Test Movie Review: स्पोर्ट्स ड्रामा में मिलेगा गजब का थ्रिल, आर माधवन की परफॉर्मेंस फिर 'टेस्ट' में पास
मूवी रिव्यू- टेस्ट
एक्टर- नयनतारा, आर माधवन और सिद्धार्थ
ओटीटी- नेटफ्लिक्स
स्टार्स- 3 स्टार
Test Movie Review: क्रिकेट इस देश में भगवान की तरह पूजा जाता रहा है। इसे देखने और चाहने वालों की कमी नहीं है। इसके लिए वो कुछ भी कर सकते हैं। लेकिन ये बात भी किसी से नहीं छुपी है कि इसी क्रिकेट में फिक्सिंग जैसी चीजें भी हुई हैं। कई खिलाड़ी इसकी जकड़ में आए, तो कुछ ने इससे किनारा किया। कुछ खिलड़ियों को खूब दबाब भी दिया गया। उन्होंने अपना ईमान और देश की इज्जत पर कीचड़ न उछालना स्वीकार किया। हालांकि उनपर कई कठिनाइयां भी आईं। आज के रिव्यू में एक ऐसी ही कहानी पर बात करते हैं।

कहानी हैं अर्जुन की है, जो भारत का चर्चित खिलाड़ी है। वो अच्छा खेलता है, लेकिन कुछ मैच से वो फॉर्म में नहीं है। टीम का मैनेजमेंट उसे रिटायरमेंट के लिए मजबूर कर रहा है। वो भी अपने आखिरी मैच को यादगार तरीके से खेलना चाहता है। अब जैसा हम सोचते हैं, जीवन में अगर वैसा ही होने लगे तो फिर टेस्ट कैसे होगा? इस कहानी में दो लोग और हैं। कुमुदा और सरवनन, दोनों पति पत्नी और जीवन के संघर्ष में हैं। सरवनन मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से पढ़ाई की डॉक्टरेट किया है। उसकी ख्वाहिश भारत आकर देश की तस्वीर बदलने की है। लेकिन उसने भी जो सोचा है अगर ऐसा हो जाएगा तो फिर कैसे कोई सरकारी अधिकारी प्रोजेक्ट पास कराने के लिए रिश्वत मांगेगा। ये टेस्ट की कहानी के दो पहलू हैं। लेकिन ऐसे भले ही आपको दो हीरो समझ आ रहे होंगे। असल में ऐसा नहीं है, हीरो एक ही रहता है। वो कौन है उसे फिल्म देखकर तय करिए।
फिल्म में नयनतारा, आर माधवन और सिद्धार्थ लीड रोल में हैं। सरवनन के किरदार में आर माधवन हैं। वो पहले पैन इंडिया एक्टर हैं। ऐसा कोई ही होगा जिसने उनकी फिल्म रहना है तेरे दिल में ना देखी हो। आर माधवन ने टेस्ट में अपने अभिनय से एक नई परिभाषा लिखी है। बीते दिन केसरी 2 में उनके रोल को लेकर सवाल किया गया, तब उनका कहना था कि मेरा रोल देखकर आपको अगर घिन्न आ गई। इसका मतलब मैं सफल हो गया। माधवन का किरदार कभी-कभी आपको वो फील कराता है। इंसान को जब समाज, सरकार और खुद की पत्नी से ताड़ना मिले, तो कैसा आदमी बनेगा। अपने अभिनय से माधवन ने सटीक उत्तर दिया है। इस फिल्म में उनके काम को देखना बेहद सुखद अनुभव है। उनकी पत्नी के रोल में नयनतारा हैं। सिनेमा में साड़ी पहनी हुई हिरोइन की खूबसूरती का पैमाना नयनतारा ने ही सेट किया है। इस फिल्म में फ्रेम दर फ्रेम उनके किरदार के साथ बहुत कुछ घटता है। जिसे वो बडी सी सहजता से अपने एक्सप्रेशन में दिखाती हैं। अपने किरदार से उन्होंने स्त्री शब्द को भी बहुत मजबूती से गढ़ा है। माधवन और नयनतारा दोनों ही इस फिल्म में अभिनय से दिल जीत लेते हैं। सिद्धार्थ भी हैं, लेकिन इन दोनों के सामने वो थोड़ा फीके लगे हैं। कई बार उनके डायलॉग की टोन में भी बहुत अंतर नहीं दिखता। उनका काम भी ठीक है।
टेस्ट को 'फर्जी', 'गन्स एंड गुलाब्स' और 'फैमिली मैन' जैसी अच्छी सीरीज लिखने वाले सुमन कुमार ने डायरेक्टर एस शशिकांत के साथ मिलकर लिखी है। लिखाई में दोनों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। क्रिकेट के बैकग्राउंड में सेट फिल्म को थ्रिल मतलब अच्छी थ्रिल कैसी बनाए जाए, ये सुमन से सीखना चाहिए। एस शशिकांत ने अपने डायरेक्टोरियल डेब्यू में अच्छा काम पेश किया है। इसके पहले वो माधवन की ही 'विक्रम वेधा' प्रोड्यूस कर चुके हैं। ये भी कह सकते हैं कि उन्होंने पहली बॉल पर ही छक्का मारा है। उनके डेब्यू को विराज सिंह गोहिल ने बहुत ही खूबसूरत बनाया है, अपने फ्रेम और कैमरा एंगल से। बतौर सिनेमैटोग्राफर विराज का काम गजब है। उन्होंने फिल्म के टोन को जिस लाइट से सेट किया है, उसे अंत तक बरकरार रखा है। फिल्म में थोड़ी खामी है, वो ये कि सेकेंड हाफ में ये थोड़ी खींची से महसूस होती है। अगर टी एस सुरेश इसमें थोड़ा कांट छाट करते तो और कस सकती थी। फिल्म बाकी टेक्निकल तरीके से भी उम्दा है।
फिल्म का रिव्यू तो हो गया, लेकिन ये बहुत जरूरी सवाल आपके जेहन में छोड़ती है। अगर आपने इस फिल्म को संवेदनशीलता और एकाग्रता के साथ देखी है तो। जैसे- हीरो और विलन कौन है? जो परिवार को बचाने के लिए दुनिया नेस्तानाबूत कर दे? या दुनिया को बचाने के लिए परिवार को ही साइड कर दे? यही प्रश्न है जो आपको सोचने के लिए मजबूर कर सकता है। हालांकि ये भी आपके विवेक पर निर्भर करता है। 2 घंटे 25 मिनट की नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म 'टेस्ट' आपको देखनी चाहिए। मेरी बात यहीं तक, आप फिल्म देखिए और अपनी राय बनाइए।












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