Teesta Setalvad: सबूतों से छेड़छाड़ से लेकर धार्मिक भावनाएं भड़काने तक, तीस्ता सीतलवाड़ पर आरोपों की लिस्ट
Teesta Setalvad: तीस्ता सीतलवाड़ एक बार फिर चर्चाओं में हैं। फिलहाल उनकी मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही। 20 जुलाई को गुजरात में अहमदाबाद की एक सत्र अदालत ने राज्य में 2002 में हुए दंगों के संबंध में कथित रूप से सबूत गढ़ने के मामले में सीतलवाड़ को आरोपमुक्त करने का आग्रह करने वाली याचिका खारिज कर दी। इसी मामले में 19 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता को जमानत दी थी। अब सत्र अदालत का फैसला उनके लिए झटका माना जा रहा है। सीतलवाड़ पर इसके अलावा भी कई आरोप हैं। 2006 में तीस्ता के खिलाफ पहला केस दर्ज हुआ था।
कौन हैं तीस्ता सीतलवाड़?
तीस्ता सीतलवाड़ का जन्म 09 फरवरी 1962 को महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई मुंबई विश्वविद्यालय से पूरी की। उनके पिता मुंबई के प्रसिद्ध वकील अतुल सीतलवाड़ हैं। तीस्ता की मां का नाम सीता सीतलवाड़ है। तीस्ता के दादा एमसी सीतलवाड़, भारत के पहले अटॉर्नी जनरल थे।

तीस्ता ने अपनी कानून की पढ़ाई बीच में छोड़कर पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। कुछ ही सालों में वह चर्चित पत्रकारों में शामिल हो गयी। पत्रकार जावेद आनंद उनके पति हैं। सीतलवाड़ ने कुछ सहयोगियों के साथ मिलकर सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस नाम से एनजीओ की शुरुआत की। इस एनजीओ की शुरुआत कथित तौर पर 2002 के गुजरात दंगों के पीड़ितों की वकालत करने के लिए की गई थी। तीस्ता इस एनजीओ की सचिव हैं। साल 2007 में उन्हें यूपीए सरकार द्वारा पद्मश्री अवॉर्ड मिल चुका है।
तीस्ता सीतलवाड़ का गुजरात दंगे से क्या कनेक्शन?
तीस्ता सीतलवाड़ गुजरात दंगों के पीड़ितों के लिए लड़ाई लड़ने का दावा करती हैं। तीस्ता का एनजीओ सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) गुजरात दंगे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयी याचिका में सह-याचिकाकर्ता बना था। इस याचिका में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी (वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री) सहित अन्य 62 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। तीस्ता सीतलवाड़ पर कई बड़े आरोप हैं, जिनमें अधिकतर गुजरात दंगे से जुड़े हैं।
गुजरात दंगों से जुड़े मामलों में सबूत से छेड़छाड़ करने का आरोप
तीस्ता पर गुजरात दंगों से जुड़े मामलों में सबूत से छेड़छाड़ करने का आरोप है। तीस्ता सीतलवाड़ को गुजरात दंगों के मामले में कथित तौर पर नकली सबूत बनाने के लिए गिरफ्तार किया गया था। उन पर तत्कालीन मुख्यमंत्री (नरेंद्र मोदी), वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों सहित निर्दोष लोगों को फंसाने की नीयत से झूठी गवाही दिलाने, दंगे के दौरान हत्याओं की वीभत्स कहानियां बनाने समेत कई घटनाएं गढ़ने जैसे आरोप हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जून 2022 में इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि तीस्ता सीतलवाड़ के बारे में और छानबीन की जरूरत है, क्योंकि तीस्ता इस मामले में जकिया जाफरी की भावनाओं का इस्तेमाल गोपनीय ढंग से अपने स्वार्थ के लिए कर रही थी। इस टिप्पणी के बाद 25 जून 2022 को तीस्ता की गिरफ्तारी हुई थी। इस मामले में 19 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने सीतलवाड़ को नियमित जमानत दी है। जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तीस्ता का पासपोर्ट अभी जब्त ही रहेगा, मतलब वह देश से बाहर नहीं जा सकेंगी। साथ ही शीर्ष अदालत ने आदेश दिया है कि तीस्ता गवाहों पर प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर दबाव नहीं डालेंगी।
