Taali: 'कभी थी घृणा की पात्र आज है लाखों की मिसाल', आखिर कौन हैं Transgender Activist गौरी सावंत?

ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट गौरी सावंत का जन्म मुंबई के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था।

Transgender Activist Gauri Sawant कौन हैं?: पूर्व ब्रह्मांड सुंदरी सुष्मिता सेन ने अपनी आने वाली वेब सीरीज 'ताली' का पहला लुक जारी किया है। इस लुक में वो ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट गौरी सावंत के किरदार में हैं। जहां सुष्मिता सेन के इस लुक की चारों ओर तारीफ हो रही है, वहीं दूसरी ओर एक बार फिर से गौरी सावंत सुर्खियों में आ गई हैं। जिनकी लाइफ अगर आज लोगों के लिए मिसाल बन गई है तो वहीं उनका जीवन कष्टों, तिरस्कारों, दर्द और दुख की कहानी भी कहता है।

उनमें एक इंसान की तरह दिल भी धड़कता है

उनमें एक इंसान की तरह दिल भी धड़कता है

गौरी सावंत को उस गुनाह की सजा मिली, जो उन्होंने नहीं बल्कि कुदरत ने उनके साथ किया था, क्या हुआ अगर वो गॉड की स्पेशल चाइल्ड बनकर पैदा हुई थीं? क्या कसूर है इसमें उनका, वो भी एक जीती जागता शरीर है, जिसमें भले ही मिक्स जेंडर के लक्षण हों लेकिन उनमें एक इंसान की तरह दिल भी धड़कता है, जिसे दुख, दर्द और तिरस्कार महसूस होता है, वो वही सांस ग्रहण करती हैं, जो कि एक नार्मल महिला या पुरुष करते हैं।

गौरी के पापा सहायक पुलिस आयुक्त थे

गौरी के पापा सहायक पुलिस आयुक्त थे

आपको बता दें कि गौरी सावंत का जन्म मुंबई के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनके पापा सहायक पुलिस आयुक्त थे और वो अपने मम्मी-पापा की तीसरी संतान थी। वो जब पैदा हुई थीं तो नाम था गणेश नंदन लेकिन जब वो बड़ी होने लगीं तो उन्हें लगा कि उनके अंदर कुछ अलग है। उनके पिता उन्हें अपनी सजा मानने लगे। घर-परिवार और समाज में वो हंसी और घृणा का पात्र ना बन जाएं इसलिए उनका गुस्सा गणेश पर निकलने लगा।

 16 साल की उम्र में घर से भाग गईं

16 साल की उम्र में घर से भाग गईं

उनके भाई-बहन भी उन्हें नफरत भरी नजरों से देखा करते थे, अपनों की नजर में प्यार और सम्मान की तलाश करते-करते गणेश पर कुठाराघात तब हुआ, जब उनकी मां का निधन हो गया, ले देकर वो ही एक थीं, जो उनकी आंखों से आंसू पोंछा करती थी लेकिन अब वो भी आस नहीं बची थी और एक दिन जब बर्दाश्त करने की सारी हदें पार हो गईं तो उन्होंने घर से भाग जाने का फैसला कर दिया। उम्र थी 16 साल और वो घर से 60 रु लेकर रात के अंधेरें में घर से भाग गईं।

 जीते-जी अंतिम संस्कार कर दिया...

जीते-जी अंतिम संस्कार कर दिया...

उनके पापा पुलिस में थे लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उन्हें नहीं खोजा बल्कि उनका जीते-जी अंतिम संस्कार कर दिया। ये बात खुद गौरी सावंत ने एक इंटरव्यू में बताई थी। कहते है ना मारने वाले से बचाना वाला बड़ा होता है और वो ही गणेश सांवत के साथ हुआ, जो घर से भागकर किसी ट्रैफिक सिग्नल के पास खड़े थे, जाना कहां है, पता नहीं था कि तभी किसी ने उनका हाथ पकड़ा और वो थी 'गुरू कंचन अम्मा', जो कि उनको अपने साथ ले आईं।

लेकिन गौरी का रंग काला था इसलिए...

लेकिन गौरी का रंग काला था इसलिए...

वो उन्हें वहां ले गईं जहां उनके जैसे बहुत सारे लोग थे। घर से भागे, सताए हुए, वहां वो गणेश सांवत से गौरी सावंत बन गईं। उस वक्त ट्रांसजेंडर्स और किन्नरों का एक ही काम होता था और वो था भीख मांगना या सेक्सवर्कर का काम करना। लेकिन गौरी का रंग काला था इसलिए उन्हें भीख मांगने के लिए बोला गया लेकिन पढ़े-लिखे परिवार से आने वाली गौरी के लिए ये नागवार था, उन्होंने इसे मना कर दिया और एक एनजीओ के लिए काम करना शुरू कर दिया और यहीं से उनकी सोच और जीवन जीने की दिशा ही बदल गई।

महाराष्ट्र ऐड्स कंट्रोल सोसायटी

महाराष्ट्र ऐड्स कंट्रोल सोसायटी

वो महाराष्ट्र ऐड्स कंट्रोल सोसायटी के लिए काम करती हैं और इसी दौरान किसी मीडिया हाउस ने उनकी पहली कहानी छापी,जिसके बाद विक्स कंपनी ने उनके साथ एक विज्ञापन किया, जिसने उनकी लाइफ ही बदल दी। जिस गौरी को लोग पहचानने से इंकार करते थे, आज उसकी कहानी सबको जाननी थी। गौरी ने प्रण किया है कि वो थर्ड जेंडर के लोगों के भविष्य के लिए काम करेंगी। वो लोग भी पढ़ सकते हैं और समाज में अच्छा काम कर सकते हैं, वो लगातार सेक्स वर्कर्स और उनके बच्चों के लिए भी काम कर रही हैं और इसी दौरान उन्हें एक ऐसी बच्ची मिली, जिसके मुंह से उन्हें मां सुनने का मन किया और उन्होंने उसे गोद ले लिया।

'सखी चार चौगी'

'सखी चार चौगी'

उनकी बेटी को अपनी मां की पूरी सच्चाई पता है और वो उसे अपनी मां पर गर्व है। आज गौरी सावंत के पास दौलत, शोहरत, पैसा, पहचान सब है लेकिन है नहीं तो बस अपनों का साथ, फिलहाल गौरी सावंत ने ही साल 2009 में ट्रांसजेंडर्स को मान्यता दिलाने के लिए कोर्ट में अपील की थी। साल 2010 में उन्होंने 'सखी चार चौगी' की स्थापना की, जो कि बेबस, लाचार और सताए गए किन्नरों के लिए काम करती है।

गौरी सांवत आज हैं लाखों के लिए मिसाल

ये तो है सच्ची गौरी सांवत की कहानी, अब देखते हैं पर्दे पर सुष्मिता सेन गौरी बनकर कितना लोगों को प्रभावित करती है। मालूम हो कि ताली 6 एपिसोड वाली वेब सीरीज है, फिल्म के पहले लुक को तो काफी अच्छा रिस्पांस मिला है, देखते हैं सीरीज को मिलता है या नहीं।

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