Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Kerala Governor vs Govt: आरिफ मोहम्मद खान और पिनराई विजयन, जानिए किन-किन मामलों पर पहले भी टकरा चुके हैं

Kerala Governor vs Govt: केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और केरल सरकार एक बार फिर से एक-दूसरे के आमने-सामने हैं। इस तकरार की शुरुआत तब हुई जब केरल सरकार ने राज्यपाल को सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपति के पद से हटाने का निर्णय लिया। इसके लिए वह एक अध्यादेश लाने की भी तैयारी में है।

Kerala Governor vs Govt Arif Mohammed Khan and Pinarayi Vijayan tussle history

राज्य सरकार के इस कदम के खिलाफ राज्यपाल ने इस मामले को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष उठाने की चेतावनी देते हुए कहा है कि "अगर केरल सरकार के इस अध्यादेश में मुझे टारगेट किया गया है तो मैं इसमें पार्टी नहीं बनूंगा। मैं पहले इसे देखूंगा, पढ़ूंगा और अगर मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचता हूं कि मुझे टारगेट बनाया गया है तो मैं इस पर साइन नहीं करूंगा। मैं इसको राष्ट्रपति के पास भेज दूंगा।"

क्या है वर्तमान मतभेदों की वजह

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने प्रक्रियात्मक उल्लंघन के आधार पर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त 11 उपकुलपतियों के इस्तीफे की मांग की है। उनका कहना है कि इन उपकुलपतियों की नियुक्ति UGC के नियमों के तहत नहीं हुई है। गौरतलब है कि इस मामले में केरल हाई कोर्ट ने भी राज्यपाल के पक्ष में फैसला सुनाया है।

कहाँ से शुरू हुई खींचतान

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का यह दूसरा कार्यकाल है। साल 2019 में आरिफ मोहम्मद के राज्यपाल बनने से लेकर पिनाराई के दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने तक, दोनों के बीच कई मसलों जैसे किसान बिल और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर खींचतान हो चुकी है। कई सालों से चले आ रहे इन वैचारिक मतभेदों में राज्यपाल और मुख्यमंत्री एक-दूसरे पर कई बार आक्रामक होते देखे गए हैं।

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पिनाराई सरकार ने दिसंबर 2019 में केरल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर कानून को ख़ारिज करने का एक प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच गहरे मतभेद पैदा हो गए, क्योंकि आरिफ मोहम्मद खान नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष में थे।

दिसंबर 2020 में भी केरल सरकार ने भारत सरकार द्वारा पेश किये गए कृषि कानूनों के खिलाफ विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया और उसके लिए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद से मंजूरी मांगी गई। राज्यपाल ने राज्य सरकार से जवाब मांग लिया कि आप विशेष सत्र क्यों बुलाना चाहते हैं। राज्य सरकार ने इसका जवाब दिया लेकिन राज्यपाल को वह नियमों के विरुद्ध लगा और उन्होंने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने से साफ़ इनकार कर दिया। इसके बाद एक बार फिर राज्यपाल और राज्य सरकार में दूरियां बढ़ गई।

31 दिसंबर 2021 को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा 7 दिसंबर 2021 को केरल विश्वविद्यालय को भेजा गया एक पत्र सार्वजनिक किया गया, जिसमें उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को D.Litt. (डॉक्टर ऑफ लिटरेचर) से सम्मानित करने की मांग की थी। राज्यपाल की इस मांग को केरल विश्वविद्यालय के उपकुलपति वीपी महादेवन पिल्लई ने यह कहकर ठुकरा दिया कि सिंडिकेट के सदस्यों ने इस मांग को खारिज कर दिया है।

इसके बाद केरल सरकार और राज्यपाल में विरोधाभास की स्थिति बन गई। हालात यह बन गए कि राज्यपाल ने विधानसभा से पारित कई विधेयकों पर हस्ताक्षर करने बंद कर दिए। इनमें से एक विधेयक राज्यपाल की शक्तियों को कम करने के लिए भी लाया गया था।

कौन है आरिफ मोहम्मद खान?

आरिफ का जन्म 18 नवंबर, 1951 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुआ था। उन्होंने दिल्ली के जामिया मिलिया स्कूल, अलीगढ़ के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और लखनऊ के शिया कॉलेज से अपनी पढाई की है। अलीगढ़ विश्वविद्यालय में आरिफ छात्रसंघ अध्यक्ष थे।

उनकी राजनैतिक कैरियर की शुरुआत उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चरण सिंह की जनता पार्टी में शामिल होकर हुई। इसके बाद वे कांग्रेस से जुड़ गए और दो बार सांसद रहे और केंद्रीय मंत्री भी बनाए गए। शाहबानो वाले मामले में आरिफ मोहम्मद खान ने प्रधानमंत्री राजीव गाँधी पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।

फिर आरिफ पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के जनता दल में शामिल हो गए और उन्हें वी पी सिंह सरकार में केंद्रीय उड्डयन एवं ऊर्जा मंत्री बनाया गया। बाद में वे बहुजन समाजवादी पार्टी का हिस्सा बने और फिर 2004 में वो भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। 1 नवंबर 2019 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आरिफ मोहम्मद खान को केरल का राज्यपाल नियुक्त किया।

केरल विधानसभा की स्थिति क्या है

केरल के मुख्यमंत्री पिनायरी विजयन ने 22 मई 2021 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वे सीपीआई (एम) के नेता हैं। केरल की विधानसभा में कुल 140 सीटें हैं और वहां अभी LDF (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) की सरकार है। LDF के पास बहुमत के साथ 99 सीटें है और इसमें सीपीआई (एम), सीपीआई, केरल कांग्रेस (एम), जनता दल, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, केरल कांग्रेस (बी), इंडियन नेशनल लीग, कांग्रेस (सेक्युलर), जनाधिपथ्य केरल कांग्रेस और केरल कांग्रेस (सकरिया थॉमस) जैसे कई राजनैतिक दलों का गठबंधन शामिल है।

यह भी पढ़ें: Kerala Governor vs Govt: विश्वविद्यालय उपकुलपतियों की नियुक्ति पर बढ़ते राजनीतिक विवाद

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+