Silicon Valley Bank: अमेरिका का सिलिकॉन वैली बैंक हुआ दिवालिया, क्या होगा भारत पर असर?
सिलिकॉन वैली बैंक की विफलता 2008 के वित्तीय संकट के बाद अमेरिकी इतिहास में दूसरी सबसे बड़ी विफलता है।

सिलिकॉन वैली बैंक (एसवीबी) की स्थापना साल 1983 में बिल बिगरस्टाफ और रॉबर्ट मेडियारिस ने की थी। यह शुरुआत एक कॉमर्शियल बैंक के रूप में थी। जिसका उद्देश्य अमेरिका की टेक कंपनियों और उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था। बैंक का मुख्यालय सांता क्लारा, कैलिफोर्निया में है।
यह बैंक 30 जून 2016 तक 25.9 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ विश्व प्रसिद्ध सिलिकॉन वैली शहर का सबसे बड़ा बैंक था। साल 2004 में भारत के बैंगलुरू शहर में इसकी शाखा खुली। साल 2022 तक बैंक की कुल संपत्ति लगभग 211.8 बिलियन डॉलर तथा जमा रकम 175.4 बिलियन डॉलर थी।
दिवालिया होने के कारण
साल 2008 के वित्तीय संकट के बाद सिलिकॉन वैली बैंक की विफलता अमेरिकी इतिहास में दूसरी सबसे बड़ी विफलता है। दरअसल, फेडरल बैंक की बढ़ती ब्याज दरों के कारण अमेरिका में कई स्टार्टअप्स में नए निवेश बंद हो गये थे। जिसके कारण फंड का संकट गहरा गया। इस कारण सिलिकॉन वैली बैंक के ग्राहकों, जिनमें अधिकांश स्टार्टअप्स ही हैं, ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक से पैसे निकालने शुरू कर दिए। परिणामस्वरूप 9 मार्च 2023 को सिलिकॉन वैली बैंक के शेयरों में 66 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गयी। उस दौरान बैंक की मुख्य कंपनी एसवीबी फाइनेंशियल ग्रुप के शेयर भी 70 प्रतिशत तक गिर गए थे। इसके बाद कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को बढ़ाने के लिए अपने शेयर बेचने का निर्णय लिया।
इस बीच अमेरिका के फेडरल बैंक द्वारा ब्याज दर बढ़ाने के कारण भी बैंक द्वारा गवर्नमेंट बॉन्ड्स की बिक्री पर 1.8 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। अंत में बैंक की वित्तीय हालात को देखते हुए कैलिफोर्निया के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल प्रोटेक्शन एंड इनोवेशल ने बैंक को दिवालिया घोषित कर दिया। फिलहाल फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन को बैंक का रिसीवर तथा बैंकों में जमा राशि की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं।
बैंक ग्राहकों का क्या होगा?
फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (एफडीआईसी) ने इस संदर्भ में कहा है कि बैंक 13 मार्च को फिर से खुलेंगे और बीमायुक्त जमाकर्ताओं को उनके बीमा के पैसे दिए जायेंगे। सूत्रों की मानें तो 2022 के अंत तक बैंक के पास जमा 175 बिलियन डॉलर में से 89 प्रतिशत जमा धन का बीमा ही नहीं हुआ था। जानकारों का मानना है कि एफडीआईसी इस कोशिश में भी है कि सिलिकॉन वैली बैंक का अन्य बैंक में विलय किया जा सकता है। जिससे असुरक्षित जमाकर्ता (जिसका बीमा नहीं है) को भी सुरक्षित किया जा सके।
अमेरिकी कानून के अनुसार सभी जमाकर्ता तय बीमा राशि के बराबर ही पैसा निकाल पायेंगे। एफडीआइसी नियम के आधार पर सिलिकॉन वैली बैंक से कस्टमर 0.25 मिलियन डॉलर (2.5 लाख डॉलर) तक की राशि निकालने के हकदार होंगे। यानी अगर उनके अकाउंट में 0.25 मिलियन डॉलर से ज्यादा की रकम जमा होगी, तो भी वह केवल बीमायुक्त खाते से 0.25 मिलियन डॉलर ही रकम निकाल पायेंगे। अगर राशि 0.25 मिलियन से ज्यादा है तो एफडीआईसी उन्हें एक सर्टिफिकेट देगा। जिससे फंड रिकवर होने के बाद इन्हें पैसे लौटाए जाएंगे। बैंक में दिसंबर 2022 तक 175.4 बिलियन डॉलर की जमा राशि थी।
भारत में इसका क्या होगा असर
सिलिकॉन वैली बैंक के दिवालिया होने का असर भारतीय स्टार्टअप्स पर भी दिखेगा। दरअसल, कई भारतीय स्टार्टअप्स ने भी सिलिकॉन वैली बैंक में पैसा जमा कर रखा हुआ है। गौरतलब है कि बैंक की दाता कंपनी एसवीबी फाइनेंशियल ग्रुप टेक स्टार्टअप को कर्ज देने के लिए मशहूर है।
बैंक ने भारत में लगभग 20 स्टार्टअप्स में निवेश किया हुआ है। हालांकि, इनमें निवेश की गई राशि की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। मगर अक्टूबर 2022 में भारत की कई कंपनियों ने सिलिकॉन वैली बैंक से करीब 150 मिलियन डॉलर की पूंजी ली थी। बैंक का भारत में सबसे अहम निवेश एसएएएस-यूनिकॉर्न आईसर्टिस में है। इसके अलावा ब्ल्यूस्टोन, पेटीएम, वन-97 कम्युनिकेशन्स, पेटीएम मॉल, नापतोल, कारवाले, शादी.कॉम, इनमोबी और लॉयल्टी रिवार्ड्ज जैसे स्टार्टअप में बैंक का निवेश हैं। जाहिर है कि बैंक के बंद होने से इनकी चिंता बढ़ेगी।












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