बिकने के बाद क्या-क्या होता है दुल्हन के साथ
बेंगलुरु। महिला दिवस पर एक बार फिर महिलाओं से जड़े मुद्दों पर चर्चा शुरू हो गई हैं। और एक सप्ताह तक तमाम चर्चाएं जारी रहेंगी। ऐसे में हम उन महिलाओं का दर्द आपके सामने रखने जा रहे हैं, जिनका व्यापार लाल जोड़ा पहना कर किया जाता है।
शुरु करते हैं बबली से जो उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। अफसोस मीडिया की नजर बबली जैसी लड़कियों तक नहीं पहुंचती है, जिनके खुद के रिश्तेदारों ने अगवा करके बेच देते हैा। हम इस लेख की शुरुआत कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के हरदोई के बड़ा चौराहा के पास रहने वाली बबली की कहानी से, जिसे करीब पांच साल पहले अगवा कर लिया गया था। बबली की कहानी के साथ हम आपको बतायेंगे कि भारत की ढाई लाख लड़कियों के साथ क्या-क्या हुआ।
बबली तब 10वीं कक्षा में पढ़ती थी, जब स्कूल से लौटते वक्त कुछ लोगों ने उसे किडनैप किया। उसे कार में बिठाकर सबसे पहले मेरठ ले जाया गया, जहां उसका 20 हजार रुपए में सौदा कर दिया गया। मेरठ के सौदागरों ने उसके साथ एक नहीं कई बार बलात्कार किया और जब मन भर गया, तो यह तय किया कि अब वो बबली की शादी कर देंगे। बबली को बा-कायदा दुल्हन बनाया गया और हिसार के एक अमीर परिवार में वो बहू बनकर गई। बबली को लगा शायद अब उसकी जिंदगी संवर जायेगी, लेकिन नहीं। वहां उसके पति के साथ-साथ पति के भाईयों ने बबली को अपन हवस का शिकार बनाया।
बबली ने कई बार भागने के प्रयास किये, लेकिन हर बार नाकाम हो जाती। 2012 की दीवाली की रात जब पूरा घर पटाखों की धूम-धड़ाम का मजा ले रहा था, तब बबली वहां से भाग निकली और सीधे पुलिस स्टेशन पहुंची। पुलिस और एक एनजीओ की मदद से आज बबली अपने घर वापस लौट आयी है। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं बल्कि शुरू होती है, क्योंकि सिर्फ राजस्थान में ही बबली जैसी 2,619,160 लड़कियां हैं, जो कहां हैं? उनके साथ क्या हो रहा है? जीवित हैं या नहीं? किसे बेच दी गईं? कोई नहीं जानता, क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में लड़कियों की खरीदफरोख्त का व्यापार सदियों से चला आ रहा है और पुलिस भी इसे रोक पाने में नाकाम है।
लड़कियों की खरीद-फरोख्त से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य हम स्लाइडर में तस्वीरों के सामने पेश करने जा रहे हैं, उन्हें पढ़कर शायद आपके होश फाख्ता हो जायें। क्योंकि भारत में भयानक अपराध का खात्मा अब तक किसी भी राज्य की पुलिस नहीं कर पायी है।

राजस्थान में ढाई लाख लड़कियां लापता
2011 के सेंसस की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में पिछले 5 सालों में 2,619,160 गायब हो गईं। कहां गईं, किसी को नहीं पता। बहुत सारे मामले तो पुलिस में दर्ज तक नहीं हुए।

दुल्हन का व्यापार
शादी के नाम पर दुल्हन का व्यापार सबसे ज्यादा राजस्थान और हरियाणा में होता है।

दुल्हनों के साथ बलात्कार
बिकने के बाद दुल्हनों के साथ एक नहीं कई कई बार बलात्कार किया जाता है और बार-बार उन्हें बेचा जाता है। कई दुल्हन तो अंत में वेश्यावृत्ति के दलदल में फंस जाती हैं।

बेची गईं दुल्हनों के कोड वर्ड
जिन दुल्हनों को बेच दिया जाता है उन्हें पारो, मोलकी, जुगाड़, माल, आदि कहकर संबोधित किया जाता है।

पिछड़ी जाति की लड़कियां
ऐसी वारदातों की शिकार सबसे ज्यादा पिछड़ी जाति की लड़कियां होती हैं, क्योंकि उनके गरीब माता-पिता पैसे के लालच में अपनी बेटी का सौदा कर बैठते हैं।

2 से 50 हजार रुपए तक कीमत
हरियाणा में दुल्हनों की कीमत 2 हजार से लेकर 50 हजार रुपए तक होती है। कई बार एक लाख तक भी कीमत लग जाती है।

90 प्रतिशत लड़कियां देश के अंदर
ग्लोबल व्याइस की रिपोर्ट के अनुसार 90 प्रतिशत लड़कियां देश के अंदर ही बेची जाती हैं, यानी एक राज्य से दूसरे राज्य में।

अन्य राज्यों का हाल
देश भर में खरीखी व बेची जाने वाली लड़कियों में 23 फीसदी लड़कियां पश्चिम बंगाल की होती हैं। 17 फीसदी बिहार से, 13 फीसदी असम से, 11 फीसदी आंध्र प्रदेश से, 8 फीसदी ओडिशा से और 6 फीसदी केरल से।

उम्र 13 से 23 साल
जो लड़कियां बेची जाती हैं, उनमें अधिकांश की उम्र 13 से 23 साल के बीच होती है।

पति के अलावा भी करते हैं संभोग
खरीदी गई दुल्हन के साथ सिर्फ उसका पति ही संभोग नहीं करता, बल्कि उसके भाई व दोस्त भी अपनी रातें रंगीन करते हैं। इसीलिये ऐसी दुल्हनों में एचआईवी का खतरा ज्यादा रहता है।

70 फीसदी का गैंगरेप
ईस्टर्न पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार बिकने के बाद 70 फीसदी दुल्हनों के साथ गैंगरेप होता है।

शादी नहीं क्राइम है यह
दुल्हनों की खरीद-फरोख्त शादी नहीं बल्कि एक घिनौना अपराध है, जिसे रोकने में पुलिस अब तक नाकाम साबित हुई है।












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