Ajeet singh yadav : दोस्त की जान बचाते समय ट्रेन हादसे में गंवा दिया था हाथ, टोक्यो पैरालंपिक में दिखाया जलवा
इटावा, 31 अगस्त: दिव्यांग एथलीट डॉ. अजीत सिंह यादव टोक्यो में जेवलिन थ्रो इवेंट में भले ही कोई मेडल नहीं जीत सके हो, लेकिन उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने लोगों का दिल जरूर जीत लिया। अजीत यादव उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने जैवलिन थ्रो में 56.15 मीटर भाला फेंककर 8वां स्थान प्राप्त किया। छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना हुनर दिखाने वाले डॉ. अजीत की जिंदगी युवाओं खासकर दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

दोस्त की जान बचाते समय ट्रेन हादसे में गंवा दिया था हाथ
डॉ. अजीत यादव का घर इटावा में भरथना के ग्राम साम्हो के नगला विधी में है। चार साल पहले साल 2017 में अजीत ने दोस्त की जान बचाते समय ट्रेन हादसे में एक हाथ गंवा दिया था। इसके बाद एक साल तक वह परेशानियों से जूझते रहे, लेकिन फिर उन्होंने पैरा ओलंपिक एथलीट के तौर पर पहचान बनाने का संकल्प लिया। परेशानियों को पीछे छोड़ते हुए कड़ी मेहनत की दृढ़ संकल्प के साथ मैदान में उतरे। इसके बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

बीजिंग में हासिल किया था गोल्ड
डॉ. अजीत ने 2019 में चीन के बीजिंग पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया था। अजीत ने दुबई में भी अपना परचम लहराया। दुबई वर्ल्ड पैरा एथलीट चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया था। अजीत यादव ने टोक्यो में भी बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि, यहां उन्हें जेवलिन थ्रो इवेंट में कोई मेडल नहीं मिल सका।
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अवनि लेखरा और सुमित अंतिल रचा इतिहास
बता दें, टोक्यो पैरालंपिक में भारत की अवनि लेखरा और सुमित अंतिल ने इतिहास रचा है। अवनि ने निशानेबाजी में महिलाओं की 10 मीटर एयर स्पर्धा एसएच-1 में गोल्ड मेडल अपने नाम किया तो सुमित ने भाला फेंक की एफ-64 स्पर्धा में गोल्ड हासिल किया है। यह पहली बार है कि भारत ने पैरालंपिक खेलों में दो गोल्ड मेडल जीते हैं।











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