Cafe Coffee Day: सॉलवेंसी प्रक्रिया से सीसीडी बचेगा या डूबेगा
Cafe Coffee Day: 'ए लॉट केन हैपन ओवर कॉफी 'के स्लोगन के साथ लोगों को कॉफी परोसने वाले कैफे कॉफी डे के साथ बहुत कुछ अप्रिय हो रहा है। अब ताजा खबर है कि 8 सितंबर को आईडीबीआई ने इसके खिलाफ सॉलवेंसी प्रक्रिया कर शुरू दी है। बैंक ने अपने 250 करोड़ रुपये की वसूली के लिए नेशनल कपंनी लॉ ट्रिब्यूनल बेंगलुरु इकाई में केस दायर कर दिया है। आईबीडीआई ट्रस्ट ने इनसॉलवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016 की धारा 7 के तहत यह मामला दर्ज किया है। इसके पहले इनडसइंड बैंक भी अपने 94 करोड़ रुपये की वसूली के लिए कॉफी डे ग्लोबल के खिलाफ एनसीएलटी में मामला दर्ज करा चुका है। एक सफल मुकाम पर पहुंच कर गिरने और निराश होकर आत्महत्या कर लेने वाले प्रमोटर सिद्धार्थ के कैफे कॉफी डे की कहानी बहुत दिलचस्प है।
कॉफी की चुस्कियों पर बात बढ़ाने के आकर्षक विज्ञापन के साथ कैफे कॉफी डे की शुरुआत 1996 में हुई। बेंगलुरु के एक व्यावसायी वी जी सिद्धार्थ ने इसकी कल्पना की और पहला कॉफी आउटलेट 11 जुलाई 1996 को ब्रिगेड रोड बेंगलुरु में खोला गया। जल्दी ही यह ब्रांड सीसीडी के नाम से लोगों की जुबान पर चढ़ गया। राजनीति से लेकर बिजनेस तक की डीलें भी सीसीडी में तय होेने लगी।

गप्प मारने और घंटों बैठकर चर्चा करने वालों के लिए तो सीसीटी फेवरिट डेस्टीनेशन बन गया। देखते देखते सीसीडी भारत के बाहर भी कई देशों में पहुंच गया। ऑस्ट्रिया, चेज रिपब्लिक, मलेशिया, नेपाल और इजिप्ट में भी इसके आउटलेट खुल गए। सीसीडी एक समय यह दावा करने लगा था कि वह सालाना डेढ़ अरब कप से भी ज्यादा कप कॉफी बेच रहा है। भारत में ही इसके 2000 से ज्यादा आउटलेट थे।
कैफे कॉफी डे इंटरनेशनल लिमिटेड के बैनर तले चल रहे इस कैफे कॉफी डे को बढ़ाने में भारतीय बैंकों ने खुलकर साथ दिया और सैकड़ों करोड़ के लोन दे डाले। उसके पहले कंपनी के प्रमोटर सिद्धार्थ ने 1993 में अमलगेमेड बीन कॉफ़ी ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड की स्थापना की और खुद कॉफी की खेती करने का फैसला किया। 20 हजार एकड़ में काफी बींस की उपज करने लगे। देखते ही देखते कॉफी बींस का धंधा चल निकला और सिद्धार्थ सालाना 3000 टन कॉफी की उपज करने लगे।
जापान, जर्मनी, यूरोप और अमेरिका में निर्यात के साथ ही दो साल में ही वह देश के दूसरे सबसे बड़े कॉफी निर्यातक बन गए। वहीं से सिद्धार्थ को तैयार कॉफी की श्रृंखला खोलने और देश - विदेश में चलाने का ख्याल आया और इस तरह से कैफे कॉफी डे का सफर शुरू हुआ। 20 साल तक कैफे कॉफी डे का व्यापार अपनी रफ्तार से चल रहा था। 2019 में इस कंपनी की कुल आय 4264 करोड़ रुपये थी। पर उसके बाद स्थिति फिर ऐसी बिगड़ी की संभल न सकी। इस बिजनेस स्टोरी का सबसे ज्यादा दुखद पहलु रहा - सिद्धार्थ का आत्महत्या कर लेना।
सिद्धार्थ कोई साधारण बिजनेसमैन नहीं थे। वह कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस एम कृष्णा के दामाद थे। वह एक मैनजमेंट ग्रेजुएट तो थे ही शेयर बाजार के बड़े कारोबारी भी थे। उन्होंने मिट्टी से सोना उगाने का कारनामा किया था। अचानक 29 जुलाई 2019 को यह खबर आई कि सिद्धार्थ गायब हो गए हैं। फिर खबर आई कि उनकी कार नेत्रवती नदी मंगलुरु के पास मिली है। फिर किसी ने यह भी कहा कि उसने सिद्धार्थ को नदी में छलांग लगाते हुए देखा। आखिकार 36 घंटे बाद सिद्धार्थ की लाश होइगे बाजार के पास नदी किनारे मिली। उन्होंने बिजनेस में लगातार घाटा और भारी कर्ज के दबाव में आकर अपनी जिंदगी समाप्त कर ली। बाद में उनका एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें लिखा था कि वित्तीय समस्याओं और आयकर अधिकारियों के परेशान करने के कारण अपनी जिंदगी समाप्त कर रहे हैं।
सिद्धार्थ की मृत्यु के बाद कैफे कॉफी डे को संभाल रही है उनकी पत्नी और एस एम कृष्णा की बेटी मालविका हेगड़े। मालविका इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है, लेकिन अचानक बदले हालातों ने उन्हें बिजनेस संभालने का मजबूर कर दिया। उन्होंने तब कैफे कॉफी डे का बिजनेस संभाला जब देश में कोविड के कारण लॉक डाउन लगा था। उन्होंने अपने 25 हजार कर्मचारियों को यह भरोसा दिलाया कि सीसीडी को वह बंद नहीं होने देंगी। कर्ज से पार पाकर फिर से उसे लाभ में ले आएंगी।
मालविका ने अपने तीन साल के कामकाज में कंपनी के कर्ज को काफी कम कर लिया है। सिद्धार्थ के रहते हुए कंपनी पर 7200 करोड़ का कर्ज था जो अब 3500 करोड़ के आस पास रह गया है। वह नॉनकोर बिजनेस की परिसंपतियों को बेचकर कर कर्ज चुका रही हैं। वह अपने पति सिद्धार्थ के बनाए इस ब्रांड को बंद करने या किसी और के हाथ में दिए जाने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। अभी भी देश में सीसीडी के लगभग 600 आउटलेट चल रहे हैं।
लेकिन बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा सीसीडी को सालवेंसी प्रकिया में ले जाने के बाद मालविका के प्रयासों को धक्का लगा है। हालांकि वह अभी भी आशावान हैं और प्रयास कर रही हैं कि किसी तरह से बैंकों से उनका सेटलमेंट हो जाए। कंपनी की ओर से यह बयान भी जारी किया गया है कि सालवेंसी की प्रक्रिया रुकवाने के लिए कानूनी विल्ल्पों को आजमाया जा रहा है। इसके पहले भी एक और बैंक ने एनसीएलटी में सीसीडी के खिलाफ मामला पहुंचाया था, पर सीसीडी ने कानूनी लड़ाई लड़ कर उस पर स्टे हासिल कर लिया है। उम्मीद कर सकते हैं कि सीसीडी अपनी ब्रांड इमेज को बरकरार रखने और लोगों को कॉफी परोसने के अपने जज्बात को बनाए रखेगा।
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