..तो चाणक्य के साथ यह है पाकिस्तान का रिश्ता
नई दिल्ली। 14 अगस्त को पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस और 15 अगस्त को भारत का स्वतंत्रता दिवस है। दोनों देशों बीच रिश्ते ऐसे हैं हमेशा उतार-चढ़ाव लगा ही रहता है। दोनों देशों के बीच सिर्फ बंटवारा ही नहीं हुआ बल्कि सांस्कृतिक विरासत और सभ्यता का भी बंटवारा हो गया।

आज हम आपको एक ऐसे राज से रूबरू कराते हैं जो आपको बताएगा कि आखिर क्यों पाकिस्तान, भारत के साथ कभी-कभी ऐसी राजनीतिक चाल चल देता है जिसके जवाब में भारत को कोई जवाब ही नहीं सूझ पाता है।
- चाणक्य जिन्हें राजनीति और अर्थशास्त्र का पंडित माना जाता है, तक्षशिला विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और राजनीति शास्त्र की शिक्षा पाई थी। बंटवारे के बाद तक्षशिला पाक में चली गई।
- दरअसल तक्षशिला पाक के रावलपिंडी में स्थित है। एक नजर तक्षशिला से जुड़े उसके इतिहास पर क्योंकि अब यह जगह सिर्फ रावलपिंडी के बच्चों के लिए क्रिकेट के मैदान में तब्दील हो चुकी है।
- बताया जाता है कि इस तक्षशिला का नाम भगवान राम के बेटे तक्ष के नाम पर रखा गया था।
- ऐसी कहानियां भी हैं कि अर्जुन के पोते परिक्षित को तक्षशिला में ही राजगद्दी सौंपी गई थी।
- जिसे आप आज जीटी रोड यानी ग्रांट ट्रंक रोड के नाम से जानते हैं उसे किसी जमाने में नॉर्दर्न रोड कहा जाता था। यह रोड गंधार को पश्चिम में स्थित मगध और इसकी राजधानी पाटिलीपुत्र से इसको जोड़ता था। इस रास्ते का जिक्र ग्रीक लेखक मैग्स्थनीज ने 'रॉयल हाइवे' के तौर पर किया है।
- 321-317 बीसी के दौरान चंद्रगुप्त मौर्य जिन्हें मौर्य साम्राज्य का संस्थापक माना जाता है, उनके गुरु चाणक्य ने पहले तक्षशिला में शिक्षा हासिल की और फिर वह यहां पर अध्यापक बने। चंद्रगुप्त मौर्य के शासन काल के दौरान तक्षशिला उनकी राजधानी भी बनी।
- चाणक्य ने चंद्रगुप्त को राजनीति का बादशाह बना दिया। उन्होंने घनानंद को सबक सिखाने के लिए और उसका घमंड तोड़ने के लिए चंद्रगुप्त मौर्य को वह दांवपेंच सिखाए थे जिनके बारे में कभी कोई भी सोच भी नहीं सकता था।
- चंद्रगुप्त मौर्य के पोते सम्राट अशोक के शासनकाल के दौरान तक्षशिला बौद्ध शिक्षा का एक अहम स्थान बनकर उभरा।
- सम्राट अशोक ने यहां पर कई तरह के व्यवसाय को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने ने यहां पर करीब 1,600 किमी लंबा हाइवे तैयार कराया जो उनकी राजधानी पाटिलीपुत्र और तक्षशिला को आपस में जोड़ता था।
- वर्ष 1980 में तक्षशिला को यूनेस्को की ओर से वर्ल्ड हैरीटेज साइट घोषित किया गया था।
- आज तक्षशिला दुनिया की 12 उन जगहों में शुमार है जिन्हें अगर संरक्षित नहीं किया गया तो वे जगह खत्म हो जाएंगी।












Click it and Unblock the Notifications