Aircraft Carrier: एयरक्राफ्ट कैरियर पर कैसे उतरते और रुकते हैं तेज रफ्तार लड़ाकू विमान?
हाल ही में भारतीय लड़ाकू विमानों ने आईएनएस विक्रांत पर लगभग 240 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लैंडिंग की और एयरक्राफ्ट कैरियर पर रुकने में विमान को मात्र 2.5 सेकंड लगे।

रक्षा क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर होने की ओर बहुत तेजी से कदम बढ़ा रहा है। 6 फरवरी 2023 को भारतीय वायु सेना ने पहली बार एमआईजी29के (MiG29K) और स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की भारत के पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर पर लैंडिंग करवाई। इस उपलब्धि पर इंडियन नेवी के वाइस चीफ वाइस एडमिरल एसएन घोरमाडे ने बताया कि "स्वदेशी रूप से विकसित लड़ाकू विमान (नेवी) और MiG29K लड़ाकू विमानों ने अरब सागर में देश के पहले मेड-इन-इंडिया एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर अपनी पहली लैंडिंग की। रक्षा में मेक-इन-इंडिया के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है और यह स्वदेशीकरण को बढ़ावा देगी।"
क्या होता है एयरक्राफ्ट कैरियर?
एयरक्राफ्ट कैरियर एक बड़ा वॉरशिप होता है जिसे समुद्र में मोबाइल एयरबेस के रूप में इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किया जाता है। इसमें आमतौर पर एक लंबा और सपाट डेक होता है जिसका उपयोग विमान को लांच और लैंड करने के लिए किया जाता हैं। यह उड़ान का ठीक से संचालन करने के लिए विभिन्न अत्याधुनिक तकनीकों और इक्विपमेंट से लैस होता है। एयरक्राफ्ट कैरियर को संचालित करने के लिए उसमें चालक दल के अलावा नेविगेशन एवं कम्युनिकेशन सिस्टम, आक्रमण और रक्षा प्रणाली जैसे कई सिस्टम्स मौजूद होते हैं।
एयरक्राफ्ट कैरियर पर लड़ाकू विमान कैसे उतरते हैं
कोई भी लड़ाकू विमान 'अरेस्ट लैंडिंग' करके एक एयरक्राफ्ट कैरियर पर उतरता है। दरअसल, लड़ाकू विमान जैसे ही एयरक्राफ्ट कैरियर के पास पहुंचने वाला होता है तो पायलट, विमान का 'अरेस्ट हुक' लगा देता है, जो डेक के पार फैले केबलों में से एक को पकड़ लेता है। हुक और केबल विमान को जल्दी से धीमा करने और उसे रोकने के लिए एक साथ काम करते हैं। लैंडिंग प्रक्रिया में एयरक्राफ्ट कैरियर के चालक दल और अन्य कर्मियों द्वारा सहायता की जाती है, जो लड़ाकू विमान को एयरक्राफ्ट में ही मौजूद उसके पार्किंग स्थल तक ले जाते हैं। पूरी प्रक्रिया सही तरह से कॉर्डिनेट करके की जाती है और इसके लिए सटीक नियंत्रण की आवश्यकता होती है।
कैसे की जाती है पूरी प्रक्रिया?
सबसे पहले पायलट अपने लड़ाकू विमान को एक तय गति एवं ऊंचाई पर एयरक्राफ्ट कैरियर के पास पहुंचाना शुरू करता है। पायलट को विमान को एयरक्राफ्ट कैरियर की सेंटर लाइन के साथ अलाइन करना होता है। अब एक लैंडिंग सिग्नल ऑफिसर (LSO), जो एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात होता है, विमान की गति, ऊंचाई और अलाइनमेंट पर पायलट को मार्गदर्शन प्रदान करता रहता है। लैंडिंग सिग्नल ऑफिसर यह भी सुनिश्चित करता है कि विमान सुरक्षित रूप से उतर रहा है या नहीं।
जैसे ही विमान कैरियर के पास पहुंचता है, पायलट अरेस्टर हुक को एक्सटेंड करता है, जिसे कैरियर में फैले केबलों में से एक को पकड़ने के लिए डिजाइन किया जाता है। हुक और केबल विमान को जल्दी से धीमा करने और उसे रोकने के लिए एक साथ काम करते हैं। एक बार जब हुक केबल से जुड़ जाता है, तो विमान की गति केबल में ट्रांसफर हो जाती है और विमान तेजी से धीमा हो जाता है। इसके बाद विमान कैरियर पर कुछ ही दूरी पर रुक जाता है। विमान के रुकने के बाद, पायलट विमान को उसके पार्किंग स्थल पर ले जाता है।
इस प्रक्रिया में कुछ रिस्क
खराब मौसम की स्थिति से लैंडिंग प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। जैसे तेज हवा, भारी बारिश और तेज समुद्री लहरें पायलट को विमान पर नियंत्रण बनाए रखने में मुश्किलें पैदा करती हैं। दूसरा, जहाज की गति के कारण एयरक्राफ्ट कैरियर का डेक लगातार हिलता है, और इसका हिलना-डुलना लैंडिंग प्रक्रिया के दौरान विमान की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
तीसरा, लैंडिंग प्रक्रिया के दौरान कभी भी तकनीकी खराबी का खतरा बन सकता है, जैसे कि अरेस्ट हुक या अन्य महत्वपूर्ण लैंडिंग टूल्स में खराबी। चौथा, लैंडिंग प्रक्रिया के लिए पायलट और कैरियर स्टाफ द्वारा सटीक समय के अनुसार निर्णय लेने की आवश्यकता होती है, और किसी भी छोटी गलती के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पांचवां एयरक्राफ्ट कैरियर का डेक का रनवे बेहद सीमित होता है और एक छोटी सी गलती से बहुत भारी नुकसान हो सकता है।
लैंडिंग के वक्त हादसें
27 जनवरी 2022 को अमेरिकी नौसेना का एफ-35सी (F-35C) अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर कार्ल विन्सन पर लैंड कर रहा था लेकिन सही लैंडिंग न होने के कारण वह दक्षिण चीन सागर में गिर गया था। 27 नवंबर 2020 को भारतीय नौसेना का एमआईजी29के लड़ाकू विमान आईएनएस विक्रमादित्य एयरक्राफ्ट कैरियर से अरब महासागर में क्रैश हो गया था। 5 दिसंबर 2016 को सीरिया में रूसी सेना का सुखोई लड़ाकू विमान एडमिरल कुजनेत्सोव एयरक्राफ्ट कैरियर से समुद्र में गिर गया क्योंकि एयरक्राफ्ट कैरियर की एक अरेस्टिंग केबल टूट गई थी।
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