Ghulam Nabi Azad: सोनिया क्यों नहीं बनी पीएम, जानें गुलाम नबी आजाद के खुलासे

बतौर गुलाम नबी आजाद, “बेवफा तो वो हैं जिनको सब नजर आ रहा है, लेकिन हिम्मत नहीं है कि लीडरशिप को कह दें कि सब कुछ बर्बाद हो चुका है।”

Ghulam Nabi Azad revelations about congress Why Sonia gandhi did not become PM

Ghulam Nabi Azad: कांग्रेस के पूर्व सीनियर लीडर और डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के प्रमुख गुलाम नबी आजाद इन दिनों चर्चा में है। उन्होंने अपनी अपनी आत्मकथा 'आजाद' में कांग्रेस के अनेक फैसलों और उनके पीछे के राजनीतिक घटनाक्रमों का खुलासा किया है। इसके अलावा वर्तमान में चल रहे घटनाक्रम पर भी उन्होंने बेबाक टिप्पणी की है।

शिक्षित, सभ्य और ईमानदार थे मनमोहन सिंह

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री पद के लिये क्यों चुना गया? जबकि साथी नेता प्रणब मुखर्जी भी दौड़ में थे। इस पर गुलाम नबी आजाद ने खुलासा करते हुए कहा कि मनमोहन सिंह शिक्षित और सभ्य व्यक्ति थे। एक शिक्षित, सभ्य और ईमानदार होने का गुण उनके पक्ष में गया।

आजाद के अनुसार, "मनमोहन सिंह एक सभ्य व्यक्ति थे, पढ़े-लिखे थे, बड़े विद्वान थे, बहुत अच्छे वित्त मंत्री थे। जब वह 5 साल वित्तमंत्री थे, उस समय मैं पर्यटन मंत्री था। हमारी बहुत अच्छी बनती थी। वह बहुत ईमानदार थे।"

बता दें कि 2004 से 2014 तक मनमोहन कुल 10 साल तक देश के प्रधानमंत्री रहे। वहीं, प्रणब मुखर्जी को पीएम नहीं बनाने की वजह का खुलासा करते हुए आजाद कहते हैं, "हमने जिसे चुना था, उसमें कंपैटिबिलिटी होनी चाहिए थी और वित्त मंत्री के रूप में मनमोहन सिंह की छवि बनी। उपलब्धि जो भी रही, नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री रहते हुए भी लोगों को वित्त मंत्री पर भरोसा था। वह विश्व के जाने-माने अर्थशास्त्री थे। लेकिन बाद में प्रणब मुखर्जी देश के राष्ट्रपति बने।

सुषमा स्वराज की धमकी से डरी थी सोनिया

गुलाम नबी आजाद ने पहली बार खुलासा किया कि सोनिया गांधी ने 2004 में प्रधानमंत्री बनने से क्यों मना कर दिया? उन्होंने कहा कि सोनिया न तो खुद को अल्पसंख्यक मानती है, न ही कोई पार्टी में ऐसा सोचता है। उन्होंने बहुसंख्यक समुदाय के व्यक्ति से शादी की। सोनियाजी घर पर हिंदू धर्म का पालन करती हैं। लेकिन उनके परिवार को समस्या थी (सोनिया के पीएम बनने पर)। क्योंकि सुषमा (स्वराज) ने अपने बाल मुंडवाने और देशभर में यात्रा करने की धमकी दी थी। मुझे लगता है कि (गांधी) परिवार डर गया था क्योंकि एक नया विवाद खड़ा हो सकता था। पार्टी बहुत मुश्किलों के बाद सत्ता में लौटी थी।" इस सोच के चलते सोनिया ने पीएम बनने से इंकार कर दिया।

करीब आधा दर्जन लोगों की वजह से पार्टी गर्त में जा रही है

आजाद के अनुसार करीब आधा दर्जन लोगों की वजह से कांग्रेस गर्त में जा रही है। यह लोग पार्टी के भविष्य में रुचि नहीं रखते। कांग्रेस को गिरते हुए देखकर मुझे बहुत खुशी नहीं हो रही है। यह आधा दर्जन लोग केवल मीडिया और जनता में अपने स्वयं के प्रक्षेपण में रुचि रखते हैं।

