Hajj 2023: इस साल के हज की शुरुआत, जानें क्या करना जरूरी है हज यात्रा में
Hajj 2023: 26 जून से हज यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। एसोसिएट प्रेस के मुताबिक इस साल सऊदी अरब के मक्का में हज के लिए करीब 20 लाख से अधिक मुसलमानों के जुटने की उम्मीद है। कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से हज पर बीते सालों में पाबंदियां लगा दी गयी थीं, जोकि अब हटा ली गयी हैं। इसलिए इस बार लाखों की संख्या में भीड़ जुटने की उम्मीद जताई जा रही है।
हज अरबी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब तीर्थयात्रा होता है। इस्लाम के पांच जरुरी मुख्य उसूल (फर्ज) - शहादा, नमाज, रोजा, जकात और हज होते हैं। सभी सक्षम मुसलमानों को अपने जीवन में कम-से-कम एक बार हज पर जाना आवश्यक है। यही कारण है कि हर साल पूरी दुनिया के मुसलमान हज के लिए पवित्र शहर मक्का पहुंचते हैं।

हज का इतिहास
इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक लगभग चार हजार साल पहले मक्का का मैदान पूरी तरह से विरान था। तब अल्लाह ने पैगंबर इब्राहिम (यहूदियों के अब्राहम) से उन्हें उनकी दासी और दूसरी पत्नी हाजरा और उससे इब्राहिम के बेटे इस्माइल को फिलीस्तीन से अरब लाने का निर्देश दिया। ताकि उनकी पहली पत्नी सारा की ईर्ष्या से उन्हें बचाया जा सके। इसके बाद अल्लाह ने पैगंबर इब्राहिम को उन्हें उनकी किस्मत पर छोड़ देने के लिए कहा। हालांकि, उन्हें खाने की कुछ चीजें और थोड़ा पानी दिया गया, कुछ दिनों में ही ये सामान खत्म हो गया।
इसके बाद हाजरा और इस्माइल मरूस्थल में भूख-प्यास से बेहाल हो गये। हाजरा मदद के लिए मक्का में मौजूद सफा और मरवा की पहाड़ियों से नीचे उतरीं। तभी भूख और थकान से बेहाल हो चुकी हाजरा गिर गयी और अल्लाह से इस परेशानी से उबारने के लिए मदद मांगी। इसी बीच इस्माइल ने जमीन पर पैर पटकना शुरू कर दिया, तभी धरती के अंदर से पानी का एक स्रोत फूट पड़ा। जिसे पीकर हाजरा और इस्माइल दोनों ने अपनी प्यास बुझाई। इसी पानी को आब-ए-जमजम यानी जमजम कुएं का पानी कहा जाता है। मक्का की पवित्र मस्जिद अल-हरम से करीब 66 फीट दूरी पर यह कुआं है। मुसलमानों के लिए यह बहुत पवित्र पानी है।
अल्लाह ने पैगंबर इब्राहिम से मांगी कुर्बानी
एक बार अल्लाह ने पैगंबर इब्राहिम की परीक्षा लेते हुए उनसे उनके बेटे की कुर्बानी मांगी, पर कुर्बानी के समय अल्लाह ने उनका हाथ रोक लिया। इसके बाद पैगंबर इब्राहिम को अल्लाह ने एक तीर्थस्थान बनाकर समर्पित करने के लिए कहा था। तब इब्राहिम और उनके बेटे इस्माइल ने पत्थर की एक छोटी-सी घनाकार इमारत बनाई थी। इसी को आज काबा कहा जाता है।
बाद में धीरे-धीरे लोगों ने यहां अलग-अलग ईश्वरों की पूजा शुरू कर दी। मुसलमानों का मानना है कि इस्लाम के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद (570-632) को अल्लाह ने कहा कि वह काबा को पहले जैसी स्थिति में लाये और वहां केवल अल्लाह की इबादत होने दें। तब साल 628 में पैगंबर मोहम्मद ने अपने 1400 अनुयायियों के साथ एक यात्रा शुरू की थी। ये इस्लाम की पहली तीर्थयात्रा बनी। इसी को हज कहा जाता है।
कब शुरू होती है हज यात्रा?
इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है। जिसके अनुसार बारहवें और अंतिम महीने जिल-हिज्जा की 8वीं तारीख से 12वीं तारीख तक हज यात्रा होती है। साल 2023 में 26 जून से हज की यात्रा की शुरुआत हुई और 1 जुलाई तक इसका आयोजन होगा। इसी दरमियान 28 जून को बकरीद का त्यौहार मनाया जायेगा।
हज यात्रा की शुरुआत
किसी भी देश के हज यात्री (हाजी) पहले सऊदी अरब के जेद्दा शहर पहुंचते हैं। वहां से हाजी बस के जरिये सबसे पहले एक विशेष जगह मीकात जाते हैं। जहां से हज की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू होती है। यह मक्का शहर के आठ किलोमीटर दूर है।
अहराम - हज की यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को यहां से एक खास तरह का कपड़ा यानी अहराम पहनना होता है। यह बिना सिला हुआ सफेद कपड़ा होता है। दरअसल, हज के दौरान पुरुष सिले हुए कपड़े नहीं पहन सकते। हालांकि, महिलाओं को अहराम पहनने की जरूरत नहीं होती, वे परंपरागत सफेद रंग के कपड़े पहनती हैं और अपना सिर हिजाब से ढंकती है।
उमरा - इसके बाद यात्रा के पहले दिन मक्का पहुंचकर हज यात्री सबसे पहले उमरा करते हैं। उमरा करने वाले तीर्थयात्रियों को काबा के इर्द-गिर्द चक्कर (परिक्रमा) लगाना होता है यह एक छोटी धार्मिक प्रक्रिया है। उमरा साल में कभी भी की जा सकती है। जो लोग भी हज पर जाते हैं वे आमतौर पर उमरा भी करते हैं।
मीना शहर मुसलमानों के लिए खास
इस्लामिक तारीख के हिसाब से हज की शुरुआत आठ तारीख से होती है। इसी आठ तारीख (पहला दिन) को हाजी दिन में मक्का में इबादत करने के बाद शाम को मक्का से करीब 12 किलोमीटर दूर मीना शहर जाते है। जहां वे एक रात गुजार कर अगली सुबह नौ तारीख (दूसरा दिन) को अराफात के मैदान पहुंचते हैं। हज यात्री अराफात के मैदान में खड़े होकर अल्लाह की इबादत करते है और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। इसी दिन शाम को हज यात्री वहां से मुजदलफा शहर जाते हैं और वहां रात्रि में विश्राम करते हैं।
अगले दिन यानी हज यात्रा के तीसरे दिन की सुबह हाजी फिर मीना शहर लौटते हैं। जहां पर मुसलमानों द्वारा शैतान को पत्थर मारने की परंपरा होती है। इसे जमारात कहा जाता है। उसके बाद यहां पर पुरुष अपना सिर मुंडवाते है।
बकरीद का त्यौहार
तीसरे दिन ही हाजी मक्का वापस लौटते हैं और काबा के सात चक्कर लगाते हैं। इस प्रक्रिया को तवाफ कहते है। इस्लामिक कैंलेडर के इसी 10 तारीख को पूरी दुनिया में ईद-उल-अजहा यानि बकरीद मनाया जाता है। तवाफ के बाद हज यात्री फिर से मीना शहर लौट जाते है और वहां दो दिन तंबूनुमा घरों में रहते हैं। महीने की 12 तारीख को यानि पांचवे दिन आखिरी बार हज यात्री मक्का पहुंच काबा का तवाफ करते हैं। इस तरह हज की यात्रा पूरी होती है।
दुनियाभर से लाखों लोग आते हैं हज करने
सऊदी अरब हर देश के हिसाब से हज का कोटा तैयार करता है। इंडोनेशिया का कोटा सबसे ज्यादा है। इसके बाद पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश, नाइजीरिया के नंबर आते हैं। इसके अलावा ईरान, तुर्किये, इजिप्ट, इथियोपिया समेत कई देशों से हज यात्री आते हैं।
अलजजीरा की एक खबर के मुताबिक कोरोना के कारण साल 2020 में केवल 1,000 स्थानीय तीर्थयात्रियों को हज करने की अनुमति दी गयी थी। जबकि 2021 में, संख्या बढ़कर 60,000 पहुंच गयी। जबकि पिछले साल 2022 में दस लाख हज यात्री पहुंचे थे। साल 2019 में इन सबसे अधिक 25 लाख तीर्थयात्रियों ने हज किया था।
भारत का हज का कोटा
पीआईबी के मुताबिक हज 2023 के लिए सऊदी अरब के साथ वार्षिक द्विपक्षीय समझौते के तहत बातचीत की गयी थी। फिलहाल हज 2023 के लिए भारत का कुल हज कोटा सऊदी अरब द्वारा 175,025 बहाल किया गया है। जबकि साल 2022 में यह संख्या 79,237 तय की गयी थी। इसमें से 56,601 लोग भारतीय हज समिति के जरिए और 22,636 लोग हज ग्रुप ऑर्गेनइजर्स के जरिए पहुंचे थे।
भारत से बिन महरम के यात्रा करेंगी महिलाएं
हज कमेटी ऑफ इंडिया (एचसीओआई) के मुताबिक इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि बड़ी संख्या में भारतीय महिलाओं ने बिना किसी महरम (खून के रिश्ते के किसी पुरुष साथी को अभिभावक के तौर पर ले जाये बगैर) हज जाने के लिए आवेदन किया है। इन महिलाओं की संख्या 4314 बतायी गयी है। बता दें कि साल 2018 में पहली बार भारत ने महरम की अनिवार्यता हटाई थी। तब से लेकर 2022 तक कुल 3,401 महिलाएं बिना पुरूष रिश्तेदार के हज यात्रा कर चुकी हैं।
हज से सऊदी अरब को कितनी कमाई?
दुनियाभर में मुसलमानों की जितनी आबादी है, उसके महज दो प्रतिशत ही सऊदी अरब में रहते हैं। जबकि पिछले दस साल से हज की यात्रा करने वाले मुसलमानों का एक तिहाई इस मुल्क में रहता है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, कोविड महामारी के पहले सऊदी अरब को हज से हर साल 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर का राजस्व हासिल होता था। साल 2022 में हज से सऊदी अरब में एक लाख नई नौकरियां पैदा हुई थीं।
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