Somnath Chatterjee: वह लोकसभा स्पीकर जिसे उनकी पार्टी ने ही निष्कासित कर दिया था
Somnath Chatterjee: एक ऐसा नेता जिसे राजीव गांधी सुप्रीम कोर्ट का जज बनाना चाहते थे। एक नेता जिसने अपने पद की गरिमा बचाने के लिए अपनी पार्टी का आदेश मानने से इंकार कर दिया था। एक ऐसा नेता जो अपने नियम का पक्का था। उस नेता का नाम था सोमनाथ चटर्जी। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखर नेता के तौर पर पहचान बनाने वाले चटर्जी का आज जन्मदिन है। अपनी आत्मकथा 'कीपिंग द फेथ' में सोमनाथ ने लिखा था कि मुझे नहीं पता कि क्यों राजीव मुझे सुप्रीम कोर्ट का जज बनाना चाहते थे। शायद उनको मेरे कानून के ज्ञान पर बहुत भरोसा हो। या फिर शायद यह भी हो सकता है कि वह संसद में मुझसे पीछा छुड़ाना चाहते हों। आज उनके जन्मदिन पर उनसे जुड़ी कुछ बातों को हम आपसे साझा करेंगे।
शुरुआती जीवन और राजनीतिक सफर
सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई 1929 को तेजपुर, असम में हुआ था। उनकी शिक्षा-दीक्षा कलकत्ता और यूके में हुई थी। सोमनाथ चटर्जी ने एक अधिवक्ता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद 1968 में वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सदस्य बनने के बाद सक्रिय राजनीति में शामिल हुए। 1971 में वह पहली बार लोक सभा के लिए निर्वाचित हुए। वह लोक सभा में सीपीआई(एम) के नेता रहे।

भारत की संसदीय प्रणाली को सुदृढ़ बनाने में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 1996 में उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार प्रदान किया गया। 4 जून 2004 को 14वीं लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में सोमनाथ चटर्जी ने सर्वसम्मति से निर्वाचित होकर एक इतिहास रचा था। लोकसभा में 17 अन्य दलों के नेताओं ने भी इनके नाम का प्रस्ताव किया। वहीं अन्य दलों ने भी इनके नाम पर ही समर्थन किया। 22 जुलाई 2008 को विश्वास मत के दौरान लोकसभा के संचालन के लिए उनको देश के विभिन्न वर्गों से काफी सराहना मिली। यह भी महत्वपूर्ण है कि चटर्जी की पहल पर ही शून्यकाल की कार्रवाई का पहली बार 5 जुलाई 2004 को सीधा प्रसारण किया गया था।
पार्टी से निष्कासित
एक ईमानदार नेता को उसकी कीमत पार्टी से निष्कासन के साथ चुकानी पड़ी थी। सोमनाथ चटर्जी ने विश्वास मत के मामले पर पार्टी का निर्देश मानने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि लोकसभा का स्पीकर किसी पार्टी का व्यक्ति नहीं होता इसलिए उन पर यह निर्देश लागू नहीं होते। इसके बाद दस बार सांसद रह चुके 79 वर्षीय सोमनाथ चटर्जी को पार्टी ने हटाने का फैसला सीपीएम पोलित ब्यूरो की बैठक में किया। आपको बता दें कि वह 1968 से पार्टी के सदस्य थे। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पार्टी के संविधान के तहत पार्टी हितों को नुकसान पहुंचाने के कारण सोमनाथ को निकाला गया है।
सोमनाथ चटर्जी के निष्कासन के बाद पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य बिमान बोस ने कहा था कि सोमनाथ चटर्जी ने पार्टी का अनुशासन तोड़ा था। कोई भी पार्टी से ऊपर नहीं है। हम सभी पार्टी के नियमों का पालन करते है। जो पार्टी के नियम नहीं मानते उनसे हम सारे संबंध तोड़ लेते है। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता जयंती नटराजन ने कहा था कि स्पीकर के पद पर सोमनाथ चटर्जी को बने रहना चाहिए क्योंकि वे सिर्फ़ सीपीएम के स्पीकर नहीं थे बल्कि पूरे देश की लोकसभा के स्पीकर है। उन्हें सीपीएम ने नहीं हम सबने चुना है।
जब राजीव बनाना चाहते थे जज
इस बात का जिक्र खुद सोमनाथ चटर्जी ने किया था। 'कीपिंग द फेथ' में उन्होंने बताया था कि उस समय के कानून मंत्री शिव शंकर ने मुझसे कहा था कि सरकार उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाना चाहती है। सोमनाथ ने लिखा कि उन्होंने उस प्रस्ताव को हंसी में उड़ा दिया था। क्योंकि वह समझे कि शायद शिवशंकर उनसे मजाक कर रहे हैं। लेकिन जब शिव शंकर ने वह पेशकश दोहराई तो उनको कहना पड़ा कि जज बनने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है।
इसके बाद वर्ष 2004 में उनके पास पार्टी के बड़े नेता हरिकिशन सिंह सुरजीत का फोन आया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष के रूप में उनकी सेवाएं मांगी हैं तो वो मना नहीं कर सके थे। इन सब बातों का जिक्र खुद सोमनाथ ने अपनी किताब में किया था। वो ऐसे समय में लोकसभा के अध्यक्ष बने जब भारत की राजनीति में गठबंधन सरकार का जमाना आ गया था और लोकसभा की कार्यवाही चलाना बड़ा मुश्किल होता था।












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