Hindi Diwas 2019: UN में हिंदी में भाषण देने वाले पहले भारतीय थे अटल बिहारी वाजपेयी
नई दिल्ली।14 सितंबर को पूरा भारत देश 'हिंदी दिवस' मनाएगा, इस दिन हिंदी भाषा के महत्व को समझाने और प्रोत्साहन देने के लिए देश भर में कई जगह बहुत सारे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, दरअसल 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा घोषित किया, जिसके बाद 1953 में 14 सितंबर को 'हिंदी दिवस' के तौर पर मनाने का फैसला लिया गया।

UN में हिंदी में भाषण देने वाले पहले भारतीय थे अटल बिहारी
हमारे देश में बहुत सारे लोगों ने हिंदी भाषा को आगे बढ़ाने के लिए बहुत काम किए हैं, देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नाम इस लिस्ट में अग्रणी रहा है, प्रखर वक्ता रहे अटल बिहारी ने हिंदी भाषा को प्रचारित प्रसारित करने के लिए हर संभव कोशिश की थी, पूर्व प्रधानमंत्री पहले ऐसे भारतीय नेता थे, जिन्होंने यूनाइटेड नेशंस (यूएन) में हिंदी में भाषण दिया था, उन्होंने यूएन में भाषण के दौरान हिंदी भाषा को ही चुना था और इसी के जरिए उन्होंने अपनी बात देश ही नहीं दुनिया के सामने पहुंचाई थी।

अटल बिहारी वाजपेयी ने भाषण से जीता था दिल
4 अक्टूबर, 1977 को अटल बिहारी वाजपेयी ने जनता पार्टी की सरकार के विदेश मंत्री के तौर पर में संयुक्त राष्ट्र के अधिवेशन यानी यूनाइटेड नेशंस जनरल एसेंबली (उंगा) में हिंदी में भाषण दिया था। वाजपेयी ने अपने पहले भाषण से ही उन्होंने सभी के दिल में हिंदी भाषा का गहरा प्रभाव छोड़ दिया था।

काफी देर तक सदन में बजती रही थीं तालियां
संयुक्त राष्ट्र में अटल बिहारी वाजपेयी का हिंदी में दिया भाषण उस वक्त काफी लोकप्रिय हुआ था, आपको बता दें कि यह पहला मौका था जब यूएन जैसे बड़े अतंराष्ट्रीय मंच पर भारत की गूंज सुनने को मिली थी। अटल बिहारी वाजपेयी का यह भाषण यूएन में आए सभी प्रतिनिधियों को इतना पसंद आया कि उन्होंने खड़े होकर अटल बिहारी के लिए तालियां बजाई थी।

बेहतरी कवि थे अटल बिहारी, हिंदी से था विशेष लगाव
अटल बिहारी ने जो भाषण दिया था उससे यह साफ पता लगाया जा सकता है कि उन्होंने हिंदी भाषा को अपने दिल के कितने करीब रखा हुआ था, एक बेहतरीन नेता होने के बावजूद भी अटल जी एक अच्छी कविताएं भी लिखा करते थे, जो लोग आज भी पढ़ना या सुनना पसंद करते है।

अटल बिहारी ने अपने भाषण में कही थी 'वसुधैव कुटुंबकम' की बात...
अटल बिहारी ने अपने संबोधन में कहा था कि मैं भारत की जनता की ओर से राष्ट्र संघ के लिए शुभकामनाओं का संदेश लाया हूं। महासभा के इस 32वें अधिवेशन के अवसर पर मैं राष्ट्र संघ में भारत की दृढ़ आस्था को पुनः व्यक्त करना चाहता हूं। जनता सरकार को शासन की बागडोर संभाले केवल छह मास हुए हैं, फिर भी इतने अल्प समय में हमारी उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं। भारत में मूलभूत मानव अधिकार पुनः प्रतिष्ठित हो गए हैं। इस भय और आतंक के वातावरण में हमारे लोगों को घेर लिया था वह दूर हो गया है, ऐसे संवैधानिक कदम उठाए जा रहे हैं जिनसे यह सुनिश्चित हो जाए कि लोकतंत्र और बुनियादी आजादी का अब फिर कभी हनन नहीं होगा। अध्यक्ष महोदय 'वसुधैव कुटुंबकम' की परिकल्पना बहुत पुरानी है। भारत में सदा से हमारा इस धारणा में विश्वास रहा है कि सारा संसार एक परिवार है। अनेकानेक प्रयत्नों और कष्टों के बाद संयुक्त राष्ट्र के रूप में इस स्वप्न के अब साकार होने की संभावना है।












Click it and Unblock the Notifications