‘अ-चार’ पर मोदी सरकार के विचार से मचा हाहाकार!

सबसे पहले ‘अ-चार' का मतलब बता दूं। पहला ‘अ-असहिष्णुता', दूसरा ‘अ-अतुल्य भारत', तीसरा ‘अ-आमिर खान' और चौथा ‘अ-अमिताभ बच्चन'। अब तो समझ में आ ही गया होगा कि केन्द्र की मोदी सरकार की ‘अ-चार' पर विचार से क्यों हाहाकार मचा है। यदि निष्पक्ष व सहिष्णु भाव से कहें तो पता चलेगा कि केन्द्र सरकार का कामकाज कथित रूप से दुर्भावनापूर्ण है।

#incredible india: वाकई भारत 'अतुल्य' हैं, देखें तस्वीरें

Amitabh Bachchan

सरकार को खासकर आंतरिक मसलों पर तो प्रतिक्रियावादी नहीं ही होना चाहिए, लेकिन असहिष्णुता पर आमिर खान के दिए गए बयान के कारण उन्हें अतुल्य भारत अभियान से हटाना अथवा उनकी जगह अमिताभ बच्चन को ब्रांड एम्बेस्डर बनाना कुछ अच्छा नहीं लग रहा है। वो भी जल्दबाजी में। यह अलग बात है कि आमिर ख़ान ने 'अतुल्य भारत' अभियान के ब्रांड एंबेसडर के रूप में उनकी सेवाएं समाप्त करने के भारत सरकार के फ़ैसले से सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि ब्रांड एंबेसडर के रूप में मेरी सेवाएं ख़त्म करने के भारत सरकार के फ़ैसले का मैं सम्मान करता हूँ।

आमिर खान की खुशी

आमिर ख़ान कहते हैं कि यह मेरे लिए गर्व और खुशी की बात है कि मैं 10 साल तक 'अतुल्य भारत' अभियान का ब्रांड एंबेसडर रहा। अपने देश की सेवा करते हुए मैं खुश था और आगे भी देश सेवा करता रहूँगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे साफ़ करना चाहते हैं कि उन्होंने आज तक जनसेवा से जुड़ी जितनी भी फ़िल्में की हैं, उनके लिए कोई पैसा नहीं लिया। भारत की सेवा मेरे लिए हमेशा गौरव का विषय रहा है और आगे भी रहेगा। उनका कहना था कि सरकार किसी अभियान के लिए किसे ब्रांड एंबेसडर चुनती है और किसे नहीं, ये उसका विशेषाधिकार है। मुझे पूरा भरोसा है कि मैं ब्रांड एंबेसडर रहूँ या न रहूँ, लेकिन भारत मेरे लिए हमेशा अतुल्य रहेगा।

अतुल्य भारत और आमिर खान

आमिर ख़ान ने पिछले दिनों एक मीडिया इवेंट में कहा था कि उनकी पत्नी किरण राव देश में असहिष्णुता के बढ़ते माहौल के कारण भारत छोड़ने का विचार करने लगी थीं। हालांकि बाद में आमिर ने स्पष्ट किया था कि न तो उनका और न उनके परिवार का देश छोड़ने का कोई इरादा था और न आगे है। आमिर के इस बयान पर काफ़ी प्रतिक्रिया हुई थी और उन्हें 'अतुल्य भारत' के ब्रांड एंबेसडर से हटा देने की आशंका जताई जा रही थी। कहा जा रहा है कि आमिर की जगह अमिताभ बच्चन अब अतुल्य भारत अभियान का नया चेहरा होंगे।

अमिताभ बच्चन हैं पहली पसंद

पर्यटन मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार अमिताभ इस काम के लिए पहली पसंद हैं। हालांकि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का कहना है कि अब तक उन्हें इसके लिए एप्रोच नहीं किया गया है। उनको अगर ब्रैंड एंबेसडर बनने का मौका मिलता है तो वो इसे स्वीकार करेंगे और इसके लिए एक भी पैसा नहीं लेंगे। वहीं आमिर खान को हटाए जाने के मामले में बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा कि आमिर इक्रेडिबल इंडिया के लिए भरोसेमंद नहीं थे। अतुल्य भारत से आमिर को हटाने पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा है ये अतुल्य भारत का असहनीय और इंटोलरेंट एक्ट है जिसकी वो निंदा करते हैं।

खफा हैं लोग इसलिये भुगतो

एनसीपी का कहना है कि ऐसा लगता है कि आमिर के असहिष्णुता पर बयान देने से सरकार खफा है और इसी का खामियाजा आमिर को भुगतना पड़ा। भारत सरकार के लिए ‘अतिथि देवो भव:' अभियान का विज्ञापन बनाने वाली कंपनी मैक्केन वर्ल्डवाइड का करार खत्म हो गया है। कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद अब मैक्केन वर्ल्डवाइड पर्यटन मंत्रायल के लिए विज्ञापन नहीं बनाएगी। लेकिन इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने तो यहां तक कह दिया है कि कंपनी तो सिर्फ बहाना है ये आमिर खान पर मोदी सरकार का निशाना है।

मोदी सरकार ने बनाया निशाना

आमिर खान ने इसमें अपना सहयोग दिया था। कांग्रेस जिस आधार पर ये दावा कर रही है कि मोदी सरकार ने आमिर खान को निशाना बनाया है, उसके पीछे वजह है 23 नवंबर को आमिर खान का वह इंटरव्यू जिसे लेकर बवाल मचा था। आमिर ने कहा था कि उनकी पत्नी ने देश में बढ़ रही असहनशीलता को देखते हुए देश छोड़ने की बात कही थी।

आरटीआई से बाहर आयी खबर

दरअसल, पिछले दिनों यह खबर उड़ी कि आमिर खान को टूरिज्म इंडस्ट्री के कैम्पेन इनक्रेडेबिल इंडिया के ब्रांड एम्बेसडर पद से मोदी सरकार ने हटा दिया है। बताया गया कि सरकार ने आमिर के पूर्व में दिए एक बयान से नाराज होकर ये फैसला लिया है। बाद में पता चला कि खबर एक आरटीआई की वजह से बाहर आई है।

इस आरटीआई में आमिर खान को टूरिज्म मिनिस्ट्री का ब्रांड एम्बेसडर बनाने को लेकर जानकारी मांगी गई थी। मिनिस्ट्री ने जो जवाब दिया उसका साफ मतलब था कि मिनिस्ट्री सोशल अवेयरनेस कैम्पेन के तहत टीवी कॉमर्शियल्स तैयार करती है, जिसके लिए एजेंसीज को कॉन्ट्रेक्ट दिया जाता है। ऐसे ही एक एड में आमिर खान को लिया गया है।

कुल मिलाकर जिस तरह की चर्चाएं हैं, उसे देख तो यही लगता है कि देर-सबेर अतुल्य भारत अभियान से आमिर खान की छुट्टी होनी है। लेकिन इस तरह के क्रिया कलाप सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि सरकार बाहरी मुद्दों पर प्रतिक्रियावादी होती है तो उसे अच्छा माना जा सकता है लेकिन आंतरिक मसलों पर सरकार का स्वभाव कोमल हृदय वाला होना चाहिए, जो नहीं दिख रहा है।

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