Debt Crisis: क्या ये देश हो जायेंगे कंगाल, चीन के चंगुल में फंसे हैं कई

चीन के कर्ज जाल में कई मुल्क फंस चुके हैं। दूसरी तरफ अपने खर्चों पर लगाम न लगा पाने की वजह से मालदीव सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था संकट में आ गई है।

china

मालदीव का आर्थिक संकट नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि वह नोटों (currency) की छपाई कर अपना खर्च न चलाए। आईएमएफ ने मालदीव सरकार से कहा है कि वह अपनी मौद्रिक नीति को सख्त बनाए, ताकि उसकी मुद्रा की कीमत में अंधाधुंध गिरावट को रोका जा सके।

दरअसल, दुनिया में कोरोना संकट के बाद अचानक से कई देशों में आर्थिक संकट की स्थिति बन गई है। कई ऐसे देश हैं जो आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं या उसके मुहाने पर खड़े हैं। वहीं आर्थिक संकट वाले देशों में चीन जैसे देशों की बड़ी भूमिका देखी जा रही है। चाहे आप श्रीलंका, मालदीव या पाकिस्तान की बात कर लें। वहीं ईरान, अर्जेटीना, घाना, यूक्रेन, नेपाल जैसे तमाम ऐसे देश हैं, जो इस समय आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे हैं।

कोरोना ने अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारा
आर्थिक मोर्चे पर आई सुस्ती के कई कारण हैं लेकिन एक खास कारण कोविड भी है। जिसे लेकर कई विशेषज्ञ पहले से इसकी चेतावनी दे रहे थे। कोविड ने विश्व अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार दिया है। इसका खामियाजा सभी देशों को भुगतना पड़ रहा है। अंतर सिर्फ इतना है कि कुछ देशों पर यह इतना भारी पड़ रहा है कि उनका अस्तित्व ही खतरे में दिखता है।

चीनी कर्ज में हैं 97 देश
फोर्ब्स ने साल 2020 तक वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के आधार पर बताया कि दुनिया भर के 97 देश ऐसे हैं, जिन्हें चीन ने कर्ज दिया है। इनमें ज्यादातर देशों में आर्थिक खतरे की घंटी बज रही है। चीन के भारी कर्ज में अधिकतर अफ्रीकन देश डूब चुके हैं। दरअसल, कर्ज के जाल में फंसाकर चीन कई देशों को तबाह करने में लगा हुआ है। मालदीव, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, ईरान, अर्जेटीना, घाना, यूक्रेन, सीरिया, यूक्रेन, ताजिकिस्तान, लाओस, मंगोलिया, किर्गिस्तान, मोन्टेनेग्रो जैसे देशों की अर्थव्यवस्था डगमगा रही हैं। सबसे खास बात यह है कि इन देशों में अधिकतर चीन के कर्ज तले दबे हुए हैं।

कई रिपोर्ट में ऐसा कहा गया है कि चीन उन छोटे देशों को चकाचौंध वाली परियोजनाओं का 'लॉलीपॉप' दिखाता है, जो आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं होतीं। इसी के साथ वह उन देशों को अपनी एकतरफा शर्तों पर कर्ज देता है। कर्ज लेने वाले देशों के पास उसे चुकाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते फिर चीन अपना रंग दिखाकर उनसे उनके संसाधन और संपत्तियां हड़पने लगता है।

विदेशी कर्ज के कारण बर्बाद श्रीलंका
श्रीलंका का विदेशी कर्ज 51 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है। इस साल उसे 7 अरब डॉलर और साल 2027 तक उसे 28 अरब डॉलर का भुगतान करना है। जबकि श्रीलंका के पास मात्र 24 करोड़ डॉलर ही विदेशी मुद्रा का भंडार है। डॉलर के मुकाबले लंका का रुपया 80 प्रतिशत नीचे जा चुका है। तकरीबन 1 डॉलर की कीमत अभी 365.45 श्रीलंकाई रुपया के बराबर हो गई है।

