International Justice Day: भारत की न्याय व्यवस्था में सुधार लाएगी 'जस्टिस क्लॉक'
International Justice Day: अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय प्रणाली स्थापित करने और पीड़ितों के अधिकारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल 17 जुलाई को विश्व अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस मनाया जाता है। विश्व अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय दिवस या अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस भी कहा जाता है। यह दिन मौलिक मानवाधिकारों की वकालत और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इस दिन गंभीर अपराधों को रोकने के तरीकों पर चर्चा के लिए विभिन्न तरह के सेमिनार और संगोष्ठियों का आयोजन किया जाता है।
इस दिवस को मनाने के पीछे की कहानी 17 जुलाई 1998 को 120 देशों की अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की रोम संविधि नामक एक संधि पर हस्ताक्षर करने के साथ जुड़ी है। दरअसल, रोम संविधि संधि ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की स्थापना में मदद की। इसके बाद 17 जुलाई 1998 से अब तक लगभग 139 देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किये हैं। जबकि लगभग 80 प्रतिनिधि देशों ने इसका अनुमोदन किया है। इसके बाद जून 2010 में युगांडा के कंपाला शहर में रोम संविधि के समीक्षा सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि हर वर्ष 17 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

रोम संविधि संधि क्या है?
legal.un.org के अनुसार, इस रोम संविधि संधि के तहत एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की स्थापना की गयी। साथ ही संधि में इस बात का जिक्र किया गया कि यह एक स्थायी संस्था होगी। अंतरराष्ट्रीय चिंता के सबसे गंभीर अपराधों के लिए इसे अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने की शक्ति होगी। न्यायालय को नीदरलैंड के हेग में स्थापित किया गया।
इस संधि के अनुसार, इस न्यायालय में नरसंहार का अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध, आक्रामकता का अपराध और युद्ध अपराध के संबंध में न्याय करने का क्षेत्राधिकार प्राप्त है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक संस्था है जो मानवाधिकारों के उल्लंघन जैसे गंभीर वैश्विक अपराधों के खिलाफ मुकदमा चलाने में सक्षम है। हालांकि यह कभी भी राष्ट्रीय अदालतों की जगह नहीं लेता है। यह तब उपलब्ध होता है जब कोई देश जांच नहीं कर पाता है।
2023 की थीम
हर वर्ष इस दिवस को एक थीम के साथ मनाया जाता है। साल 2022 में इसकी थीम 'औपचारिक रोजगार के माध्यम से सामाजिक न्याय प्राप्त करना' थी। साल 2023 में इसकी थीम 'सामाजिक न्याय के लिए बाधाओं पर काबू पाना और अवसरों को उजागर करना' है। इस दिन का उद्देश्य पीड़ितों के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनके न्याय का समर्थन करने के लिए सभी को एकजुट करना है। यह दिन मौलिक मानवाधिकारों की वकालत और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय को बढ़ावा देने पर केंद्रित होता है।
भारत में न्याय प्रणाली
इसके साथ ही आपको यह जानना जरूरी है कि भारत में न्याय प्रणाली कैसी है। तो सबसे पहले हम आपको बता दें कि भारत की न्याय प्रणाली विश्व की सबसे पुरानी प्रणालियों में से एक है। वर्तमान न्याय प्रणाली अंग्रेजों ने औपनिवेशिक शासन के दौरान गठित की थी। हमारे देश में कई स्तर की अदालतें मिलकर न्यायपालिका बनाती है। इसमें सुप्रीम कोर्ट सहित उच्च न्यायालय और उनकी अधीनस्थ अदालतें जिन्हें निचली अदालत कहा जाता है। इसके अलावा ट्रिब्यूनल, फास्ट ट्रैक कोर्ट, लोक अदालतें आदि मिलकर भारतीय न्यायपालिका का निर्माण करते हैं। पर इनमें कई तरह के सुधारों की अभी आवश्यकता है।
फिलहाल भारत में करोड़ो मामलें लंबित है। इस बात को समझते हुए सरकार देश के सभी 24 उच्च न्यायालयों में 'इंसाफ की घड़ी - Justice Clock' लगाने की योजना पर काम कर रही है। यह कोई दीवार घड़ी नहीं होगी। दरअसल, यह एक डिजिटल बोर्ड होगा जिसमें 'जस्टिस क्लॉक' नाम का एक सॉफ्टवेयर लगा होगा। जिसे केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय ने तैयार करवाया है। इसके जरिये सभी अदालतें इंटर-कनेक्ट होंगी। जस्टिस क्लॉक नामक यह सॉफ्टवेयर अदालती प्रक्रिया में तेजी और जल्द फैसला देने में सहायक होगा। जस्टिस क्लॉक का यह फायदा होगा कि इस सॉफ्टवेयर में सभी अदालतों की जानकारी उपलब्ध होगी। जिसमें दर्शाया गया होगा कि किस कोर्ट में कितने मामले अभी लंबित है? किस मामले में न्याय देने में कितना समय लगा? कितनी तारीखें उस मामले को निपटाने में लगी? साथ ही ये भी इसमें दर्शाया गया होगा कि मामले में देरी हुई तो क्यों हुई?












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