ब्रेड बेचने से लेकर राष्ट्रपति बनने का सफर, तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगान की जिंदगी से जुड़ी पांच बातें
तुर्किये गणराज्य के राष्ट्रपति चुनाव में दो दशकों से सत्ता पर काबिज रजब तैयब एर्दोगान को जनता ने फिर एक बार चुन लिया है।

20 सालों से तुर्किये की सत्ता पर काबिज रजब तैयब एर्दोगान एकबार फिर राष्ट्रपति का चुनाव जीत गये है। इस चुनाव में जीत के बाद वह अगले 5 सालों के लिए फिर से तुर्किये का नेतृत्व करेंगे। एर्दोगान ने 28 मई 2023 को रन-ऑफ राउंड में बाजी मारी थी। उन्हें कुल 52.16 प्रतिशत मत मिले और उनके विपक्षी कमाल कलचदारलू को 47.84 प्रतिशत मत प्राप्त हुए।
इस चुनाव को जीतने के बाद एर्दोगान साल 2028 तक राष्ट्रपति बने रहेंगे। इस जीत के बाद राजधानी अंकारा में अपने भव्य महल के बाहर जश्न मना रहे समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ये साढ़े आठ करोड़ की आबादी वाले पूरे मुल्क की जीत है। जबकि उनके विपक्षी कलचदारलू ने एर्दोगन पर चुनावों में धांधली करने का आरोप लगाया है। हम आपको तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन के बारे में पांच ऐसे रोचक तथ्य बताने जा रहे हैं, जिन्हें जानकर आप भी दंग रह जाएंगे।
ब्रेड बेचते थे एर्दोगान
रजब तैयब एर्दोगान का जन्म 1954 में हुआ। उनके पिता तुर्किये के तटरक्षक बल में थे। जब एर्दोगान 13 साल के थे, तब उनके पिता ने अपने पांचों बच्चों की बेहतर परवरिश के लिए इस्तांबुल में बसने का फैसला किया। परिवार की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं थी। इसलिए युवा एर्दोगान नींबू का शरबत और एक तरह की डबलरोटी (सीमीट) बेचने लगे, ताकि थोड़े पैसे कमाकर परिवार की सहायता कर सकें।
जेल जाने के बाद चमकी सियासत
एर्दोगान के राजनैतिक करियर का आगाज 1970 के आसपास इस्तांबुल के बेयोग्लू जिले से शुरू हुआ था। साल 1976 में वे नेशनल साल्वेशन पार्टी की बेयोग्लू युवा शाखा के प्रमुख बने। इसके बाद साल 1994 में एर्दोगान इंस्ताबुल के मेयर चुने गये।
फिर साल 1998 में उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से एक धार्मिक लेकिन विवादित कविता पढ़ी, जो देश में सेक्युलर कानूनों का उल्लंघन मानी गयी। इसके चलते वह चार महीनों तक जेल में रहे। लेकिन इससे उन्हें राजनीति में अपना दायरा बढ़ाने में सहायता मिल गयी। इसके बाद एर्दोगान कट्टरपंथी धार्मिक राजनीति में लोगों के बीच लोकप्रियता हासिल करने लगे।
जुलाई 1999 में जेल से बाहर आने के बाद एर्दोगान ने दो सालों के बाद अपनी खुद की पार्टी गठित की और नाम रखा 'जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी। देखते-ही-देखते यह देश की मुख्य पार्टी बन गयी। पार्टी की स्थापना के सिर्फ 15 महीनों बाद ही उन्होंने 2002 का चुनाव जीता और देश के प्रधानमंत्री बन गये।
यहूदियों से है चिढ़ते हैं एर्दोगान
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक तुर्किये के राष्ट्रपति मुस्लिम खलीफा बनने के चक्कर में कई बार राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों में खुलेआम यहूदियों की बुराई करते दिख जाते हैं। बीते साल ही गाजा पर इजराइल ने हवाई हमला किया तो एर्दोगान ने इजराइल और यहूदियों को आतंकवादी कहकर संबोधित किया था। यहूदियों पर की गई इस टिप्पणी को लेकर अमेरिका ने भी राष्ट्रपति एर्दोगान की कड़ी आलोचना की थी।
तुर्किये के फिलहाल सबसे लोकप्रिय नेता
प्रथम विश्वयुद्ध में ऑटोमन साम्राज्य हार गया था। फिर साल 1923 में साम्राज्य की आर्मी में कमांडर रहे मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने तुर्किये का पुनः गठन किया। वह 1938 में अपनी मृत्यु तक राष्ट्रपति रहे। उस समय वहां का समाज बेहद कट्टरपंथी विचारों वाला था। इसके बावजूद कमाल ने तुर्किये को एक धर्मनिरपेक्ष देश बनाया। सालों तक तुर्किये में इस्लामिक ताकतों को इससे परेशानी रही और वे लगातार इसका विरोध करते रहे लेकिन अतातुर्क नहीं झुके। वह एक लंबें समय तक तुर्किये के सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय नेता रहे।
इसके तकरीबन 8 दशकों बाद रजब तैयब एर्दोगान साल 1999 में तुर्किये के सेक्युलर कानूनों का विरोध करने पर जेल गये। इसके ठीक 4 साल बाद 2003 वह देश के प्रधानमंत्री बने। उसके बाद से एर्दोगान को सत्ता से कोई नहीं हटा पाया। तीन बार प्रधानमंत्री बनने के बाद साल 2014 में एर्दोगान ने तुर्किये में राष्ट्रपति शासन प्रणाली स्थापित की और खुद राष्ट्रपति बन गये। नतीजा यह रहा कि लगातार चुनावों में जीत मिलने से अब वह तुर्किये को बनाने वाले नेता कमाल अतातुर्क की तरह एक बड़े नेता बन गये हैं।












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