कमाल का रिश्ता है अटल जी और कवि नीरज का
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। महान कवि नीरज और अटल बिहारी वाजपेयी पुराने मित्र हैं। नीरज जी अपने मित्र यानी अटल जी की शख्सियत के कायल हैं। उन्होंने एक दोहे के माध्यम से अटलजी को रेखांकित किया।‘‘अटल, अटलजी ही रहे लेकर दृढ़ विश्वास।

नीरज जी अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा से बेहद प्रसन्न हैं। अटलजी के साथ कवि सम्मेलन में मंच साझा करने वाले नीरज ने कहा कि वह कवि पहले राजनेता बाद में हैं। भारत रत्न उन्हे पहले ही मिल जाना चाहिए था।
दोनों की एक कुंडली
नीरज जी ने कहा कि मेरी और अटल जी की कुंडली में कई समानताएं हैं। उनका लग्न तुला हैं मेरी भी तुला लग्न है और तुला लग्न में जब शनि बैठता है तो पैर बेकार हो जाते हैं। ऐसा हम दोनों के साथ हुआ है।
पहले कवि
उन्होंने अलीगढ़ में कुछ पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान कहा कि अटल एक सफल नेता से पहले कवि हैं। पुराने दिनों की यादों को ताजा करते हुए कहा कि वह वीर रस की काव्य रचनाएं मंच से साथ में पढ़ा करते थे। ग्वालियर, आगरा, अजमेर, दिल्ली में हुए कवि सम्मेलनों में कई बार साथ-साथ शामिल हुए।
कानपुर में साथ-साथ
उन्होंने बताया कि 1946 की बात रही होगी। उस समय अटल कानपुर के डीएवी डिग्री कॉलेज से वकालत की पढ़ाई कर रहे थे। हम हॉस्टल में रहते थे। वह अपने पिता के साथ कॉलेज आते थे। कॉलेज में साथ-साथ दो साल रहे।
नीरज ने बताया कि एक बार अटल जी ने कहा कि ग्वालियर में एक कवि सम्मेलन में कविता पढ़नी है। ट्रेन से बैठकर आगरा पहुंचे। वहां से ग्वालियर के लिए ट्रेन पकड़ी। ट्रेन इतनी देरी से पहुंची कि जब तक कवि सम्मेलन ही समाप्त हो चुका था। पंडाल खाली था। उस समय यह स्थिति हो गई कि जेब में किराया तो दूर तांगे के लिए भी पैसे नहीं थे। तब वहां से बाड़ा मोहल्ला पहुंचे तो सम्मेलन के संयोजक राजनारायण बिसारिया चाट खा रहे थे, उनसे मिले तो उन्होंने अगले दिन एक गोष्ठी में काव्य पाठ करने को कहा।












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