Eco-Friendly Ganesh: गणपति बप्पा की अनोखी मूर्तियां, पर्यावरण का भरपूर ख्याल
Eco-Friendly Ganesh: 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन से शुरू हुआ गणेश उत्सव अब अंतिम पड़ाव पर है। इसका समापन अनंत चतुर्दशी के दिन 28 सितंबर 2023 गुरुवार के दिन किया जाएगा। मुंबई का गणेश उत्सव विश्वविख्यात है। सिद्धि विनायक मंदिर तो है ही ख़ास, पर यहां के कई और पंडाल बहुत मशहूर हैं, जैसे- लालबाग का राजा, गणेश गली मुंबई का राजा, अंधेरी का राजा। पर इस बार देश के कई हिस्सों में गणेश की ऐसी प्रतिमाएं बनाई गईं हैं, जो अपनी विशिष्टता के कारण काफी चर्चा में रहीं। कहीं चॉकलेट के गणपति बनाए गए तो कहीं पेपर, बेर और नारियल के।
चॉकलेट और अनाज से बनी 'बप्पा' की मूर्ति
मुंबई में डिजाइनर रिंटू राठौड़ ने चॉकलेट, नौ प्रकार के मोटे अनाज व अन्य सामग्री से भगवान गणेश की दो फुट की सुंदर मूर्ति बनाई है। गणपति की यह मूर्ति वृश्चिकासन मुद्रा में है। डिजाइनर के मुताबिक बप्पा की मूर्ति चॉकलेट पाउडर और नौ प्रकार के मोटे अनाज से बनाई गई है, क्योंकि इस वर्ष को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। मूर्ति बनाने में सूखे अंजीर, काजू, बादाम, केसर, इलायची, गुड़ और खाने वाले गोंद के पेस्ट का भी इस्तेमाल किया गया है। 40 किलो वजनी इस मूर्ति को बनाने में 20 घंटे लगे हैं। इस अनूठी मूर्ति का विसर्जन भी असामान्य तरीके से किया जाएगा। इस मूर्ति को दूध में विसर्जन किया जाएगा। इसके बाद चॉकलेट युक्त इस दूध को परिवार, दोस्तों और लोगो के बीच प्रसाद के रूप में वितरित कर दिया जाएगा।

पेपर से बनी 22 फीट की प्रतिमा
मुंबई के प्रभादेवी इलाके में इस साल गणेश मंडल ने बप्पा की 22 फीट की मूर्ति को पर्यावरण अनुकूल बनाया है। इस मूर्ति को पूरी तरीके से पेपर और कार्डबोर्ड की मदद से बनाया गया है। इस मंडल का नाम एलफिन्स्टनचा राजा है, जो 1992 से गणपति बप्पा की मूर्ति बैठा रहा है। यह मूर्ति 100 प्रतिशत इको फ्रेंडली है। इसमें समुद्र में शेषनाग के ऊपर बप्पा को स्थापित किया गया है। इस मूर्ति की सजावट के साथ कई संदेश भी रखे गए हैं, जैसे कि भगवान के ऊपर फूल माला ना चढ़ा कर एक किताब और एक पेन दान करें। इस मूर्ति को बनाने वाले मूर्तिकार पराग पराधि के मुताबिक इसको बनाने में 3 महीने का समय लग जाता है।
50 किलो 'सूखे बेर' से बनी 6 फीट की मूर्ति
मध्य प्रदेश के सागर जिले के बीना में भगवान गणेश के एक भक्त ने बेहद ही अनोखी प्रतिमा तैयार की है। जिसकी चर्चा चारों तरफ हो रही है। 71 साल के अशोक साहू ने 50 किलो सूखे बेर से गणपति बप्पा की 6 फीट की प्रतिमा तैयार कर मंदिर में विराजमान की है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग रहा है। अशोक साहू पिछले 36 सालों से इसी तरह की इको फ्रेंडली प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। अशोक साहू इसके पहले मूंगफली, नमकीन, बूंदी और दाल की भी प्रतिमाएं बना चुके हैं। अशोक के मुताबिक जब इस मूर्ति को नदी या तालाब में विसर्जन किया जाएगा तब वह पूरी तरह से प्रकृति में मिल जाएगी। वहीं जलीय जीव जंतु का आहार भी यह बन जाएगी। जो प्रकृति के लिए अच्छा है। इसे बनाने में 2 महीने का समय लगा है।
