Hands-free Driving: हैंड्स-फ्री ड्राइविंग हो रही लोकप्रिय, जानें कितनी है सुरक्षित
Hands-free Driving: जब भी हम नयी कार खरीदने जाते हैं तो हम उसकी कीमत के साथ-साथ उसके फीचर्स पर भी गौर करते हैं। कुछ समय से टेस्ला से लेकर जनरल मोटर्स और फोर्ड जैसी कंपनियां अपनी गाड़ियों में हैंड्स-फ्री ड्राइविंग और ऑटोपॉयलट मोड जैसे फीचर्स दे रही हैं। ज्यादातर कार चालकों को इनको सही तरीके से इस्तेमाल करना नहीं आता और वे इन्हें समझने में गलती कर देते हैं। इसकी वजह से दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं।
पिछले तीन दशक में जिस तरह से ऑटोमोबाइल सेक्टर में नयी टेक्नोलॉजी का चलन बढ़ा है, उससे यह साफ है कि इन टेक्नोलॉजी की वजह से कारें ज्यादा एडवांस हो गयी हैं। उनमें टू-व्हील ड्राइविंग, फोर-व्हील ड्राइविंग के साथ-साथ क्रूज कंट्रोल और हैंड्स-फ्री ड्राइविंग मोड जैसे फीचर्स दिए जाने लगे हैं।

कार निर्माता कंपनियां ग्राहकों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने की कोशिश करती हैं, ताकि उन्हें बेहतर ड्राइविंग का आनंद मिल सके। ज्यादातर कार निर्माता कंपनियां हैंड्स-फ्री ड्राइविंग को सब्सक्रिप्शन या फिर विकल्प के तौर पर जोड़ती हैं। चाहे वह GM यानी जनरल मोटर्स की सुपर क्रूज कार हो या फोर्ड की ब्लूक्रूज या फिर निसान की प्रोपॉयलट ही क्यों न हो, इसे ग्राहक एक विकल्प के तौर पर ले सकते हैं।
लोगों को जागरूक करने की जरूरत
ज्यादातर ड्राइवर्स को लगता है कि हैंड्स-फ्री ड्राइविंग का मतलब है कि कार की स्टीयरिंग को बिना हाथ लगाए ड्राइविंग करना। कार अपने आप किसी टर्निंग या मोड़ पर स्टीयरिंग को घुमा लेगी। हालांकि, तकनीकी तौर पर ऐसा नहीं होता। ऑटो पॉयलट ड्राइविंग का दावा करने वाली एलन मस्क की कंपनी टेस्ला का ऑटोपायलट और फुल सेल्फ ड्राइविंग (FSD) सिस्टम भी तकनीकी तौर पर पूरी तरह से हैंड्स-फ्री नहीं है। ऐसे में ग्राहकों को हैंड्स-फ्री ड्राइविंग का सही मतलब समझाने के लिए कार निर्माता कंपनियों को कैंपेन चलाना पड़ रहा है। इस कैंपेन के जरिए कार चालकों को हैंड्स-फ्री ड्राइविंग का सही मतलब बताया जा रहा है।
आपके मन में भी यह सवाल उठ रहा होगा कि क्या ऑटो या हैंड्स-फ्री ड्राइविंग सुरक्षित है? क्या ड्राइविंग जैसे काम के लिए एक मशीन पर भरोसा किया जा सकता है? चाहे कितने भी सेंसर्स क्यों न लगे हों, एक मशीन ड्राइविंग के समय इंसानों की तरह समझदारी नहीं दिखा सकती है, जिसकी वजह से दुर्घटना होने की संभावना बनी रहेगी और कार में मौजूद लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
ऑटोपॉयलट मोड और हैंड्स-फ्री ड्राइविंग में क्या है अंतर?
