जुबीन गर्ग के लिए क्यों रोया पूरा असम? क्या सिर्फ गाने के लिए थे फेमस या फिर है कोई और कहानी?
Zubeen Garg Death: असम की गलियों में इन दिनों सिर्फ एक ही नाम लोगों की जुबान पर सुनाई दे रहा है और वो है जुबीन गर्ग। जुबीन गर्ग की आवाज पीढ़ियों को जोड़ती थी। उनकी धुन सीधे दिल को छू जाती थी।
स्कूबा डाइविंग करते समय हुई जुबीन गर्ग की मौत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग करते समय अचानक ही सिंगर जुबीन गर्ग की तबीयत काफी ज्यादा बिगड़ गई थी। इसके बाद 52 वर्षीय सिंगर को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया था जहां ट्रीटमेंट के दौरान उनकी मौत हो गई थी।

सिंगर जुबीन गर्ग की मौत पर पूरा असम रोया
-सिंगर जुबीन गर्ग की मौत की खबर ने न केवल असम बल्कि पूरे देश को गहरे शोक में डूबो दिया है। आपको बता दें कि गत 21 सितंबर 2025 को जुबीन गर्ग का पार्थिव शरीर सिंगापुर से दिल्ली होते हुए गुवाहाटी लाया गया था। उस दिन असम मानो थम गया था।
-हजारों-लाखों लोग सड़कों पर उमड़ पड़े थे ताकि अपने चहीते सिंगर की आखिरी झलक पा सकें। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल वीडियो शेयर करते हुए लोगों की भावनाओं को सबके सामने रखा था।
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने पोस्ट में लिखी ऐसी बात
-सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी पोस्ट में लिखा था- पिछले कुछ दिनों में असम के बाहर के कई लोग पूछ रहे हैं कि हम जुबीन गर्ग को लेकर इतने भावुक क्यों हैं। इसका कोई एक जवाब नहीं है, लेकिन तीन बातें साफ हैं।
-पहली उनका संगीत सीधे दिलों तक पहुंचता था और असम की विविधता को बखूबी दर्शाता था।
-दूसरी वह बेहद साहसी और विद्रोही स्वभाव के थे। अपनी राय खुलकर सबके सामने रखते थे।
-तीसरी वह सबसे मददगार और दयालु इंसानों में से एक थे।
-सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि जुबीन गर्ग भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन वह हमेशा असम की धड़कनों में जिंदा रहेंगे।
गुवाहाटी में ऐसे हुआ जुबीन गर्ग का अंतिम संस्कार?
-जानकारी के अनुसार असम सरकार ने जुबीन गर्ग के निधन के बाद गत 20 से 22 सितंबर 2025 तक राजकीय शोक की घोषणा की थी। इन तीन दिनों के दौरान राज्य में किसी भी तरह का सांस्कृतिक या मनोरंजन कार्यक्रम नहीं हुआ था।
-वहीं गत 23 सितंबर 2025 को गुवाहाटी में जुबीन गर्ग का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। ये सिर्फ एक रस्म नहीं थी, बल्कि उस कलाकार को अंतिम सलाम था जिसने अपनी आवाज से हर दिल को छू लिया था।












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