• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts
Oneindia App Download

Gyanvapi Case: ज्ञानवापी मामले में नया मोड़, क्या है इस विवाद का इतिहास?

Google Oneindia News

17 नवंबर को वाराणसी की फास्ट ट्रैक अदालत ने ज्ञानवापी परिसर में मुसलमानों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने और मस्जिद के वजूखाने में मिले शिवलिंग की पूजा पाठ की अनुमति के लिए आग्रह वाली याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी। अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को करेगी।

Gyanvapi Masjid
हिंदू पक्ष के वकीलों ने दलील दी थी कि संपत्ति के अधिकार के तहत देवता को अपनी जायदाद पाने का मौलिक अधिकार है। जबकि मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि यह मामला उपासना स्थल अधिनियम 1991 के तहत आता है। इसलिए इस पर सुनवाई न की जाए। इस पर अदालत ने यह कहते हुए मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज कर दी कि इस मामले में उपासना स्थल अधिनियम 1991 लागू नहीं होता है और यह याचिका सुनवाई योग्य है।

इससे पहले अदालत ने 15 अक्टूबर को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद आदेश के लिए 27 अक्टूबर की तारीख तय की थी, लेकिन कई तिथियों के बाद 17 नवंबर को अदालत ने आदेश जारी किया।

गौरतलब है कि मई महीने में सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी शृंगार गौरी परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे में ज्ञानवापी मस्जिद के वजू खाने से एक आकृति सार्वजनिक हुई थी। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह शिवलिंग है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने उसे फव्वारा बताया था और कहा था कि मुगलकालीन इमारतों में ऐसे फव्वारे मिलना कोई बड़ी बात नहीं है।

क्या है काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास?

वाराणसी विश्व के प्राचीनतम नगरों में से है। काशी विश्वनाथ हिंदुओं के परम पवित्र बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है।

इतिहासकार फिरिश्ता ने दावा किया है कि महमूद गजनवी ने भारत में सैकड़ों मंदिरों को तबाह किया और उनकी अकूत संपत्ति को लूटा तथा लाखों लोगों को गुलाम बनाकर ले गया। प्रत्येक आक्रमणकारी ने मंदिरों को अपना निशाना बनाया, उन्हें लूटा, मूर्तियों को तोड़ा और अनेक मंदिरों को मस्जिदों में बदल दिया।

सैन मार्टिन ने अपनी पुस्तक में पुरातत्व प्रमाण प्रस्तुत करके यह साबित किया है कि औरंगजेब ने इस देश में सैकड़ों मंदिरों को ध्वस्त किया और उन्हें मस्जिदों में बदला। इनमें विश्वविख्यात काशी विश्वनाथ का मंदिर भी शामिल था।

1664 में औरंगजेब ने इस मंदिर पर पहला हमला किया था, जिसे नागा साधुओं ने हजारों की संख्या में आत्मबलिदान देकर विफल कर दिया। 1669 में औरंगजेब के आदेश पर काशी विश्वनाथ के पवित्र मंदिर को ध्वस्त करके उसकी जगह ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कर दिया गया।

अनेक विदेशी इतिहासकारों ने इस बात की पुष्टि की है कि वर्तमान ज्ञानवापी मस्जिद के समीप प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर के पुरावशेष दबे हुए हैं। इतिहासकारों के अनुसार मोहम्मद गोरी के सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1194 में सर्वप्रथम काशी विश्वनाथ के पवित्र मंदिर को ध्वस्त किया।

मगर इस मंदिर का पुनर्निर्माण 13वीं शताब्दी में कुछ गुजराती व्यापारियों ने किया, जिसे बाद में जौनपुर के शर्की सुल्तानों ने पुनः ध्वस्त कर दिया। 15वीं शताब्दी में सिकंदर लोदी की फौज ने फिर काशी विश्वनाथ के मंदिर को ध्वस्त किया, जिसका नवनिर्माण अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल ने करवाया। इसी मंदिर को औरंगजेब ने ध्वस्त किया था।

वर्तमान मंदिर जो कि पुराने मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित है, उसका निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने 1780 में करवाया था। बताया जाता है कि उनके ससुर मलहार राव होल्कर ने 1742 में इस बात का प्रयास किया था कि ज्ञानवापी मस्जिद को ध्वस्त करके वहां पर मंदिर का निर्माण किया जाए, मगर अवध के नवाबों के हस्तक्षेप के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसी मंदिर को पंजाब के महाराजा रंजीत सिंह ने 40 मन सोना दान दिया था, जो आज भी इस मंदिर के शिखर की शोभा बढ़ा रहा है।

कब शुरू हुआ काशी विश्वनाथ मंदिर - ज्ञानवापी मस्जिद का कानूनी विवाद?

1809 में मस्जिद परिसर के बाहर नमाज पढ़ने को लेकर विवाद के बाद सांप्रदायिक दंगे हुए।

1984 में दिल्ली में हुई धर्म संसद में हिंदू पक्ष को अयोध्या, काशी और मथुरा पर दावा करने को कहा गया।

1991 में वाराणसी की अदालत में याचिका दायर कर ज्ञानवापी परिसर में पूजा करने और मस्जिद को ढहाने की मांग की गई।

1998 में अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निचली अदालत की सुनवाई पर रोक लगाई।

2019 में वाराणसी जिला अदालत में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की मांग वाली याचिका दायर हुई।

2020 में मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वे कराने की मांग वाली याचिका का विरोध किया।

2020 में ही याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा स्टे नहीं बढ़ाने पर वाराणसी की निचली अदालत से फिर से सुनवाई शुरू करने का अनुरोध किया।

18 अगस्त 2021 को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शृंगार गौरी मंदिर में प्रतिदिन पूजा के लिए पांच महिलाओं ने याचिका दाखिल की।

26 अप्रैल 2022 को अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद में वीडियोग्राफी और सर्वे कराने के आदेश दिए।

6 मई 2022 को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वे शुरू हुआ और 16 मई 2022 को सर्वे का काम पूरा हुआ।

24 मई 2022 को एक नई याचिका दायर की गई, जिसमें ज्ञानवापी परिसर में मुसलमानों के नमाज पढ़ने पर रोक लगाने, परिसर को हिंदुओं को सौंपने और सर्वे के दौरान परिसर में मिले शिवलिंग की नियमित पूजा करने की अनुमति देने की मांग की गई।

25 मई 2022 को जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश ने याचिका को फास्ट ट्रैक अदालत में स्थानांतरित कर दिया।

15 अक्टूबर 2022 को अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हुईं और आदेश के लिए 27 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की गई।

18 अक्टूबर 2022 तक दोनों पक्षों को लिखित बहस दाखिल करने को कहा गया।

14 नवंबर को इस मामले में अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 17 नवंबर की तारीख दी।

Comments
English summary
Gyanvapi mosque Case know history timeline and all about
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X