Milkipur By Election: मिल्कीपुर चुनाव में कौन मारेगा बाजी? फलौदी सट्टा बाजार ने कर दी चौंकाने वाली भविष्यवाणी
Milkipur By Election 2025 : अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। यहां कुल 14 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था, जिनमें से 4 निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन रद्द हो गए। अब मैदान में 10 प्रत्याशी बचे हैं, जिनमें प्रमुख रूप से बीजेपी, सपा और आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी भी शामिल हैं।
मिल्कीपुर सीट पर भ्राजपा सपा के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा था, लेकिन आजाद समाज पार्टी के मैदान में उतरने से यह त्रिकोणीय हो गया है। फलौदी सट्टा बाजार में इस चुनाव को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। सट्टा बाजार के अनुसार, यह चुनाव अप्रत्याशित मोड़ ले सकता है।

सट्टा बाजार में आजाद समाज पार्टी की चर्चा
फलौदी सट्टा बाजार का मानना है कि सपा और भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगने की संभावना है। आजाद समाज पार्टी के सूरज चौधरी के मैदान में उतरने से दलित और अन्य वर्ग के मतदाता सपा-भाजपा से छिटककर उनके पक्ष में जा सकते हैं। सट्टा बाजार में सूरज चौधरी के बढ़ते कद को लेकर भी चर्चा है।
मिल्कीपुर क्षेत्र में करीब 3.62 लाख मतदाता हैं, जिनमें से 1.60 लाख दलित मतदाता हैं। यह वर्ग इस उपचुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यह वोट बैंक सपा और भाजपा के बीच संतुलन बिगाड़ने का कारण भी बन सकता है।
सूरज चौधरी के चलते सपा को नुकसान?
जानकारों का कहना है कि सूरज चौधरी पहले सपा सांसद अवधेश प्रसाद के करीबी थे। वे सपा छोड़कर आजाद समाज पार्टी में शामिल हो गए हैं। ऐसे में इसका सीधा असर सपा के परंपरागत वोट बैंक पर पड़ सकता है। कांग्रेस और बसपा के चुनाव न लड़ने से यह नुकसान और बढ़ सकता है।
कहा जा रहा है कि सूरज चौधरी पहले सपा सांसद अवधेश प्रसाद के करीबी थे। वे सपा छोड़कर आजाद समाज पार्टी में शामिल हो गए हैं। ऐसे में इसका सीधा असर सपा के परंपरागत वोट बैंक पर पड़ सकता है। कांग्रेस और बसपा के चुनाव न लड़ने से यह नुकसान और बढ़ सकता है।
बीजेपी के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन दलित और पिछड़े वर्गों का झुकाव आजाद समाज पार्टी और सपा की ओर जाता दिख रहा है। चंद्रभान पासवान को जीत के लिए सवर्ण और शहरी मतदाताओं पर निर्भर रहना होगा।
5 फरवरी को होगा मतदान
मिल्कीपुर उपचुनाव के लिए 5 फरवरी को मतदान होगा और 8 फरवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे। यह चुनाव सपा और भाजपा ही नहीं बल्कि आजाद समाज पार्टी के लिए भी बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है। फलौदी सट्टा बाजार की भविष्यवाणियों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है।












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