जानिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में 40 खास बातें
बैंगलोर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस केवल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ही नहीं बल्कि लोगों के लिए रोल मॉडल हैं।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अंतिम दिन का विवरण पढ़कर आंखें हो जायेंगी नम
आईये जानते हैं इस महान व्यक्ति के बारे में कुछ रोचक बातें नीचे की स्लाइडों के जरिये...

नेताजी का जन्म
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था।

आज़ाद हिन्द फौज
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये, उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था।

'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा'
उनका नारा 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा' भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है।

खत्म करने का आदेश
कहा जाता है कि जब नेता जी ने जापान और जर्मनी से मदद लेने की कोशिश की थी तो ब्रिटिश सरकार ने 1941 में उन्हें ख़त्म करने का आदेश दिया था।

'दिल्ली चलो'
5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में नेता जी ने अपनी सेना को सम्बोधित करते हुए 'दिल्ली चलो' का नारा दिया।

21 अक्टूबर 1943
21 अक्टूबर 1943 को सुभाष बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी।

मान्यता
इस सेना को जर्मनी, जापान, फिलीपाइन, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी।

आजाद हिन्द फौज
1944 को आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर आक्रमण किया और कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त भी करा लिया।

कोहिमा का युद्ध
आजादी के लिए कोहिमा का युद्ध 4 अप्रैल 1944 से 22 जून 1944 तक लड़ा गया एक लंबा और बहुत ही भयानक युद्ध था।

बापू से मांगा समर्थन
6 जुलाई 1944 को उन्होंने रंगून रेडियो स्टेशन से महात्मा गांधी के नाम एक प्रसारण जारी करके बापू से आशीर्वाद और शुभकामनायें माँगीं।

नेताजी की मृत्यु पर सस्पेंस?
भारत में रहने वाले उनके परिवार के लोगों का आज भी यह मानना है कि सुभाष की मौत 1945 में नहीं हुई। वे उसके बाद रूस में नज़रबन्द थे।

कटक शहर
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी सन् 1897 को ओड़िशा के कटक शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माँ का नाम प्रभावती था।

मशहूर वकील
जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे। अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें रायबहादुर का खिताब दिया था।

आईएस बनाना चाहते थे
बोस के पिता उन्हें आईएस बनाना चाहते थे इसी कारण उन्होंने उन्हें विदेश भी भेजा।

1920 में बोस ने आईएस की वरीयता सूची
1920 में बोस ने आईएस की वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त करते हुए पास कर ली।

त्यागपत्र दे दिया
लेकिन उनके दिलो-दिमाग पर तो स्वामी विवेकानन्द और महर्षि अरविन्द घोष के आदर्शों ने कब्जा कर रक्खा है ऐसे में आईसीएस बनकर वह अंग्रेजों की गुलामी कैसे कर पायेंगे इसलिए उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया।

नौकरी छोड़ी
22 अप्रैल 1921 को भारत सचिव ई०एस० मान्टेग्यू को आईसीएस से त्यागपत्र देने का पत्र लिखा।

स्वदेश वापस लौटे
सुभाष जून 1921 में मानसिक एवं नैतिक विज्ञान में ट्राइपास (ऑनर्स) की डिग्री के साथ स्वदेश वापस लौट आये।

इण्डिपेण्डेंस लीग
सुभाष चंद्र बोस ने जवाहरलाल नेहरू के साथ सुभाषने कांग्रेस के अन्तर्गत युवकों की इण्डिपेण्डेंस लीग शुरू की।

साइमन कमीशन के खिलाफ
1928 में जब साइमन कमीशन भारत आया तब कांग्रेस ने उसे काले झण्डे दिखाये। कोलकाता में सुभाष ने इस आन्दोलन का नेतृत्व किया।

सैन्य तरीके से सलामी
1928 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में कोलकाता में हुआ। इस अधिवेशन में सुभाष ने खाकी गणवेश धारण करके मोतीलाल नेहरू को सैन्य तरीके से सलामी दी।

