ओलंपिक स्वर्ण पदक ही सबसे बड़ा खिताब हुआ करता था, लेकिन उस समय इस खेल की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए हॉकी के लिए एक अलग चैंपियनशिप शुरू करने की जरूरत महसूस की गयी। जिसके बाद 1971 में पहली बार हॉकी विश्व कप का आयोजन किया गया।बता दें कि हॉकी विश्व कप 2023 का 15वां संस्करण 13 जनवरी से 29 जनवरी तक भारत के बिरसा मुड़ा इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में आयोजित हो रहा है।
हॉकी विश्व कप का आगाज
हॉकी विश्व कप का आगाज करने का श्रेय पाकिस्तान के हॉकी खिलाड़ी और पाकिस्तानी हॉकी संघ के पूर्व प्रमुख मार्शल नूर खान को जाता है। उन्होंने प्रसिद्ध विश्व हॉकी पत्रिका के पहले संपादक पैट्रिक रावली के माध्यम से हॉकी को दुनियाभर में संचालित करने वाली संस्था अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ के सामने हॉकी विश्व कप को लेकर अपनी बात रखी। जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ परिषद (FIH) की बैठक में 1969 में नूर खान ने विश्व कप का प्रस्ताव रखा।
FIH ने 26 अक्टूबर 1969 को इस प्रतियोगिता के लिए मंजूरी दी और 12 अप्रैल 1970 को ब्रुसेल्स में परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अक्टूबर 1971 में पाकिस्तान में ही पहला हॉकी विश्वकप आयोजित किया जाएगा।
पाकिस्तान ने करवाया हॉकी विश्व कप की ट्रॉफी का निर्माण
पाकिस्तानी महासंघ के प्रमुख की मेहनत और प्रतियोगिता के पहले मेजबान के रूप में अपनी खुशी का इजहार करने के लिए पाकिस्तानी सेना के मार्शल बशीर मस्जिद ने ट्रॉपी का डिजाइन बनवाया। जिसका इस्तेमाल आज भी किया जाता है।
साल 1969 में लाहौर में आयोजित 9 देशों के एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के दौरान सबसे पहले विश्व कप की ट्रॉफी सबके सामने लाई गई थी, जिसमें सोने और चांदी से बनी 18 किलो वाली सिंगल पीस हॉकी स्टिक थी लेकिन वह आधिकारिक तौर पर कभी नहीं अपनाई गई। जिसके बाद विश्व कप हॉकी की ट्रॉफी को हाथीदांत के साथ सागौन की लकड़ी के आधार पर बनाया गया जिसमें फूल का डिजाइन होता है और सोने और चांदी से बना ग्लोब बना है, जिसके ऊपर हॉकी स्टिक और बॉल का मॉडल लगा हुआ है।
हॉकी वर्ल्ड कप की ट्रॉफी को बनाने के बाद पाकिस्तान ने उस समय के अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ के अध्यक्ष रेने फ्रैंक को यह ट्रॉफी 27 मार्च 1971 को बेल्जियम के ब्रुसेल्स में औपचारिक रूप से सौंप दी।
पहला विश्वकप स्पेन में क्यों हुआ आयोजित
1971 में विश्वकप के उद्घाटन संस्करण को पाकिस्तान की बजाय स्पेन में करवाने का फैसला लिया गया, क्योंकि उस समय भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई थी। भारत-पाकिस्तान के बीच स्थिति और संघर्ष को देखते हुए पाकिस्तान का मेजबान बने रहना असंभव सा लग रहा था। इसलिए अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ ने प्रतियोगिता को स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित करने का फैसला लिया। जहां रियल क्लब डी पोलो मैदान में इन मैचों को रखा गया।
हॉकी विश्व कप आयोजित करने का फॉर्मेट
जब विश्व कप की शुरुआत हुई तो यह द्विवार्षिक प्रतियोगिता थी। इसका पहला संस्करण 1971, दूसरा 1973 और तीसरा संस्करण साल 1975 में आयोजित किया गया।
विश्वकप का चौथा संस्करण 3 वर्ष बाद अर्जेंटीना में साल 1978 में आयोजित किया गया। जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय महासंघ ने इस प्रतियोगिता को 4 साल में आयोजित करने का फैसला लिया।
दुनियाभर में कोविड-19 महामारी ने कई खेलों को प्रभावित किया। इसने हॉकी को भी नहीं छोड़ा, जिसके कारण हॉकी विश्व कप 2022 जिसका आयोजन भारत में होना था, वह नहीं हो पाया और इस साल 2023 में आयोजित हो रहा है। जो 13 जनवरी से 29 जनवरी तक चलेगा। लेकिन 4 साल के अंतर को बनाए रखने के लिए अगला विश्व कप 2026 में आयोजित किया जाएगा।
आपको बता दें कि विश्व कप के प्रारंभ होने के समय में यह प्रतियोगिता एक आमंत्रण टूर्नामेंट था लेकिन 1977 के बाद विश्वकप में क्वालिफिकेशन की प्रक्रिया को शुरू किया गया। हॉकी विश्व कप में नॉकआउट के माध्यम से चैंपियन टीम का निर्धारण किया जाता है।
विश्व कप में टीमों की संख्या
हॉकी विश्व कप में कितनी टीमें खेलेंगी इसका कोई सटीक नियम तो नहीं है लेकिन इसके पहले संस्करण 1971 में 10 टीमों ने हिस्सा लिया था। जिसमें भारत, पाकिस्तान, स्पेन केन्या, जर्मनी, फ्रांस, अर्जेंटीना, जापान, नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया की टीमें शामिल थी। इसे आज तक का सबसे छोटा संस्करण भी कहा जा सकता है।
महिला हॉकी विश्व कप की शुरुआत
1971 और 73 में पुरुष हॉकी विश्व कप की सफलता के बाद अंतरराष्ट्रीय महासंघ में महिला हॉकी विश्व कप की भी शुरुआत की। जिसका पहला आयोजन 1974 में फ्रांस के मन्डेलियू में आयोजित किया गया।
विश्व कप पुरुष हॉकी में भारत का प्रदर्शन
8 बार की ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता भारतीय टीम विश्वकप हॉकी में केवल 1975 में ही अजीत पाल सिंह की कप्तानी में जीती। यह प्रतियोगिता उस समय कुआलालंपुर में आयोजित हुई थी। इससे पहले विश्वकप के पहले संस्करण (1971) में भारत ने कांस्य पदक व 1973 में रजत पदक जीता था। 1978 से 2014 तक भारत की स्थिति काफी खराब रही, वह प्रतियोगिता के ग्रुप चरणों से भी आगे नहीं बढ़ सका।
2023 में मेजबानी करते हुए भारतीय टीम हरमनप्रीत की कप्तानी (जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकर है) में खिताब की दावेदार मानी जा रही है, जो कि विश्व रैंकिंग में छठे स्थान पर है। अंतरराष्ट्रीय महासंघ की प्रो लीग जो 2021-22 में आयोजित हुई थी, उसमें भारत ने तीसरा स्थान हासिल किया था। मशहूर हॉकी खिलाड़ी ग्राहम रीड के 2019 में भारतीय हॉकी टीम का कोच बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी में भारत का कद बढ़ गया है।












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