विदेशी चंदे का दुरुपयोग करने का आरोप
2013 में अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी के 12 लोगों ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर तीस्ता के खिलाफ विदेशी फंड मामले में जांच की अपील की थी। 2002 गुजरात दंगों में इस सोसायटी के 69 लोग मारे गए थे, जिनमें कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी भी शामिल थे। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि तीस्ता ने सोसायटी में म्यूजियम बनाने का वादा किया था। इसके लिए विदेश से आए करीब डेढ़ करोड़ रुपयों के साथ घालमेल किया। जनवरी 2014 में तीस्ता और उनके पति जावेद आनंद के अलावा एहसान जाफरी के बेटे तनवीर और दो अन्य के खिलाफ अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने जांच के बाद दावा किया था कि तीस्ता और जावेद ने म्यूजियम के लिए जुटाए विदेशी चंदे के रुपयों से क्रेडिट कार्ड के बिल चुकाए, जिनसे गहने और शराब खरीदी गई थी।
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के उल्लंघन का आरोप
भारत में कोई भी निजी संगठन विदेश से दान तभी स्वीकार कर सकता है, जब वह विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (Foreign Contribution (Regulation) Act - FCRA) के तहत पंजीकृत हो। तीस्ता की संस्था सबरंग कम्युनिकेशंस एंड पब्लिशिंग ने इस अधिनियम के तहत पंजीकृत न होने के बावजूद 2004 से 2014 के बीच सरकार की मंजूरी के बिना अमेरिका स्थित फोर्ड फाउंडेशन से 290,000 डॉलर (वर्तमान में करीब 2.38 करोड़ रुपये) का चंदा लिया था।
गुजरात सरकार ने कहा था कि अमेरिका स्थित फोर्ड फाउंडेशन से तीस्ता ने अपने एनजीओ के लिए जो पैसे जुटाए, उनका इस्तेमाल उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और भारत की छवि खराब करने के लिए किया। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं में से एक फोर्ड फाउंडेशन को निगरानी सूची में डाल दिया था। बाद में तीस्ता पर सीबीआई केस शुरू हुआ।
धार्मिक भावनाएं भड़काने का भी मामला
साल 2014 में तीस्ता सीतलवाड़ पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का मामला दर्ज हुआ था। दअरसल, तीस्ता ने अपने ट्विटर प्रोफाइल पर एक विवादास्पद तस्वीर शेयर की थी, जिसमें हिंदू धर्म की देवी मां काली की तुलना ISIS के आतंकवादी से की गई थी। तीस्ता ने जो तस्वीर शेयर की थी, उसमें एक आतंकवादी के हाथ में सुदर्शन चक्र दिखाया गया था, जो हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु का शस्त्र माना जाता है। वहीं, दूसरी तरफ मां काली के चेहरे पर ISIS के आतंकवादी का चेहरा लगाया गया था।
तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके बाद तीस्ता को चौतरफा आलोचना झेलनी पड़ी। उनकी गिरफ्तारी की मांग भी की जाने लगी। हंगामा मचने के बाद सीतलवाड़ ने उस तस्वीर को अपनी प्रोफाइल से हटा लिया और माफी मांगी। दूसरी तरफ, इसी मामले को लेकर गोवा में तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ एक शिकायत भी दर्ज कराई गई। रोहित गौनकर नाम के एक शख्स ने यह कहते हुए शिकायत दर्ज कराई थी कि तीस्ता ने ये तस्वीरें हिंदू भावनाओं को भड़काने के लिए शेयर की थी।












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