Indian Millionaires: तेजी से बढ़ रहे करोड़पति, पर क्यों भारत छोड़ रहे हैं ये नए कुबेर
Indian Millionaires: पिछले 10 साल में भारत में करोड़पतियों की संख्या 300 प्रतिशत से अधिक बढ़ गयी है। 2014 में देश में कल 2. 5 लाख करोड़पति थे, जिनकी संख्या 2022 में बढ़कर 7 लाख 96 हज़ार हो गयी है और एचएसबीसी का आकलन है कि 2030 तक भारत में करोड़पतियों की सख्या 60 लाख तक पहुंच जाएगी। लेकिन साथ में निराशाजनक बात यह है कि नए बने करोड़पति भारत छोड़कर किसी और देश में बसते जा रहे हैं। हेनले प्राइवेट हेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2023 के अंत तक 6500 करोड़पति देश छोड़ देंगे। करोड़पति होने का मापदंड 10 लाख डॉलर के बराबर की परिसम्पति होना है।
भारत दुनिया का सर्वाधिक आबादी वाला देश बन गया है, जहां एक ओर बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर करती है, वहीं दूसरी ओर देश में करोड़पतियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी एक सुखद पहलु है।

दुनिया के 5.96 करोड़ लोग हैं मिलेनियर
केवल भारत में ही करोड़पति नहीं बढ़ रहे हैं, दुनिया भर में अमीरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जान कर आश्चर्य होगा कि अभी पूरी दुनिया में 5.96 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनकी संपत्ति एक मिलियन डॉलर से ज्यादा है यानी भारतीय संदर्भ में कहें तो 8 करोड़ 30 लाख रुपये या इससे अधिक है। हाल के दिनों में इनकी संख्या में तेजी से इजाफा होते देखा जा रहा है।
आयकर के आंकड़े भी कर रहे हैं पुष्टि
देश के आयकर विभाग के आंकड़े भी भारत में बढ़ते अमीरों की संख्या की पुष्टि कर रहे हैं। मार्च 2022 के आंकड़े के अनुसार पिछले दो साल में सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक आय वाले व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स की संख्या दोगुनी हो गई है। आकलन वर्ष 2022-23 के टैक्स रिटर्न के आंकड़े बताते हैं कि कुल 1 लाख 69 हजार 890 लोगों ने सालाना आय एक करोड़ रुपये से अधिक दर्ज कराई। उल्लेखीय है कि देश में वर्ष 2021-22 में ऐसे लोगों की संख्या 1 लाख 14 हजार 446 थी।
दुनिया के सर्वाधिक अमीर अमेरिका में
दुनिया के सर्वाधिक अरबपति जिन देशों में हैं, उनमें सबसे ऊपर अमेरिका है। दूसरे नंबर पर चीन और तीसरे नंबर पर जापान का नाम आता है। दुनिया के 39.1 फीसदी करोड़पति अमेरिका में रहते हैं जबकि चीन में 9.4 फीसद और जापान में 6.6 फीसद करोड़पति रहते हैं। भारत में अभी यह औसत 1 प्रतिशत से भी कम है। अमेरिका में 2 करोड़ 44 लाख लोग मिलेनियर हैं। ये अमेरिका की कुल संख्या का 8.8 फीसदी है। वर्ष 2023 के इन आंकड़ों के अनुसार इनमें 76 फीसद श्वेत हैं जबकि अमेरिका में एशियाई मिलेनियर 8 फीसदी हैं।
आम तौर पर 50 साल में लोग बनते हैं मिलेनियर
एक अध्ययन के अनुसार, एक सामान्य आदमी को अपने दमखम पर 10 लाख डॉलर कमाने में आम तौर पर 32 साल लगते हैं। इस तरह वे 50 साल के हो जाते हैं। आंकड़े ये भी बताते हैं कि अमीर बनने में लोगों की शिक्षा का भी बड़ा योगदान रहता है। आंकड़े बताते हैं कि 88 फीसदी करोड़पति डिग्रीधारी हैं। इनमें 52 फीसदी तो मास्टर और पीएचडी किए हुए हैं।
वर्ष 2027 तक दुनिया की संपत्ति में हो जाएगा 38 फीसदी इजाफा
वित्तीय सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी के रूप में दुनिया भर में चर्चित क्रेडिड सुइस के अनुसार दुनिया की संपत्ति 629 ट्रिलियन डॉलर बढ़ जाएगी। कोविड के प्रभाव के कारण वर्ष 2022 को छोड़कर वर्ष 2008 के बाद से दुनिया की संपत्ति में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। केवल वर्ष 2022 में 11.3 ट्रिलियन डॉलर की कमी आई थी।
करोड़पति महिलाओं की संख्या में भी वृद्धि
वर्ष 2023 महिला करोड़पतियों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। अमेरिका के कुल मिलेनियर्स में 33 फीसदी महिलाएं हैं। आंकड़े ये भी बताते हैं कि ये प्रगति मात्र 9 वर्षो में देखी गई है क्योंकि वर्ष 2014 के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिकी बिलेनियर्स में मात्र 13 फीसदी ही महिलाएं थीं।
हजारों करोड़पति छोड़ रहे भारत
भारत में करोड़पति तो बढ़ रहे हैं, पर उसी रफ्तार से ये करोड़पति देश भी छोड़ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबित वर्ष 2023 में करीब 6500 मिलेनियर्स भारत छोड़ देंगे। पिछले साल ये संख्या लगभग 7500 थी। केवल भारत में ऐसा हो रहा है ये सच नहीं है। चीन से मिलेनियर्स सबसे ज्यादा पलायन कर रहे हैं। चीन के तो इस साल 13.5 हजार मिलेनियर्स दूसरे देशों में बसने जा रहे हैं। ये अमीर सिंगापुर, दुबई, ऑस्ट्रेलिया या ब्रिटेन जाकर बस रहे हैं।
भारत में घट रही है गरीबी, 41.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले
वर्ष 2005-06 से 2019-21 के दौरान यानी कुल 15 सालों में भारत में 41.5 करोड़ लोग गरीबी से मुक्त हो गए हैं। इसकी पुष्टि संयुक्त राष्ट्र ने भी की है। वर्ष 2005-06 में देश की कुल 55.1 फीसदी आबादी गरीब था जो वर्ष 2019-21 में 16.4 फीसदी गरीब बचे हैं।
गरीबी मापने का अलग-अलग पैमाना
गरीबी के अंतरराष्ट्रीय पैमाने की बात करें तो रोजाना 1.25 डॉलर लगभग 100 रुपये खर्च कर सकने वाला व्यक्ति गरीब है। इस पैमाने के हिसाब से भारत में अभी 45.6 करोड़ लोग गरीब हैं। जबकि भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा है कि शहर में खान-पान पर एक महीने में 965 रुपये और गांव में 781 रुपये खर्च कर पाने वाले व्यक्ति को गरीब नहीं माना जा सकता। शहर में 32 रुपये और गांव में 26 रुपये प्रतिदिन खर्च कर सकने वाले व्यक्ति को गरीब नहीं माना जा सकता।












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