'बाजरा' केवल अनाज नहीं बल्कि शरीर के लिए अमृत है
बैंगलुरू। भागती-दौड़ती जिंदगी में इंसान अपने सेहत के प्रति लापरवाह होता जा रहा है और वो उन चीजों को भूल गया है जिसे खाने के बाद शायद इंसानों को दवाईयों की जरूरत ना पड़े। आज लोग बाजरा जैसे सेहत के बेहद उपयोगी अनाज को भूल चुके हैं। जंक फूड वाले इस जमाने का आलम तो यह है कि आने वाले सालों में हम शायद अपने बच्चों को परिभाषित ना कर पाये कि बाजरा आखिर होता क्या है?
मां के बाद गाय का दूध ही अमृत है क्यों?
होम इकनोमिक्स इंस्टीट्यूट (दिल्ली विश्वविद्यालय) के पूर्व निदेशक डॉ. संतोष जैन पस्सी और सुश्री आकांक्षा जैन रिसर्च एसोसिऐट की रिपोर्ट कहती है कि बाजरा एक ऐसा अनाज है जिसमें कि अम्ल नहीं बन पाता और यह आसानी से हजम हो जाता है।
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'बाजरा' सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है जिसके बारे में और बातें जानने के लिए नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये...

जल्दी उगता है और काफी समय तक रहता है
बाजरा छोटा और कठोर अनाज है जो की कम उपजाऊ और कम नमी भूमि में भी उग सकता है। यह मात्र 65 दिनों में तैयार हो जाता है। य इसका भंडारण अगर ठीक से किया जाए तो बीच दो वर्षो तक या इससे ज्यादा तक चलता है।

पेट की बीमारियों और मधुमेह में फायदेमंद
बाजरा अधिकांशत: बहुत पोषक होता है और इसमें लसलसापन नहीं होता। इससे अम्ल नहीं बन पाता और यह आसानी से हजम हो जाता है। लसलसे पदार्थ से मुक्त होने के कारण यह पेट की बीमारियों से पीडित होते हैं। बाजरे की रोटी अधिक दिनों तक खाने से इसमें निहित ग्लूकोज धीरे-धीरे निकलता है और इस प्रकार से यह मधुमेह से पीड़ित लोगों को भी अनुकूल पड़ता है।

बाजरे से देश कुपोषणमुक्त हो सकता है
बाजरे में लोहा, कैल्शियम, जस्ता, मैग्निशियम और पोटाशियम जैसे तत्व अच्छी मात्रा में होते हैं। नियमित रूप से बाजरा खाने से भारत की आबादी का अधिकांश भाग कुपोषणमुक्त हो सकता है। हालांकि बाजरे को मोटा आनाज कहा जाता है लेकिन पोषण तत्वों में समृद्ध होने के कारण इस अनाज को न्यूट्रिया मिलेट्स न्यूट्रिया सीरियल्स कहा जाता है।

उपेक्षा का शिकार
हालांकि इतना फायदेमंद होने वाला यह अनाज आज तक केवल उपेक्षा का ही शिकार है इसलिए यह काफी लोगों की पहुंच से दूर है।

भारत में बहुत उपयोगी
बाजरा अच्छा चारा भी होता है और कम समय में बड़ा हो सकता है। यह भारत में बहुत उपयोगी है क्योंकि हमारी खेती में बार-बार मानसून की कमी महसूस की जाती है।

बाजरा, ज्वार, रागी
भारत में जिस प्रकार के बाजरे की खेती होती है उनमें बाजरा, ज्वार, रागी, बर्री, झंगोरा, कंगनी, कोदरा आदि मशहूर है।

लोकप्रिय बनाने की जरूरत
छोटा बाजरा आंध्र प्रदेश,उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों के पहाड़ी इलाकों में भी पैदा हो सकता है। इसलिए इसे लोकप्रिय बनाने की जरूरत है।

पैदावार बढ़ाने के लिए
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत खाद्य अनाजों का पैदावार बढ़ाने के लिए अतिरिक्त 25 मिलियन टन का लक्ष्य तैय किया गया है। इस लक्ष्य में बाजरे का भाग 2 मिलियन टन (8 प्रतिशत परिवर्धित अनाज उत्पादन लक्ष्य) रखा गया है।

बाजरे की खेती को राज्यों का समर्थन नहीं
बाजरे की खेती को राज्यों का समर्थन नहीं मिलता है जिसके कारण बाजरे की खेती के लिए न ही ऋण मिलता और न इसका बीमा हो सकता है। इस प्रवृति को बदलने की जरूरत है।

सरकार की कुछ स्कीमें
-बाजरे की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए पोषण सुरक्षा उपाय
-वर्षा से सिंचाई वाला विकास कार्यक्रम
-समन्वित खाद्यान विकास कार्यक्रम

पर्यावरण के लिए भी उपयोगी
बाजरे की फसल पर्यावरण के लिए भी उपयोगी है। यह जलवायु परिवर्तन के असर को कम करती है।

कीड़े-मकौड़े नहीं लगते
बाजरे की खेती में उर्वरकों की जरूरत नहीं पड़ती अत: इस फसल में कीड़े-मकौड़े नहीं लगते।

पोषक तत्व
बाजरे के अनाज में पोषक तत्व होते है। यह गेंहू और चावल के मुकाबले तीन से पांच गुने तक अधिक पोषक होता है।

मोटापा नहीं आता
इसमें खाने वाले रेशे प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिससे शरीर में मोटापा नहीं आता और उच्च रक्तचाप की बीमारी नहीं लगती।

स्वस्थ जीवन
इसके अलावा, हमें इस अनाज के बारे जनता में जागृति भी पैदा करनी होगी और लोगों को आरामपंसद जीवन शैली से विमुख करना होगा ताकि वे स्वस्थ जीवन बीता सकें।












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