Spacewalk: गुरुत्वाकर्षण और वायुमंडल के बिना कैसे होती है स्पेस वॉक?
स्पेस वॉक के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखने के लिए उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, तैयारी और जोखिम प्रबंधन की जरुरत होती है। इतनी सुरक्षा के बावजूद स्पेस वॉक के दौरान कई दुर्घटनाएं घटित हो जाती हैं।

Spacewalk: अंतरिक्ष में जब भी कोई अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष यान से बाहर निकलता है तो उसे स्पेस वॉक कहा जाता है। स्पेस वॉक को एक्स्ट्रा वेहिकुलर एक्टिविटी (EVA) भी कहा जाता है।
स्पेस वॉक के दौरान अंतरिक्ष यात्री एक विशेष स्पेससूट पहनते हैं। यह उन्हें अंतरिक्ष की जटिल परिस्थितियों से सुरक्षा प्रदान करने का काम करता है। स्पेस वॉक ज्यादातर अंतरिक्ष यान की मरम्मत या रखरखाव, अंतरिक्ष यान के किसी उपकरण को लगाने या बदलने और अन्य कोई परीक्षण करने के लिए की जाती है। अंतरिक्ष में शोध के लिए भी स्पेस वॉक महत्वपूर्ण होती है।
स्पेस वॉक में चुनौतियां
अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस वॉक करते समय जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है उनमें सबसे प्रमुख है, अंतरिक्ष में जीरो ग्रेविटी अर्थात गुरुत्वाकर्षण का अभाव। जिसके कारण अंतरिक्ष यात्रियों को वहां पर चलने और कोई भी काम करने में मुश्किलों का सामना करता पड़ता है। अंतरिक्ष में ग्रेविटी नहीं होने के कारण उन्हें अपने शरीर को लगातार एक्टिव रखना पड़ता है। इसके अलावा, अंतरिक्ष का कोई वायुमंडल नहीं होता है, जिसका मतलब कि स्पेस वॉक के दौरान तापमान में बहुत उतार-चढ़ाव होता है।
स्पेस वॉक करते समय अंतरिक्ष यात्रियों के पास सीमित ऑक्सीजन होती है और सही से उपयोग न किए जाने पर खत्म हो सकती है। यही नहीं, अंतरिक्ष यात्री खतरनाक रेडिएशन के संपर्क में आते रहते हैं। साथ ही, स्पेस वॉक अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बहुत तनावपूर्ण होती है, जिससे उन्हें डिप्रेशन जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।
स्पेस वॉक के दौरान दुर्घटनाएं
स्पेस वॉक के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखने के लिए उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, तैयारी और जोखिम प्रबंधन की जरुरत होती है। इतनी सुरक्षा का ध्यान रखने के बावजूद स्पेस वॉक के दौरान कई दुर्घटनाएं घटित हो जाती हैं जैसे स्पेससूट या अन्य उपकरण में खराबी और ऑक्सीजन फेलियर की समस्या।
अगर स्पेस वॉक के दौरान स्पेससूट पंक्चर हो जाता है या फट जाता है, तो डिप्रेशराइजेशन (हवा का दबाव कम होना) हो जाने पर मौत भी हो सकती है। स्पेस वॉक के दौरान अंतरिक्ष यात्री के अंतरिक्ष यान से दूर जाने से यात्री और अंतरिक्ष यान के बीच तकनीकी संपर्क भी टूट सकता है और बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
स्पेस वॉक किसलिए की जाती है
स्पेस वॉक के कई उद्देश्य हो सकते हैं जैसे अंतरिक्ष यान या अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के बाहरी हिस्से की मरम्मत करना। इसके अलावा, इसमें पृथ्वी को ऑब्जर्व करना, किसी धातु या जीवों पर अंतरिक्ष के प्रभाव को समझना, या कोई नयी तकनीक का प्रयोग शामिल होता है। स्पेस वॉक, चांद की सतह और अन्य किसी ग्रह का पता लगाने के मिशन के रूप में भी की जाती है।
स्पेस वॉक कैसे की जाती है?
