कैसे बने हमारे चहेते ऑस्कर अवार्ड्स?
ये पुरस्कार अमेरिका की अकादमी ऑफ़ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंस की ओर से दिया जाने वाला अवार्ड है जो अमेरिकाफिल्म जगत में बेहतरीन कार्यों के लिए दिया जाता है।
अकादमी अवार्ड्स या ऑस्कर अवार्ड्स जिन्हें फ़िल्मी दुनिया के सबसे बड़े और नामचीन अवार्ड्स के रूप में जाना जाता है।

क्या है उनके होने की पूरी कहानी चलिए जानते हैं..
ये पुरस्कार अमेरिका की अकादमी ऑफ़ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंस की ओर से दिया जाने वाला अवार्ड है जो अमेरिकाफिल्म जगत में बेहतरीन कार्यों के लिए दिया जाता है। इसका निर्णय अकादमी के सदस्य वोटिंग से करते हैं, जीतने वाली हस्तियों को अकादमी अवार्ड ऑफ़ मेरिट या जिसे ऑस्कर प्रतिमा कहते है उस ट्राफी से सम्मानित किया जाता है, सबसे पहले यह अवार्ड 1929 में हॉलीवुड रोसवैल्ट होटल में दिया गया।
ये हैं कुछ जानने योग्य और आवश्यक बातें
इस अवार्ड फंक्शन का पहला प्रसारण रेडियो पर 1930 में होना शुरू हुआ जबकि टीवी पर इसका प्रसारण पहली बार 1953 में हुआ,अब यह दुनिया के 200 देशों में लाइव देखा जा सकता है और इसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी हो सकती है। ऑस्कर दुनिया के प्राचीनतम अवार्ड फंक्शन्स में से एक है, इसके समकक्ष टीवी के एमी अवार्ड; थिएटर के टोनी अवार्ड और संगीत के ग्रैमी अवार्ड्स हैं जो इसके बाद शुरू हुए हैं। 88 वें अकादमी अवार्ड्स 28 फरवरी 2016 को डॉल्बी थिएटर में दिए गये जिसे क्रिस रॉक ने संचालित किया। 87वें ऑस्कर समारोह तक शुरुआत से 2947 अवार्ड्स दिए जा चुके हैं।
क्या है इसका इतिहास
15 मिनट में खत्म हो गयी पूरी सेरेमनी
16 मई 1929 को हॉलीवुड रोसवैल्ट होटल में दिए गये इन अवार्ड्स फंक्शन में कुल 270 लोग मौजूद थे। अवार्ड के बाद की सेरेमनी मेफेयर होटल में सम्पन्न हुई। उस रात बिकने वाले टिकेट्स की कीमत 5 डॉलर थी जो आज के समय में 69 डॉलर के बराबर है। उस रोज़ 1827-28 के बीच बनने वाली फिल्मों को टोटल 15 अवार्ड दिए गए। सम्मानित सदस्यों में डायरेक्टर्स; आर्टिस्ट और अन्य लोग भी शामिल थे। यह सेरेमनी 15 मिनट तक चली।
तीन महीने पहले होती थी घोषणा
शुरुआती दौर में अवार्ड्स की घोषणा तीन महीने पहले हो जाती थी जो की दूसरी बार में बदल दिया गया और जिस रात को अवार्ड सेरेमनी होती थी उस रात 11 बजे अखबारों को पूरे नतीजे बता दिए जाते थे। ऐसा एक दशक तक चला, 1941 के बाद से इन्होने नतीजों को लिफाफा बंद करना शुरू कर दिया। 27 मार्च 1957 से बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म की केटेगरी को भी शामिल किया गया जो की इससे पहले विशेष अचीवमेंट अवार्ड में आते थे।
ऑस्कर प्रतिमा कैसे बनी?
अकादमी अवार्ड्स में सात अन्य वार्षिक अवार्ड दिए जाते हैं और दो अवार्ड ऐसे हैं जो वार्षिक नही होते। ऑस्कर प्रतिमा गोल्ड प्लेटेड ब्रितान्नियम धातु से बनी होती है जो एक काले बेस पर स्थापित होती है। यह 34.3 सेमी लम्बी और 3.856 किलोग्राम वजनी होती है। यह एक राजा की आकृति है जो आर्ट डेको शैली में तलवार लिए खड़ा है एक फिल्म की रील पर जिसमे पांच छड़ें होती हैं। यह पांच छड़ें अकादमी की मुख्य पांच धाराओं को सम्बोधित करती है जो है- कलाकार; लेखक; निर्देशक; निर्माता और तकनीशियन।
कैसे पड़ा ऑस्कर का नाम
इसके विषय में मामला कुछ साफ नहीं है लेकिन शोध बताते हैं की अकादमी की एक प्रेसिडेंट बट्टे दाविस ने अपने पहले पति हरमन ऑस्कर नेल्सन के नाम पर इसका नाम ऑस्कर रखा।
एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी मार्गरेट हेरिक
एक और कहानी है जो कहती है की अकादमी की एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी मार्गरेट हेरिक ने 1931 में पहली बार अवार्ड्स देखे और उन्हें अंकल ऑस्कर की याद आई जिसके बाद यह अवार्ड ऑस्कर अवार्ड हो गये। 1931 में अकादमी ऑफ़ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंस ने अंततः इस ट्राफी का नाम ऑस्कर घोषित किया।
ऑस्कर और भारत
1957 में भारत ने पहली बार 30वें अवार्ड्स फंक्शन में अपनी दावेदारी दिखाई जब मदर इंडिया को नामांकित किया गया। अन्य नामांकित फिल्मों में 1988 में बनी मीरा नायर की सलाम बॉम्बे; 2008 में आशुतोष गोवारिकर की लगान आदि रहीं। भारत पर बनी फिल्म स्लमडॉगमिलियनेयर को 2008 में 89वें ऑस्कर अवार्ड्स सेरेमनी में 8 पुरस्कार हासिल हुए जिसमे भारत के संगीतकार ए आर रहमान और गुलज़ार को सर्वश्रेष्ठ गीत और संगीत के लिए रसूल पुकुट्टी को सर्वश्रेष्ठ ध्वनी मिश्रण के लिए पुरस्कृत किया गया।












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