चॉक से बनाई भगवान गणेश की अनोखी प्रतिमा
छत्तीसगढ़ के एक मूर्तिकार ने इस बार पेंसिल-इरेजर-शार्पनर से निर्मित 8 फीट की गणेश भगवान की मूर्ति बनाई है। गणपति बप्पा की इस खास मूर्ति को बनाने में 400 पेंसिल, 1500 चॉक, 200 शार्पनर लगे हैं। यह मूर्ति अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बानी हुई है। इसे बनाने वाले मूर्तिकार सुजीत सूत्रधर ने बताया है कि वह 45 साल से गणेश की मूर्ति बना रहे हैं। वे अनोखी ईको फ्रेंडली मूर्ति बनाने के लिए जाने जाते हैं। इस खास तरह की गणेश की मूर्ति बनाने की तैयारी 6 माह पहले से शुरू की जाती है। इस तरह की खास मूर्तियों को बनाने के लिए कलकत्ता से कारीगर बुलाए जाते हैं।
गाय के गोबर और गोमूत्र से बनीं प्रतिमा
मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में इस बार सिर्फ गाय के गोबर और गौमूत्र से बनी प्रतिमा की खूब चर्चा हो रही है, क्योंकि लोगों का कहना है कि शायद ही ऐसी प्रतिमा कहीं और विराजमान हुई होगीं। धार्मिक दृष्टिकोण से गोबर में मां लक्ष्मी का प्रतिरूप माना जाता है। इस गोबर की मूर्ति स्थापना से एक साथ 'धन, विद्या और शक्ति' की भी पूजा यहां हो रही है। यह प्रतिमा खरगोन शहर के गांधीनगर स्थित गौशाला में स्थापित की गई है। आयोजन समिति द्वारा मूर्ति को गोबर गणेश नाम दिया गया है। बिना किसी खर्च के लगभग 5 फ़ीट ऊंची और 51 किलो से ज्यादा वजनी यह मूर्ति मात्र 7 दिन में बनकर तैयार हुई है। अनोखे, अद्भुत और ईको फ्रेंडली भगवान गणेश के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त गौशाला पहुंच रहे हैं।
नारियल से बनाई गई भगवान गणेश की प्रतिमा
नागपुर में एक मूर्तिकार ने नारियल से भगवान गणेश की मूर्ति बना दी है। इसके लिए मूर्तिकार को 3000 नारियल का इस्तेमाल करना पड़ा है। यह मूर्ति परली वैजनाथ के मंदिर ट्रस्ट द्वारा बनवाया गया है। इस मूर्ति को बनाने में कम से कम 20 दिनों तक मूर्तिकारों को 24 घंटे काम करना पड़ा है। इस मूर्ति की लंबाई 12 फीट और चौड़ाई 10 फीट है। यह मूर्ति अपने आप में बेहद खास है। मूर्तिकार के मुताबिक इस मूर्ति को बनाने में अलग-अलग तरह के नारियल का इस्तेमाल किया गया है। कहीं पर छोटे नारियल तो कहीं पर बड़े नारियल लगाने पड़े हैं। साथ ही कुछ स्थानों पर नारियल के छिलकों का भी इस्तेमाल किया गया है। नारियल से ही भगवान गणेश की आंख बनाई गई है। मूर्तिकारों का कहना है कि पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए यह इको फ्रेंडली गणेश मूर्ति बनाई गई है।
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