1999 के चुनाव में 'इन' पर फेंका गया था गोबर!

jagatveer singh drona
चुनावी घमासान में प्रचार के दौरान कुछ प्रत्याशियों पर स्याही और अंडे कई बार फेंके गए हैं, जबकि चुनाव प्रचार अभी ख़त्म नहीं हुआ है। लेकिन 1999 के चुनावों में एक अलग ही मंज़र सामने आया था। कानपुर में आम चुनाव में प्रचार के दौरान गोबर चला था।

जानकार बताते हैं कि 1999 में कानपुर के सांसद और भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी जगत वीर सिंह द्रोण पर गोबर फेंका गया था। वर्तमान में द्रोण कानपुर के मेयर हैं। कानपुर की संसदीय सीट के लिए उन्होंने पहला चुनाव 1989 में लड़ा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की प्रत्याशी सुभाषिनी अली से हार गए। 1991 के चुनाव में वह फिर खड़े हुए और कानपुर से सांसद चुने गए।

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उसके बाद 1996 और 1998 के चुनावों में भी द्रोण कानपुर से विजयी हुए। हर चुनाव में द्रोण को मिलने वाले वोटों की संख्या में भारी बढ़त हुई और जीत का अंतर भी बढ़ा। पर 1999 के चुनाव में साफ़ छवि वाले द्रोण कांग्रेस के प्रत्याशी श्रीप्रकाश जायसवाल से हार गए।

1999 में कानपुर के एक प्रमुख हिंदी दैनिक के मुख्य संवाददाता कहते हैं, "1999 के चुनाव में द्रोण के ऊपर गोबर फेंका गया था।" उन्होंने बताया, "द्रोण सघन जनसंपर्क अभियान के दौरान घर-घर जा कर वोट मांग रहे थे। इस दौरान उन पर कई जगह गोबर फेंका गया था।
कानपुर में कभी भी चुनाव के दौरान किसी प्रत्याशी को अपमानित नहीं किया गया था। ऐसे में क्या कारण था कि द्रोण के ऊपर गोबर फेंका जा रहा था?

"आखिर क्यों फेंका गया गोबर? -

एक वर‍िष्ठ पत्रकार कहते हैं, "द्रोण 1999 में कानपुर के सांसद थे। पर उनकी सोच राष्ट्रीय थी। वह राष्ट्रीय मुद्दों पर ज़्यादा बात करते थे। उन्होंने जब मोहल्लों में जाना शुरू किया तो लोगों ने उनके सामने स्थानीय मुद्दे रखे- जैसे बंद नाली, कूड़े के ढेर, टूटी सड़कें। द्रोण ने कहा ये सब स्थानीय मुद्दे हैं- अपने सभासद या विधायक से बात करिए। लोगों का गुस्सा फूट गया। लोगों ने द्रोण के ऊपर गोबर फेंकना शुरू कर दिया।"

वह कहते हैं, "द्रोण चाहे न मानें पर मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूं कि उन पर गोबर फेंका गया था। इस चुनाव में स्याही और अंडे प्रत्याशियों के मुँह पर फेंका जा रहा है। हालांकि द्रोण के मुँह पर कभी गोबर नहीं फेंका गया लेकिन हां उनके कुर्ते पर गोबर के छींटे मैंने देखे हैं।"

कुछ ऐसे ही जुमलों से हमारी राजनीत‍ि गुलज़ार रही है। कभी विरोध‍ियों ने सत्ताधार‍ियों की कड़वी यादें ताज़ा की हैं, तो कभी सत्ताधार‍ियों ने विरोध‍ियों पर जुबानी हमले कर सियासत गर्म की है। फिलहाल हम आपको ऐसी ही दिलचस्प घटनओं का गुलदस्ता भेंट करते रहेंगे। आप मग्न रहें चुनावी 'उत्सव' मनाने में व अपन वोट जरूर दें।

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