Manipur: किसने रखा 'मणिपुर' राज्य का नाम? कौन था वो राजा जिसने मैतेई छोड़कर अपनाया हिंदू धर्म?

Manipur History: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार (8 जुलाई) को मणिपुर का दौरा किया और वहां के हिंसा पीड़ितों से मुलाकात की और इसके बाद उन्होंने जमकर मोदी सरकार पर निशाना साधा।

अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा 'पीएम मोदी को यहां आकार यहां के हालात देखने चाहिए। यहां की स्थिति बेहद ही खराब है, ग्राउंड लेवल पर कोई इम्प्रूवमेंट नहीं है।'

Maniopur

दो समुदायों की नफरत का शिकार मणिपुर

आपको बता दें कि 'भारत का मणि' कहे जाने वाला ये राज्य पिछले कुछ टाइम से दो समुदायों की नफरत का शिकार है। इस हिंसा को विपक्ष ने लोकसभा चुनाव में जमकर मुद्दा भी बनाया था।

'मणिपुर का जिक्र महाभारत में भी मिलता है'

लेकिन राजनीति से इतर अगर इतिहास की बात करें तो देश के इस खूबसूरत राज्य के बारे में काफी रोचक बातें सामने आती हैं। इस प्रदेश का जिक्र 'महाभारत' में भी मिलता है। कहते हैं कि यहां चित्रवाहन नाम के एक राजा थे, उनकी एक अप्सरा जैसी बेटी थी, जिनका नाम चित्रांगदा था, उनकी शादी वीर योद्धा अर्जुन से हुई थी।

'कांगलेइपाक' के नाम से जाना जाता था

तो वहीं यहां के एक लोकप्रिय शासक का नाम नोंगदा लैरेन पाखन्बा था। इतिहास के पन्नों के मुताबिक वो इस राज्य के प्रथम नरेश थे, जो कि सनमाही धर्म का पालन करते थे और 'कांगला शा' की पूजा करते थे, ये बात 1724 के आस-पास की है और तब इस राज्य को 'कांगलेइपाक' के नाम से जाना जाता था और इसकी राजधानी का नाम 'कांगला' था।

'गरीब नवाज' ने रखा था मणिपुर का नाम

1751 के आस-पास यहां पर 'गरीब नवाज' ने शासन किया, उन्होंने इसका नाम 'मणिपुर' रखा था और राज्य में हिंदू धर्म को स्थापित किया था। इनके बचपन का नाम 'पम्हीबा' था , जो कि राजा चराइरोंग्बा और उनकी छोटी रानी नंगशेल छाइबी के बेटे थे।

पम्हीबा का लालन-पालन 'नागा समुदाय' ने किया

कहा जाता है कि 'पम्हीबा' का लालन-पालन 'नागा समुदाय' ने किया था क्योंकि पंरपरा के मुताबिक अगर बड़ी रानी के पुत्र हैं तो बाकी रानियों के बेटों कों मरवा दिया जाता था जिससे राजगद्दी को लेकर झगड़ा ना हो इसलिए नंगशेल छाइबी ने 'पम्हीबा' के जन्म लेते ही उसे राजमहल से दूर कर दिया था।

पम्हीबा ने किया हिंदू धर्म का प्रचार

लेकिन कुछ वक्त बााद उनका ये सच पकड़ा गया और फिर बड़ी रानी ने 'पम्हीबा' को मरवाने की कोशिश की लेकिन उनके खुद का कोई बेटा नहीं था। हालांकि वो 'पम्हीबा' को मार नहीं पाईं। जब राजा चराइरोंग्बा को पता चला कि उनका बेटा जीवित है तो वो उसे सम्मान के साथ राजमहल ले आए और उसकी राजा बना दिया, वो मणिपुर के लोकप्रिय शासक बने, उन्होंने ही राज्य में हिंदू धर्म का प्रचार प्रसार किया था और खुद भी हिंदू धर्म अपनाया।

राजा चराइरोंग्बा ने भी अपना लिया था हिंदू धर्म

कुछ जगहों पर ये भी लिखा है कि राजा चराइरोंग्बा ने पहले ही एक धर्मयोगी से प्रभावित होकर मैतेई छोड़कर वैष्णव धर्म स्वीकार कर लिया और अपना नाम 'पीतांबर सिंह' रख लिया था, जिसे कि आगे उनके बेटे ने बढ़ाया।

फयेंग से खुदाई में एक तांबे की प्लेट मिली

तो वहीं दूसरी ओर विकीपीडिया के मुताबिक 'फयेंग' से खुदाई में एक तांबे की प्लेट मिली थी, जो कि करीब 763 ई की है, जिसमें संस्कृत में हिंदू देवी देवताओं के शिलालेख के बारे में वर्णन है, जो ये साबित करता है कि उस वक्त लोग मणिपुर में हिंदू धर्म का पालन करते थे और संस्कृत बोलते थे।

41 प्रतिशत आबादी है हिंदू, करते हैं राधा-कृष्ण की पूजा

अगर आज की बात करें तो भारत की 2011 की जनगणना के मुताबिक इस राज्य में हिंदूओं की आबादी 41% है और ईसाइयों का हिस्सा भी 41% है और मणिपुरी वैष्णव केवल कृष्ण की पूजा नहीं करते, बल्कि राधा-कृष्ण की भी पूजा करते हैं।

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