Snake Venom: सांपों के जहर का कहां होता है प्रयोग, कितना बड़ा है इसका व्यापार?
Snake Venom: हाल ही में यूटयूबर व बिग बॉस ओटीटी-2 के विजेता सिद्धार्थ यादव यानी एल्विश यादव को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। एल्विश पर दुर्लभ सांपों व उनके जहर को रेव पार्टी में सप्लाई करने के आरोप हैं।
एल्विस का एक वीडियो भी काफी वायरल हुआ है, जिसमें वह गले में सांप डालकर एक डांस-पार्टी में डांस करते नजर आ रहा है। पूछताछ में एल्विश ने इन आरोप को स्वीकार भी किया है। आखिर सांपों का जहर कहां कहां प्रयोग किया जाता है और इसका कितना बड़ा व्यापार है, यह जानते हैं।

सांपों के जहर का उपयोग
भारत में विश्व स्तर पर सांपों की सबसे ज्यादा प्रजातियां (लगभग 300 प्रजातियां) पायी जाती हैं। जिनमें से करीब 60 प्रजातियां अधिक जहरीली व लगभग 40 कम जहरीली तथा अन्य गैर-जहरीली प्रजातियां है। एक अनुमान के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार लोग सांप के काटने से मर जाते हैं। जहां सांप के जहर से व्यक्ति की मौत तक हो जाती है, वहीं उसका जहर व्यक्ति की जान बचाने में भी काम आता है।
सांप के जहर में प्रोटीन की मात्रा सबसे ज्यादा होती है, इसके अलावा अमीनो एसिड, लिपिड, कार्बोहाइड्रेट, आयरन व अन्य यौगिक भी होते हैं। सांप के जहर से अनेक दवाईयां बनायी जाती है, यहां तक कि अधिकतर विषरोधक दवा सांप के जहर से ही बनती है। इसके अलावा सांप के जहर का प्रयोग नशे के रूप में भी किया जाता है।
दिल की बीमारी में बेहद असरदार है 'सांप का जहर'
डाक्टरों का मानना है कि हाई ब्लड प्रेशर, दिल के दौरे, हार्ट फेल आदि दिल संबंधी बीमारियों के लिए सांपों के जहर से बनी दवाईयां बहुत कारगर होती है। इसका सबसे बड़ा कारण सांप के जहर में प्रोटीन की मात्रा अधिक होना है। सांप के जहर से बनी दवा दिल की बीमारियों से लड़ने में काम आती है। खासकर हाई ब्लड प्रेशर के लिए सांप के जहर से बनी दवाएं काफी इस्तेमाल हो रही हैं। कैप्टोप्रिल, उच्च ब्लड प्रेशर के लिए सांप के जहर से बनी पहली दवा है, जो अमरीका में 1981 में बनी थी।
कैंसर के इलाज में भी उपयोग
सांपों का जहर टयूमर/कैंसर कोशिकाओं के लिए साइटोटॉक्सिक होता है यानी यह टयूमर अथवा कैंसर की कोशिकाओं के लिए जहर होता है तथा इनको खत्म करने में सक्षम होता है। इस प्रक्रिया को कीमोथरेपी भी कहा जाता है। इससे कैंसर के नियंत्रण में काफी हद तक सफलता भी मिलती है। रैटल प्रजाति के सांप का जहर, जिसमें क्रोटोक्सिन पाया जाता है, इससे कैंसर का पूर्णतया इलाज हो सकता है, इस पर रिसर्च भी चल रही है।
एंटी-वेनम अथवा एंटी-टॉक्सिन सीरम बनाने में
अगर सांप काट लें, तो उसके ईलाज के लिए जो एंटी-वेनम सीरम या एंटी-टॉक्सिन सीरम की आवश्यकता होता है, जो सांप के जहर से ही बनती हैं। यानी सांप के जहर को उतारने के लिए भी सांप का जहर ही काम आता है।
सांप के जहर का व्यापार व कीमत
विश्व भर में लगभग सांपों की 3000 प्रजातियां पायी जाती है, जिनमें से लगभग 20 प्रतिशत प्रजातियां ही जहरीली व कम जहरीली होती है। अगर भारत में जहरीले सांपों की प्रजातियों की बात करें तो कॉमन करैत, रसल्स वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर और कोबरा सबसे जहरीले सांप हैं। वहीं इनके जहर की कीमत उनकी प्रजाति के आधार पर तथा भिन्न-भिन्न देशों में अलग-अलग होती है।क्या
आप अनुमान लगा सकता है कि सांप का जहर सोने से भी महंगा होता है, इसके 1 ग्राम की कीमत लाखों में होती है। विश्व स्तर पर सबसे महंगे सांप के जहर को देखें तो ब्राउन स्नैक सांप का जहर सबसे महंगा होता है। जिसके एक ग्राम जहर की कीमत 4,000 डॉलर यानी करीब 3,30,000 रू. है। वहीं भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल सहित एशिया के कई देशों में पाये जाने वाले कोबरा सांप के एक ग्राम जहर की कीमत विश्व स्तर पर लगभग 150 डालर (करीब 12000 रू.) हैं। वहीं कॉमन करैत सांप के जहर की कीमत 8 से 10 हजार रुपये प्रति ग्राम होती है। इसके अलावा आस्ट्रेलिया व अन्य देशों में पाये जाने वाले कोरल सांप के जहर की कीमत लगभग 640 डालर (करीब 53000 रू.) है।
सांप का जहर, क्यों है महंगा?
सांप के जहर का सबसे बड़ा कारण कम मात्रा में उपलब्ध होना तथा इसकी मांग ज्यादा होना है। क्योंकि सांपों को पालना व उनका जहर निकालना खतरे से खाली नहीं है। सांप के जहर में पाए जाने वाली प्रोटीन का उपयोग दिल की बीमारियों सहित अनके बीमारियों जैसे स्ट्रोक, अल्जाइमर और पार्किंसन रोग के इलाज के लिए किया गया है तथा इससे विषरोधक दवाईयां भी बनती है। जिसके चलते इसकी बाजार में खूब मांग है, जो इसे सोने से भी महंगा बनाती है। एक अनुमान के अनुसार लगभग 200 सांपों से 1 लीटर जहर ही प्राप्त होता है।












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