कांग्रेस के युवा नेताओं के भाजपा जैसी अन्य पार्टियों में जाने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी उनके जैसे बड़ों की तुलना में नेतृत्व से दस गुना ज्यादा निराश है। जो लोग चले गए उनमें से ज्यादातर राहुल गांधी की टीम का हिस्सा थे। राहुल गांधी के नेतृत्व और दिशा की कमी के कारण वे चले गए।

कांग्रेस नेतृत्व ने बनाया भाजपा को मजबूत

उन्होंने किताब में यह भी लिखा कांग्रेस नेतृत्व की वजह से बीजेपी भारत में एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी बन गई है। राहुल गांधी बत्तख की तरह बैठे है और कुछ नहीं कर रहे। बल्कि वह ऐसे काम करते रहे हैं जिससे बीजेपी को मदद मिले। कांग्रेस का वर्तमान नेतृत्व ही है, जो भाजपा को बढ़ावा दे रहा है।

कांग्रेस परिवार के अनेक बिजनेसमैन से संबंध

कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा गुलाम नबी आजाद सहित पांच पूर्व कांग्रेस नेताओं को गौतम अडानी के साथ जोड़ने वाला एक ट्वीट पोस्ट करने के एक दिन बाद आजाद ने गांधी पर पलटवार किया। आजाद ने कहा कि उनका किसी बिजनेसमैन से कोई संबंध नहीं है, लेकिन कांग्रेस परिवार के कई बिजनेसमैन से संबंध हैं। आजाद ने आरोप लगाया कि विदेश यात्रा के दौरान राहुल गांधी अवांछित कारोबारियों से मिलते हैं। उनका पूरा परिवार हमेशा से कारोबारियों से जुड़ा रहा है। इसमें राहुल गांधी भी शामिल है। परिवार के लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है। मैं ऐसे दस उदाहरण दे सकता हूं जहां वह देश के बाहर भी ऐसे लोगों से मिलने के लिए जाते थे, जो अवांछनीय व्यवसायी हैं।

राहुल की भारत जोड़ो यात्रा असफल

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    आजाद ने कहा कि वह इस बात से सहमत नहीं हैं कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से कांग्रेस पार्टी को फायदा हुआ है। बहुत से लोग कहते हैं कि भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी का दबदबा बढ़ गया है। लेकिन मैंने महसूस किया कि उनका कोई प्रभाव नहीं है‌। आजाद ने बताया कि 1978 में, श्रीमती गांधी को अयोग्य घोषित किया गया और जेल में डाल दिया गया। कुछ ही घंटों में एक लाख से ज्यादा लोग जेल गए। जेल के बाहर दस लाख लोग इंतजार कर रहे थे क्योंकि जेल में जगह नहीं थी। मेरे साथ दस हजार लोगों ने संसद तक विरोध मार्च निकाला। मैं करीब एक महीने तक तिहाड़ जेल में रहा। भारत जोड़ो यात्रा के तुरंत बाद, राहुल गांधी को सजा सुनाकर अयोग्य घोषित कर दिया गया है। एक मच्छर भी नहीं रोया या सड़क पर नहीं आया। उन्हें दिल्ली की कार्यसमिति के सदस्यों, दिल्ली के सांसदों और गुजरात के विधायकों के साथ सूरत कोर्ट जाना पड़ा। गुजरात का एक भी युवा या किसान शामिल नहीं हुआ। इससे यह साबित होता है कि भारत जोड़ो यात्रा से राहुल आमजन को जोड़ने में असफल रहे।

    यह भी पढ़ें: राहुल गांधी के विदेशों में भी 'अवांछनीय कारोबारियों' से संबंध, गुलाम नबी आजाद ने परिवार को भी घेरा

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