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1984 Riots: कभी चाय की दुकान चलाते थे कांग्रेस के सज्‍जन कुमार अब काटेंगे जेल में सजा

नई दिल्ली। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के साथ पूरी कांग्रेस पार्टी के लिए सोमवार का दिन काला साबित हुआ। दिल्ली में 1984 में हुए सिख दंगों के एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने आज सज्जन कुमार को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा सुजाए जाने के बाद दोषी सज्जन कुमार को 31 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा। सोमवार को जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल की बेंच ने यह फैसला सुनाया। सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा देने के साथ दोषी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

दिल्ली में चाय की दुकान थी सज्जन कुमार की

दिल्ली में चाय की दुकान थी सज्जन कुमार की

आपको बता दें कि कांग्रेस में पिछले तीन दशकों से ज्यादा सक्रिय सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 में हुआ था, कहा जाता है कि सत्तर के दशक में इनकी एक दिल्ली में चाय की दुकान हुआ करती थी, वहीं उनकी मुलाकात दिग्गज नेता संजय गांधी से हुई थी, जो धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गई थी, उसी दौरान इन्हें दिल्ली के मादीपुर इलाके से नगरनिगम का चुनाव लड़ने का मौका मिला था, ये पहली बार 1977 में पार्षद बने, जहां से इनकी सक्रिय राजनीति की शुरुआत हुई थी।

सज्जन कुमार को पार्षद से सीधे सांसद का टिकट मिला

सज्जन कुमार को पार्षद से सीधे सांसद का टिकट मिला

सज्जन कुमार को पार्षद से सीधे सांसद का टिकट मिला और ये दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्मप्रकाश को हराकर संसद पहुंचे थे , वर्ष 1980 में बाहरी दिल्ली से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर मात्र 35 वर्ष की आयु में उन्हें सांसद बनने का गौरव प्राप्त हुआ था।

राजनीतिक ग्राफ साल 1977 से 1980 तक तेजी से बढ़ा

राजनीतिक ग्राफ साल 1977 से 1980 तक तेजी से बढ़ा

सज्जन कुमार का राजनीतिक ग्राफ साल 1977 से 1980 तक तेजी से बढ़ा था, लोकसभा चुनावों में सबसे अधिक मत पाने का और दिल्ली से सबसे अधिक मतों से चुनाव जीतने का रिकार्ड सज्जन कुमार के नाम पर है लेकिन साल 1984 में देश में पहने दंगों के बाद इनका करियर प्रभावित हुआ, इन पर दंगे भड़काने का आरोप लगा, 1989 में कांग्रेस ने इनका टिकट काट दिया।

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने सज्जन कुमार को बरी किया था

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने सज्जन कुमार को बरी किया था

लेकिन साल 1991 में इन्हें वापस टिकट मिला,जहां से इन्होंने एक बार फिर से जीत दर्ज की लेकिन बाद में 1996 के चुनाव में बीजेपी के वरिष्ठ नेता कृष्णलाल शर्मा के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा।नानावटी कमीशन की सिफारिश के बाद 2005 में सज्जन के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। 30 अप्रैल 2013 को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट सज्जन कुमार को बरी कर दिया गया था।

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