EWS Reservation: आर्थिक आधार पर आरक्षण कितना सही, विपक्ष क्यों कर रहा राजनीति?

आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को आरक्षण देने के केंद्र सरकार के खिलाफ डीएमके (द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम अर्थात द्रमुक) ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। मालूम हो कि 7 नंवबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र

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भारत में आरक्षण की व्यवस्था संविधान लागू होने के समय से चल रही है। आरक्षण के द्वारा वंचित और मुख्यधारा से अलग हुए लोगों को सहायता प्रदान की जाती है। सरकारी नौकरियों तथा सरकारी योजनाओं के माध्यम से उन्हें अनेक लाभ दिए जाते हैं। 10 जनवरी 2019 से पहले तक इस आरक्षण का लाभ सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को नहीं मिलता था। जिस कारण आर्थिक रूप से कमज़ोर सामान्य वर्ग के लोग बहुत निराश होते थे। क्योंकि आरक्षण का लाभ सिर्फ अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) व पिछड़ा (ओबीसी) वर्ग को ही मिलता था। परन्तु अब भारत में आर्थिक रूप से पिछडे सामान्य वर्ग के लोगों को भी आरक्षण मिलने लगा है।

EWS आरक्षण बना कानून
सामान्य वर्ग के गरीबों की मांग के अनुसार मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों के लिए आरक्षण व्यवस्था आरंभ की। जिसे भारतीय सविधान में 103वां संशोधन कर 10 जनवरी 2019 को ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण कानून बना दिया। इस प्रावधान को अनुच्छेद 15 के खंड 6 तथा अनुच्छेद 16 में जोड़ा गया है। जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई।

EWS आरक्षण पर राजनीति
आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को आरक्षण देने के केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ डीएमके (द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम अर्थात द्रमुक) ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। मालूम हो कि 7 नंवबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के इस फैसले को सही ठहराया था।

द्रमुक ने अपनी याचिका में कहा है कि यह संविधान की परिकल्पना ''समानता की अवधारणा'' को प्रभावित करेगा। याचिका में आगे कहा गया है, "यह एक तथ्य है कि उन्हें (सामान्य वर्ग को) सामाजिक कलंक का सामना नहीं करना पड़ा है और न ही समाज से भेदभाव किया गया है अथवा नौकरियों या मुख्यधारा से दूर रखा गया है।"

आगे कहा गया है, "माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कभी भी इस बात की जांच नहीं की कि कैसे "अगड़ी जातियों" को विवादित संवैधानिक संशोधन के तहत "कमजोर वर्गों" के रूप में बुलाया जा सकता है, जबकि वे पहले से ही सरकारी नौकरियों का आनंद ले चुके हैं और पर्याप्त योग्यता हासिल कर चुके हैं।''

द्रमुक की इस याचिका में कांग्रेस, वाम दल, एमडीएमके, व वीसीके आदि दल सहभागी रहे।

कांग्रेस भी चाहती है EWS आरक्षण पर चर्चा
6 दिसंबर 2022 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन हुआ। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी ईडब्ल्यूएस पर चर्चा की मांग की है। 7 नवंबर 2022 को जब ईडब्ल्यूएस आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दी थी, तब कांग्रेस ने इसका स्वागत किया था।

EWS आरक्षण की पात्रता
ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनाने हेतु निम्न पात्रता जरूरी है - आवेदक सामान्य वर्ग से होना चाहिए, उसके परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रूपए से ज्यादा न हो। आवेदक परिवार के पास 2 हेक्टयर (अर्थात 5 एकड़) कृषि भूमि से ज्यादा न हो। उसका मकान 1000 वर्ग फ़ीट या 200 वर्ग गज (ग्रामीण क्षेत्र) से कम का हो। शहरी क्षेत्र में 100 वर्ग गज से ज्यादा न हो, आदि।

ESW आरक्षण कहां है लागू?
आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को यह आरक्षण सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में एडमिशन (प्रवेश) के लिए आवेदन करने में छूट प्रदान करता है। इसके तहत 10 फीसदी सीटें आरक्षित होगी।

EWS आरक्षण से लाभ
●इससे आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के आवेदक को उच्च शिक्षा एवं नौकरियों में 10 प्रतिशत का आरक्षण प्राप्त होता है।
●आर्थिक कमी के कारण जो विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा हेतु कोचिंग आदि नहीं कर पाते उनके लिए ये आरक्षण बड़ा सहारा है।
●ईडब्ल्यूएस से अब सामान्य वर्ग में होने तथा आर्थिक रूप से कमजोर होने की स्थिति में किसी भी सुविधा तथा अवसरों से वंचित नहीं होना पड़ेगा।
●सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों का जीवन स्तर सुधरेगा।

कैसे बनवाएं ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र
ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवदेक को ऑफलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा। इसके लिए अपने दस्तावेजों (पहचान पत्र-आधार कार्ड, वोटर कार्ड, जाति व आय प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, बीपीएल राशन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट, स्व घोषित शपथ पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र, जमीन तथा संपत्ति के दस्तावेज, एम्प्लॉयमेंट सर्टिफिकेट) के साथ अपनी तहसील से फार्म प्राप्त कर व उसको भरकर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय (अथवा अपर जिला मजिस्ट्रेट, कलेक्टर, तहसीलदार, उप-विभागीय अधिकारी के कार्यालय) में जमा करना होगा।

उसके लगभग 21 दिनों बाद (फार्म की जांच-पड़ताल के उपरांत) आपको ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी कर दिया जायेगा, जिसको संबंधित कार्यालय से प्राप्त कर सकते है।

कौन जारी करता है ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र
ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाता है।

वैधता का समय
ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की वैधता एक वर्ष की होती है। एक वर्ष उपरांत प्रमाण पत्र को रिन्यू (नवीकरण) करना होता है।

ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र का उद्देश्य
ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गयी एक आरक्षण योजना है। जिसमें सरकार का मुख्य उद्देश्य सामान्य वर्ग के आर्थिक कमजोर व्यक्तियों को शिक्षा, सरकारी नौकरियों, कल्याणकारी योजनाओं और सीधी भर्ती इत्यादि में 10 प्रतिशत आरक्षण (रिजर्वेशन) प्रदान करना है।

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