पुलिस ने किया लाठी चार्ज
26 जनवरी 1931 को कोलकाता में राष्ट्र ध्वज फहराकर सुभाष एक विशाल मोर्चे का नेतृत्व कर रहे थे तभी पुलिस ने उन पर लाठी चलायी और उन्हें घायल कर जेल भेज दिया।

भगत सिंह को ना बचा पाने का दुख
जब सुभाष जेल में थे तब गान्धीजी ने अंग्रेज सरकार से समझौता किया और सब कैदियों को रिहा करवा दिया। लेकिन अंग्रेज सरकार ने भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारियों को रिहा करने से साफ इन्कार कर दिया।

गांधी और कांग्रेस से नाराज
सुभाष चाहते थे कि इस विषय पर गान्धीजी अंग्रेज सरकार के साथ किया गया समझौता तोड़ दें। लेकिन गान्धी अपनी ओर से दिया गया वचन तोड़ने को राजी नहीं थे। अंग्रेज सरकार अपने स्थान पर अड़ी रही और भगत सिंह व उनके साथियों को फाँसी दे दी गयी। भगत सिंह को न बचा पाने पर सुभाष गांधी और कांग्रेस से बहुत नाराज हो गये।

11 बार जेल
सुभाष चंद्र बोस को 11 बार जेल हुई।

अनिश्चित काल के लिये म्याँमार के जेल भेजा
अंग्रेंजो को था शक कि बोस ज्वंलत क्रांतिकारियों से संबंध रखते हैं इस काऱण उन्होंने बोस को अनिश्चित काल के लिये म्याँमार के माण्डले कारागृह में बन्दी बनाकर भेज दिया।

डलहौजी
इस दौरान बोस को तपेदिक हो गया जिसके कारण उन्हें इलाज के लिए डलहौजी भेजा गया।

यूरोप पहुंचे
इलाज के लिए बोस यूरोप पहुंचे और यहीं से उनकी लाइफ में हुआ बहुत बड़ा परिवर्तन।

इटली नेता मुसोलिनी
बोस ने इटली नेता मुसोलिनी से मदद मांगी।

1934 में गिरफ्तार
1934 में सुभाष को उनके पिता की बीमारी की खबर मिली जिसके लिए वो कोलकाता आये लेकिन कोलकाता पहुँचते ही अंग्रेज सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और कई दिन जेल में रखकर वापस यूरोप भेज दिया।

प्रेम हुआ
सन् 1934 में उनकी मुलाकात एमिली शेंकल से हुई और इस दौरान दोनों में प्रेम विवाह हो गया।

प्रेम विवाह
दोनों ने सन् 1942 में बाड गास्टिन में हिन्दू पद्धति से विवाह रचा लिया।

अनिता बोस
वियेना में एमिली ने पुत्री अनिता बोस को जन्म दिया।

1945 में बोस की मौत
ऐसा कहा जाता है कि अगस्त 1945 में ताइवान में हुई तथाकथित विमान दुर्घटना में जब सुभाष की मौत हो गई, जिस पर विवाद है।

किताबों का शौक
बोस को किताबों का शौक था, ऐसे प्रमाण मिलते हैं कि उन्होंने स्वामी विवेकानंद की बहुत सारी किताबें पढ़ी हैं।

गांधी के विचारों से प्रभावित
बोस के बारे में कहा जाता है कि बोस गांधी जी के विचारों से ही प्रभावित थे इस कारण ही उनके अंदर संग्राम का बीज पनपा था।

किताबों में ज्यादा जिक्र नहीं
वैसे यह विडंबना ही कहेंगे कि बोस के बारे में ज्यादा जानकारी लोगों को उपलबद्ध नहीं है।

हिटलर से मिले
नेताजी हिटलर से भी मिले थे उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत और देश की आजादी के लिए कई काम किए।

पूरी दुनिया घूमी
ऐसा कहा जाता है कि बोस ने पूरी दुनिया का भ्रमण किया था।

मौत पर विवाद
नेताजी का शव आज तक नहीं मिला इसलिए आज तक उनकी मौत पर विवाद है।












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