स्पेस वॉक से पहले अंतरिक्ष यात्री को विशेष स्पेससूट पहनना होता है जिसे एक्स्ट्रा वेहिकुलर मोबिलिटी यूनिट (EMU) कहा जाता है। यह ऑक्सीजन सप्लाई, तापमान नियंत्रण और अंतरिक्ष की जटिल परिस्थितियों से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके बाद, अंतरिक्ष यात्री एयरलॉक में जाता है जहां धीरे-धीरे उसके स्पेससूट का दबाव कम किया जाता है। एक बार दबाव बराबर हो जाने पर, अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष यान या आईएसएस का गेट खोल सकता है और बाहर निकल आता है।
अब अंतरिक्ष यात्री रखरखाव और मरम्मत, रिसर्च जैसे विभिन्न काम अंतरिक्ष में कर सकते हैं। जब स्पेस वॉक पूरी हो जाती है तो अंतरिक्ष यात्री गेट बंदकर एयरलॉक में वापस आते हैं। एयरलॉक को फिर से प्रेशराइज किया जाता है, और अंतरिक्ष यात्री स्पेससूट को हटा देता है।
क्या होता है ISS
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) अंतरिक्ष यात्रियों के रहने के लिए आर्टिफिशियल सैटेलाइट है जो लगभग 408 किलोमीटर (253 मील) की ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करता है। यह चार अंतरिक्ष एजेंसियों अमेरिका की नासा, रूस की रॉसकॉसमॉस (Roscosmos), यूरोप की यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) और जापान की जाक्सा (JAXA) का संयुक्त प्रोजेक्ट है।
स्पेस वॉक के दौरान दुर्घटनाएं
1970 में, अपोलो 13 मिशन की टीम ने खराब ऑक्सीजन टैंक को सही करने के लिए स्पेस वॉक किया था। हालांकि, टैंक को सही करने का काम शुरू करने से पहले ही टैंक फट गया, जिससे टीम को मिशन खत्म कर पृथ्वी पर लौटना पड़ा।
1991 में, गामा रे ऑब्जर्वेटरी को सेटअप करने के लिए एक स्पेस वॉक के दौरान, एक अंतरिक्ष यात्री के दस्ताने लीक होने लगे, जिससे मिशन का समय कम करना पड़ा था।
1998 में, आईएसएस के लिए पहले एसेंब्ली मिशन के दौरान, एक अंतरिक्ष यात्री के हेलमेट में पानी भरना शुरू हो गया, जिससे स्पेस वॉक को जल्दी समाप्त कर दिया गया था।
2013 में, इटली के अंतरिक्ष यात्री की जान आईएसएस के बाहर स्पेसवॉक के दौरान जाते-जाते बची। दरअसल, उनके हेलमेट में पानी भर गया जिससे उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी और उनकी देखने एवं सुनने की क्षमता कम हो गयी।
2015 में, नासा के अंतरिक्ष यात्री को अपने कूलिंग सिस्टम की खराबी के बाद स्पेसवॉक छोटा करना पड़ा। कूलिंग सिस्टम में खराबी के कारण अंतरिक्ष यात्री का स्पेस सूट गरम हो गया था।
2017 में, दो रूसी अंतरिक्ष यात्रियों को अपने स्पेससूट में समस्या के बाद एक स्पेस वॉक छोटी करनी पड़ी थी। अंतरिक्ष यात्रियों में से एक ने बताया कि उनका सूट अंतरिक्ष में दबाव नहीं झेल पा रहा था।
2022 में, नासा ने एक स्पेसवॉक रद्द कर दी थी क्योंकि एक अंतरिक्ष यात्री के हेलमेट में पानी भरना शुरू हो गया था।
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