जनरल मोटर्स ने पिछले दिनों कार चालकों को हैंड्स-फ्री ड्राइविंग का सही मतलब समझाने के लिए एक कैंपेन चलाया, जो सुपर क्रूज मोड को अन्य सिस्टम से अलग बताता है। साथ ही, उन्हें यह भी समझाया जा सके कि हैंड्स-फ्री ड्राइविंग के दौरान क्या करने की अनुमति है और क्या करने की अनुमति नहीं है? द वर्ज की रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल मोटर्स के एडवांस ड्राइवर असिस्ट सिस्टम (ADAS) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एंड्रयू फराह ने कहा कि पब्लिक एजुकेशन कैंपेन के जरिए कार चालकों को सुपर क्रूज मोड के दौरान कौन सा सिस्टम काम करता है, उसके बारे में बताना है। गाड़ियां कितनी भी एडवांस क्यों न हो जाए, लेकिन आप अभी भी कार के ड्राइवर यानी चालक हैं। इसलिए, जनरल मोटर्स इस सिस्टम को ऑटोनोमस नहीं कह रहा है।
ज्यादातर कार चालकों को ADAS और फुली ऑटोमैटेड ड्राइविंग के बीच का अंतर पता नहीं है। उनको लगता है कि अगर कार एक्सीलरेशन, ब्रेकिंग और लेन सेंट्रिंग आदि को कंट्रोल करते हुए ब्लाइंड स्पॉट को मॉनिटरिंग करते हुए लेन चेंज कर रही है और आपका हाथ स्टीयिंग पर नहीं है, तो इसे सेल्फ ड्राइविंग या ऑटोनोमस ड्राइविंग कह सकते है। वास्तव में, यह सेल्फ ड्राइविंग के साथ ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम होता है। टेस्ला अपनी गाड़ियों को फुली ड्राइवरलेस यानी ऑटोनोमस कहता है। जबकि, टेस्ला की गाड़ी में मौजूद ऑटोनोमस सिस्टम को कुछ समझ में नहीं आता है तो वह बार-बार कार चालक से कंट्रोल लेने के लिए कहता है। ऐसे में कार चालकों को स्टीयरिंग पर हमेशा हाथ रखना होता है और सड़क पर नजर रखनी होती है। ठीक इसी तरह अन्य कंपनियों की हैंड्स-फ्री ड्राइविंग सिस्टम में चालकों को ड्राइविंग के दौरान हमेशा सड़क पर नजर रखने की जरूरत होती है।
हैंड्स-फ्री ड्राइविंग मोड कितना सुरक्षित?
हैंड्स-फ्री ड्राइविंग वाली कारों की बात करें तो जनरल मोटर्स की करीब 80 हजार सुपर क्रूज मोड वाली गाड़ियां सड़कों पर मौजूद है। कंपनी आने वाले दिनों में 22 और मॉडल्स में सुपर क्रूज मोड जोड़ने वाली है। कंपनी का दावा है कि इस मोड में 77 मिलियन यानी 7.7 करोड़ मील गाड़ियां चलाकर टेस्ट की गयी है। वहीं, फोर्ड के पास 2 लाख से ज्यादा गाड़ियां हैंड्स-फ्री ड्राइविंग वाले ब्लूक्रूज सिस्टम से लैस है। फोर्ड ने 100 मिलियन यानी 10 करोड़ मील हैंड्स-फ्री ड्राइविंग टेस्ट की है। टेस्ला की ऑटोपॉयलट मोड वाली गाड़ियों की बात करें तो केवल अमेरिका और कनाडा में कंपनी की 4 लाख से ज्यादा गाड़ियां सड़कों पर हैं। 2019 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ला की ऑटोपॉयलट मोड की वजह से 739 दुर्घटनाएं रिपोर्ट की गयी हैं, जिनमें 17 लोगों की जान चली गयी।
हैंड्स-फ्री ड्राइविंग और सेल्फ ड्राइविंग मोड में ड्राइविंग करते समय भी चालकों को अपनी आंखें खुली रखनी चाहिए और ध्यान पूरी तरह से ड्राइविंग पर रखनी चाहिए। इन एडवांस मोड में स्टीयरिंग पर से हाथ हटाने को कार निर्माता कंपनियां भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं मानती हैं। इन एडवांस फीचर को देने का मतलब है कि ये फीचर्स आपको एक को-पायलट की तरह असिस्ट करेंगे न कि आपकी जगह ड्राइविंग करेंगे। ये आपको सही लेन में कार चलाने, स्पीड कंट्रोल करने, सड़कों पर मौजूद गड्ढों से बचाने के लिए कहेगा। टेस्ला के ऑटोपॉयलट मोड में हुई दुर्घटनाएं बता रही हैं कि मशीन को पूरी तरह से ड्राइविंग का कंट्रोल देना सुरक्षित नहीं है।
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