ISIS Women: आतंकी पैदा करना चाहती हैं ISIS समर्थक महिलाएं, गर्भवती होने के लिए किशोरों को दे रही वियाग्रा
प्रतिबंधित आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) की समर्थक महिलाएं गर्भवती होने के लिए लड़कों के साथ जबरन सेक्स कर रही हैं और लड़कों की सेक्स ताकत को बढ़ाने के लिए उन्हें वियाग्रा दे रही हैं।

ISIS Women: अभी तक तो हम आईएसआईएस की आतंकवादी गतिविधियों से परिचित थे। इस आतंकवादी संगठन ने अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए हजारों निर्दोष लोगों का खून बहाया और महिलाओं एवं बच्चों को गुलाम बनाकर उन्हें सरेआम बेचा। लेकिन अब आईएसआईएस से जुड़ी महिला आतंकवादियों ने एक खतरनाक खेल शुरू कर दिया है।
सीरियाई रक्षा बल के अधिकारियों का कहना है कि अहमत (13 वर्ष) और हामिद (14 वर्ष) नामक दो लड़कों ने यह खुलासा किया है कि सीरिया के अल होल कैंप में आईएसआईएस से जुड़ी विदेशी महिलाओं ने उन दोनों लड़कों सहित कम-से-कम 10 लड़कों को दर्जनों महिलाओं के साथ सेक्स करने के लिए मजबूर किया, ताकि वे महिलाएं गर्भवती हो सकें।
गौरतलब है कि सीरिया में आईएसआईएस के कमजोर पड़ने के बाद साल 2019 में इस आतंकी संगठन से संबंधित लगभग 8,000 विदेशी महिलाओं और बच्चों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद इन्हें अल होल हिरासत कैंप में रखा गया था। यह कैंप पूर्वोत्तर सीरिया में इराक सीमा के पास स्थित है।
आईएसआईएस के खलीफा के प्रति निष्ठा
इस कैंप में कैद कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जो अब आईएसआईएस से संबंध नहीं रखना चाहतीं। लेकिन कुछ महिलाएं अब भी आईएसआईएस के खलीफा के प्रति निष्ठा रखती हैं। ये महिलाएं इस प्रयास में लगी हुई हैं कि आईएसआईएस के कट्टर अमानवीय सिद्धांतों को कायम किया जाए और जिन महिलाओं ने आईएसआईएस से संबंध तोड़ लिए है, उन्हें दंडित किया जाए। उन बच्चों को भी आईएसआईएस के साथ जोड़ा जाए, जिनके देश ने उन्हें वापस लेने से इंकार कर दिया है।
बच्चे पैदा कर आतंकी बनाने पर जोर
'द डेली बीस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार अल होल कैंप में आईएसआईएस की महिलाओं ने लड़कों से कहा कि वे इस्लामिक स्टेट की जनसंख्या को बढ़ाने के लिए गर्भवती होना चाहती हैं। इन महिलाओं का कहना है कि जब ये बच्चे पैदा होकर बड़े होंगे तो उन्हें कैंपों से बाहर निकालकर आईएसआईएस के लिए भर्ती किया जाएगा।
भूमिगत सुरंगों में कैद महिलाएं
कैंप के एक सुरक्षाकर्मी ने कहा कि अल होल में कम-से-कम 10 लड़कों को महिलाओं को गर्भवती करने के लिए जबरन रखा गया था और इन लड़कों को सेक्स के प्रति उत्तेजित करने के लिए वियाग्रा भी दिया जा रहा था। इसका खुलासा तब हुआ जब एसडीएफ के कर्मचारी कैंप में गए और उन्होंने देखा कि इन लड़कों को महिलाओं ने भूमिगत सुरंगों में कैद कर रखा है।
इस कैंप में कितनी महिलाओं ने गर्भधारण किया है, इसकी सही संख्या किसी को नहीं मालूम। लेकिन इन कैंपों की निगरानी करने वाले एसडीएफ खुफिया विभाग का कहना है कि यह संख्या ज्यादा भी हो सकती है। उनका कहना है कि इन महिलाओं का लक्ष्य किसी भी तरह गर्भवती होना है और यह संभव है कि उन्होंने कैंप के सुरक्षा गार्डों के साथ भी शारीरिक संबंध बनाया हो। आईएसआईएस की महिलाएं कैंप के आधिकारिक डॉक्टरों की मदद के बिना बच्चों को जन्म देकर इस संख्या को छिपा रही हैं और हिरासत में लिए गए डॉक्टर और नर्स भी उन्हें इस काम में मदद कर रहे हैं।
एक अन्य कैंप अल रोज के सुरक्षा बलों और कैंप अधिकारियों ने भी ऐसे ही खुलासे किए हैं। उनका कहना है कि उनके कैंप में भी कुछ महिलाओं ने गर्भधारण किया है। आईएसआईएस की इन महिलाओं से अपने बेटों को बचाने के लिए अल रोज कैंप की कुछ अन्य महिलाओं ने कैंप अधिकारियों से उनके बेटों को पुनर्वास केंद्रों में ले जाने की गुहार लगाई है।
लड़कों के लिए अलग पुनर्वास केंद्र
लड़कों को हिरासत कैंपों में रखना मुश्किल हो रहा है, इसलिए अब इन्हें नई नीति के तहत पुनर्वास केंद्रों में स्थानांतरित किया जा रहा है। कैंप के अधिकारियों ने कहा कि महिलाओं को समय से पहले बताया गया था कि उनके बेटों को क्यों और कहां ले जाया गया है। एएएनईएस के अधिकारियों का कहना है कि वे सबकी सुरक्षा के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि अपने युवकों को ले जाने के लिए सभी देश स्वतंत्र हैं।
स्वायत्त संस्थानों और सुरक्षाकर्मियों के प्रयास
एसडीएफ और नॉर्थ ईस्ट सीरिया के स्वायत्त प्रशासन (AANES) ने आत्मसमर्पण करने वाले आईएसआईएस से जुड़े परिवारों को एक साथ रखने के लिए कड़ी मेहनत की है। जैसे-जैसे ये लड़के युवावस्था की ओर बढ़ रहे हैं, एएएनईएस और एसडीएफ के लोग उन्हें यौन हिंसा और दुर्व्यवहार से बचाने का प्रयास कर रहे हैं। ये एनजीओ आईएसआईएस के समर्थक उन हिंसक गिरोहों को रोकने का भी प्रयास कर रहे हैं, जो अन्य महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों में बाधा डाल रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट में एएएनईएस और एसडीएफ की कड़ी आलोचना की गई है और कहा गया है कि इन कैंपों में लड़कों को गंभीर नुकसान हो सकता है और उन्हें जबरन गायब किया जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी शिकायत की गई कि एसडीएफ ने इन लड़कों को रात में उनकी माताओं से दूर कर दिया।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से अधिकांश लड़कों को तब हिरासत में लिया गया, जब वे मात्र सात वर्ष के थे। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ये लड़के आतंकवाद के शिकार हैं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों और मानवीय आधार पर संरक्षण के पात्र हैं।
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