Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Who Is C Sankaran Nair: कौन हैं शंकरन नायर? जिनके ऊपर बनी अक्षय कुमार की फिल्म 'केसरी चैप्टर 2'

Who Is Chettur Sankaran Nair: 18 अप्रैल 2025 को अक्षय कुमार की फिल्म केसरी चैप्टर 2: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ जलियांवाला बाग रिलीज हो गई है। ये फिल्म सी शंकर नायर के ऊपर बनी हुई है। सी शंकर नायर का जन्म 1857 में हुआ था, उनका पूरा नाम चेट्टूर शंकर नायर है। उनके पिता भी ब्रिटिश सरकार में तहसीलदार के पद पर थे। आज हम आपको अपन रिपोर्ट में उनके बारे में पूरी जानकारी देने जा रहे हैं।

नायर एक एक मलयाली परिवार में नायर पेशे से वकील थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मद्रास हाईकोर्ट से की। साल 1884 में उनको ब्रिटिश सरकार ने उन्हें मलाबार जिले की जांच कमेटी का सदस्य बनाया। इसके बाद वो साल 1908 तक ब्रिटिश सरकार के एडवोकेट-जनरल रहे। साथ ही वो इसी साल मद्रास हाईकोर्ट के जज भी बन गए।

Who Is C Sankaran Nair

ब्रिटिश सरकार ने उन्हें 1912 में नाइट की उपाधि दी थी। इसके बाद वो लगातार ब्रिटिश सरकार को उनकी खामियां बताते और सुधार के सुझाव भी देते। उस समय ऐसा करने वाले वो एकमात्र भारतीय थे। लेकिन साल 1919 की 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ। इसके विरोध में उन्होंने वायसराय की परिषद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद ही वो भारत के तत्कालीन सचिव के सलाहकार बने थे। इसके बाद वो कई बार भारतीय के राष्ट्रीय आंदोलन में हिस्सा भी लिया। नायर भले ही ब्रिटिश हुकूमत में नौकरी करते रहे। वो लगातार भारत के राष्ट्रव्यापी आंदलनों में भी भागीदार बनते रहे हैं।

साल 1922 में नायर ने एक किताब लिखी, इसका नाम 'गांधी एंड एनार्की' था। इस किताब में उन्होंने अपने और गांधी के बीच के मतभेद के बारे में बताया था। साथ ही 1919 में हुए पंजाब में विद्रोह के दौरान ब्रिटिश की अदालत ने माना था कि उनकी किताब में तत्कालीन भारत के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर माइकल फ्रांसिस ओ'डायर को बदनाम किया गया था।

बाद में इसी किताब से लंदन की अदालत में जनरल डायर के ऊपर मानहानि के मुकदमें को माना था। तब भी नायर पीछे नहीं हटे बल्कि उन्होंने हुकूमत के खिलाफ मुकदमा लड़ा था। किताब में पलाट ने ये भी लिखा कि ये मुकादमा जीतने के लिए नहीं था। बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होना था। 1924 में अंग्रेज वकील और जज के सामने नायर ने मुकदमा लड़ा और अपने पक्ष में ऐतिहासिक जवाब सामने आया। जिसमें डायर से मांफी मांगने की बजाय हर्जाने के तौर पर 500 पाउंड देने का बात हुई। लेकिन 106 साल बाद भी इस केस में मांफी मांगने की बात हो रही है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+