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भारत की ये 15 जगहें बन सकती हैं यूनेस्‍को की वर्ल्‍ड हैरिटेज साइट्स

नई दिल्‍ली। हर वर्ष 18 अप्रैल को दुनिया में यूनेस्‍को की ओर से घोषित वर्ल्‍ड हैरीटेज डे मनाया जाता है। हर वर्ष की तरह भारत में भी इस बार यह दिन मनाया जा रहा है और कई पुरानी धरोहरों को सहेजने का संकल्‍प लिया जा रहा है।

जहां भारत में कई ऐसी धरोहरें मौजूदें हैं जिन्‍हें यूनेस्‍को ने हैरिटेज साइट्स के तौर पर घोषित किया हुआ है तो कुछ अभी इंतजार कर रही हैं।

कई प्राचीन धरोहरों वाले देश भारत में इस समय एक दो नहीं बल्कि 15 ऐसी जगहें जिन्‍हें यूनेस्‍को की ओर से हैरीटेज साइट्स का तमगा मिलने का इंतजार है। आइए आपको ऐसी ही 15 जगहों के बारे में जिन्‍हें हैरीटेज साइट्स का टाइटल मिल सकता है।

बिशनपुर के मंदिर

बिशनपुर के मंदिर

इन मंदिरों का निर्माण ईट और लैटराइट के साथ हुआ है। इन मंदिरों का निर्माण सन 1600 से 1655 के बीच हुआ था।

स्‍वर्ण मंदिर

स्‍वर्ण मंदिर

पंजाब के अमृतसर स्थित स्‍वर्ण मंदिर को श्री हरमंदिर साहिब और श्री दरबार साहिब के नाम से भी जाना जाता है। स्‍वर्ण मंदिर काी स्‍थापना सिख धर्म के संदेश दुनिया तक पहुंचाने के मकसद से सन 1574 में सिखों के चौथे गुरु गुरु रामदास ने की थी। पांचवें गुरु गुरु अर्जन ने पवित्र तालाब के बीच हरमंदिर साहब का डिजाइन तैयार किया था। हरमंदिर साहिद अकाल तख्‍त का भी घर है।

गोलकुंडा का किला

गोलकुंडा का किला

हैदराबाद का कुत्‍ब शाही इमारत के तौर पर मशहूर हैदराबाद गोलकुंडा किला, कुत्‍ब शाही मकबरा, चारमीनार भी इस लिस्‍ट का हिस्‍सा हैं।

ककातिया मंदिर

ककातिया मंदिर

तेलंगाना राज्‍य में स्थित काकातिया मंदिर और प्रवेशद्वारों को भी वर्ल्‍ड हैरीटेज साइट का दर्जा मिल सकता है। तेलंगाना के हानामाकोंडा में स्थित यह मंदिर भगवान शिव, विष्‍णु और सूर्य देवता को समर्पित हैं।

लोट्स मंदिर

लोट्स मंदिर

सभी धर्मों में समरसता और सौहार्द के संदेश को दुनिया तक पहुंचाने के लिए ही दिल्‍ली में लोट्स मंदि का निर्माण हुआ था। इस मंदिर को बहाई संप्रदाय की ओर से ईश्‍वर की एकता को पहचानने के लिए बनवाया गया था।

मुगल गार्डेंस

मुगल गार्डेंस

कश्‍मीर में छह खूबसूरत बगीचों को मुगल गार्डेंस का नाम दिया गया है। इनमें निशात बाग और शालीमार गार्डेन भी शामिल हैं। ये सभी छह बगीचे कश्‍मीर के टूरिज्‍म का एक अहम हिस्‍सा हैं। इन बगीचों को भारत में मुगल शासन के समय तैयार किया गया था।

शांतिनिकेतन

शांतिनिकेतन

राजधानी कोलकाता में स्थित शांतिनिकेतन जिसे देबेंद्रनाथ टैगोर ने निर्मित किया था आज दुनिया भर के छात्रों और बुद्धिजीवियों के लिए प्रेरणा का अहम स्‍त्रोत हैं। देबेंद्रनाथ के बेटे रबिंद्रनाथ टैगोर यहां पर अक्‍सर योग और ध्‍यान करते थे। वर्ष 1922 में यहां पर विश्‍व भारत ने सांस्‍कृतिक और दूसरे कार्यक्रमों की शुरुआत की थी।

मजुली द्वीप

मजुली द्वीप

असम में ब्रह्मपुत्र नदी के बीचों-बीच मुजली द्वीप सात राज्‍यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय का संगम है। मजुली द्वीप करीब 80 किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है।

मांडू की धरोहरें

मांडू की धरोहरें

मध्‍यप्रदेश के जिले धार से करीब 42 किमी दूर, इंदौर से करीब 112 और भोपाल से 300 किमी की दूरी पर मांडु की धरोहरों को भी यूनेस्‍को की लिस्‍ट में जगह मिल सकती है। यहां पर 61 ऐसी एति‍हासिक इमारतें हैं जो देश के लिए काफी अहम हैं।

होयसाला

होयसाला

कर्नाटक के होयसाला युग में यहां पर कई सृजनात्‍मक इमारतों का निर्माण हुआ जिनमें कई मंदिर भी शामिल थे। उस समय करीब 1500 मंदिरों का निर्माण हुआ था लेकिन आज यहां पर सिर्फ 100 ही मंदिर बचे हैं। कहा जाता है कि इन मंदिरों को निर्माण 11वीं से 14 वीं सदी के बीच हुआ था।

पद्मनाभपुरम महल

पद्मनाभपुरम महल

केरल से करीब 50 किलोमीटर दूर तमिलनाडु के कन्‍याकुमारी में स्थित पद्मनाभपुरम महल का निर्माण 16वीं सदी में हुआ था और इसे केरल के त्रावणकोर के राजाओं ने बनवाया था। यह महल लकड़ी का बना हुआ है।

नालंदा

नालंदा

बिहार में नालंदा का अपना एक अलग गौरवशाली इतिहास रहा है। छठवीं सदी में भगवान महावीर और गौतम बुद्ध के काल से अस्तित्‍व में आए नालंदा में भगवान महावीर ने बारिश के 14 सत्रों को गुजारा था। नालंदा भगवान बुद्ध के शिष्‍य सरीपुत्र की भी जन्‍मस्‍थली है।

सारनाथ

सारनाथ

उत्‍तर प्रदेश के जिले वाराणसी से करीब आठ किमी दूर सारनाथ में कई एतिहासिक इमारते हैं जिनमें कई स्‍तूप शामिल हैं।

सेल्‍यूलर जेल

सेल्‍यूलर जेल

पिछले 2000 वर्षों से यह जेल अडमान में मौजूद है इसे 18वीं सदी के मध्‍य में यूरोपियंस ने अपने कब्‍जे में ले लिया था। वर्ष 1942 से 1945 वर्ल्‍ड वॉर टू के दौरान इस पर जापान का कब्‍जा रहा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 29 दिसंबर 1943 को इस जेल का दौरा किया था।

मैट्टानशेरी पैलेस

मैट्टानशेरी पैलेस

केरल के एर्नाकुलम में स्थित इस महल को बताते हैं कि 1555 सदी में पुर्तगालियों ने बनवाया था।

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