श्रीलंका को IMF के अलावा चीन ने सबसे ज्यादा कर्ज दिया हुआ है। श्रीलंका के कुल विदेशी कर्ज में चीन की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत है यानि करीब 5 अरब डॉलर से ज्यादा। चीन के बाद जापान और भारत का श्रीलंका पर कर्ज हैं। श्रीलंका की कमाई का सबसे बड़ा आधार पर्यटन था, जो कोविड महामारी के बाद लगभग समाप्त हो गया था। श्रीलंका में हालात इतने बदतर हो गए थे कि वहां कि जनता ने राष्ट्रपति के महल पर भी कब्जा कर लिया था।

पाकिस्तान पर भी कर्जा बढ़ रहा है
पाकिस्तान की हालत इतनी खराब है कि कभी भी इस देश में गृहयुद्ध की स्थिति बन सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक जून 2013 में पाकिस्तान पर 44.35 अरब डॉलर का कर्ज था। वहीं अप्रैल 2021 में कुल कर्ज 90.12 अरब डॉलर पर पहुंच गया। जबकि इस साल 2022 में पाकिस्‍तान के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार गिरावट आई है। फरवरी 2022 में पाकिस्‍तान विदेशी मुद्राभंडार 16 अरब डॉलर था। जोकि जून के पहले हफ्ते में यह 10 अरब डॉलर पहुंच गया और अगस्‍त में 7.83 अरब डॉलर पर आ गया।

फोर्ब्स (Forbes) के मुताबिक पाकिस्तान पर चीन का 77.3 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है। वैसे फिलहाल पाकिस्तानी रुपये की कीमत 1 डॉलर के मुकाबले 225.60 रुपये पर है। एक आंकड़े के मुताबिक अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के लिए पाकिस्तान को कम-से-कम 36 अरब डॉलर की जरुरत है। हालांकि, पाकिस्तान कई बार आईएमएफ और अंतरराष्ट्रीय पटल पर कई देशों से हाथ फैलाकर कर्ज भी मांग चुका है।

ईरान भी भारी आर्थिक संकट में
ईरान की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर हो चुकी है। जहां एक डॉलर की कीमत 41,750 ईरानी रियाल तक पहुंच गई है। हालात इतने बिगड़ गए हैं, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि राजधानी तेहरान के व्यापारी बीते दिनों रियाल को डॉलर के मुकाबले 3.86 लाख रियाल तक में एक्सचेंज कर रहे हैं। दरअसल, इंटरनेशनल एटामिक एनर्जी एजेंसी द्वारा लगाई गई शर्ते पूरी न करने के कारण जो प्रतिबंध लगे हैं उनसे ईरान के निर्यात में भारी कमी हुई है, जो उसकी अर्थव्यवस्था का आधार है। महंगाई दर 50 प्रतिशत के ऊपर जा चुकी है। ईरान विश्व का नेचुरल गैस का दूसरा सबसे बड़ा और क्रूड ऑयल का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है, लेकिन आर्थिक प्रतिबंधों के कारण वह ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम से अलग-थलग पड़ गया है।

चीन ने बिगाड़ दी नेपाल की अर्थव्यवस्था
तकरीबन 2.9 करोड़ की आबादी वाला भारत का पड़ोसी देश नेपाल भी संकट में है। साल 2022 के मार्च महीने में नेपाल का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ 975 करोड़ डॉलर रह गया। जबकि जुलाई 2021 में यह 1175 करोड़ डॉलर था। महज सात महीनों में नेपाल के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 200 करोड़ डॉलर यानी 24 हजार करोड़ नेपाली रुपये कम हो गए। जबकि चीन ने यहां भी कर्ज का मायाजाल बुना हुआ है। चीन ने इस साल नेपाल को 15 अरब रुपये की मदद देने का ऐलान किया था। इसे नेपाल में चल रही अलग-अलग परियोजनाओं में निवेश के लिए दिया जा रहा है। वहीं साल 2012 में भी चीन से नेपाल ने 6.67 अरब रुपये का कर्ज लिया था।

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