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सुलक्षणा पंडित की आवाज़ जो दिल में उतर गई, वो 10 हिट गाने, जो कभी नहीं भूलेंगे

Sulakshana Pandit hit songs: भारतीय फ़िल्म संगीत के स्वर्ण युग में कई ऐसी आवाज़ें थीं, जो एक ही सुर में दिलों को छू जाती थीं। उन्हीं में से एक थी सुलक्षणा पंडित - जिनकी गायकी में मासूमियत, गहराई और दर्द का अनोखा संगम मिलता है। वह केवल एक गायिका नहीं, बल्कि एक एहसास थीं, जो हर गीत के साथ श्रोताओं के दिल में उतर जाती थीं। सुलक्षणा पंडित ने 1970 और 1980 के दशक में कई सुपरहिट गाने दिए।

विरासत में सुलक्षणा को मिला संगीत

सुलक्षणा पंडित का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ संगीत रक्त में बहता था। वह प्रसिद्ध गायक पंडित प्रसन्न पंडित की पुत्री थीं और सुलक्षणा पंडित के चाचा प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित जसराज थे। मशहूर संगीत निर्देशक जतिन-ललित की बहन हैं। उनकी एक बहन विजेता पंडित भी अभिनेत्री और पार्श्वगायिका रही हैं।

Sulakshana Pandit hit songs

सात समंदर पार से...पहला गाना लता मंगेशकर के साथ गाया

संगीत उनके लिए सिर्फ़ प्रोफेशन नहीं, बल्कि एक जीवनशैली थी। सुलक्षणा पंडित ने 9 साल की उम्र से बतौर सिंगर अपने करियर लकी शुरूआत की थी। सिंगर के रूप में उनका पहला गाना लता मंगेशकर के साथ फिल्म 'तकदीर' (1967) में था, जिसका शीर्षक 'सात समंदर पार से' था। उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली, मराठी, उड़िया और गुजराती भाषाओं में भी अपनी आवाज दी।

सुलक्षणा ने इन दिग्गजों के साथ संगीत की दुनिया में मचाया धमाल

किशोर कुमार, लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी से लेकर उदित नारायण तक कई गायकों के साथ उन्होंने युगल गीत गाए। शंकर-जयकिशन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, बप्पी लाहिड़ी और राजेश रोशन जैसे बड़े संगीतकारों के साथ भी उन्होंने काम किया।

सुलक्षणा पंडित का आखिरी गाना

सुलक्षणा पंडित का आखिरी गीत फिल्म 'खामोशी: द म्यूजिकल' का 'सागर किनारे ही दो दिल' था, जिसमें आलाप उन्हीं का था। इस फिल्म का संगीत उनके भाई जतिन-ललित ने दिया था, और संजय लीला भंसाली ने इसका निर्देशन किया था।

सुलक्षणा के लोकप्रिय गीत

सुलक्षणा के लोकप्रिय गीतों में "जब आती होगी याद मेरी", "जिसके लिए सबको छोड़ा", "पप्पा जल्दी आ जाना", "कजरे की बाती" और "सोमवार को हम मिले" जैसे गाने शामिल हैं।

  • 1. "Tu Hi Sagar Hai Tu Hi Kinara" - Sankoch (1976)
  • यह गीत सुलक्षणा की आत्मीय आवाज़ का सबसे सुंदर उदाहरण है।
  • 2. "Bechara Dil Kya Kare" - Khushboo (1975) (किशोर कुमार के साथ)
  • गुलज़ार के बोल, आर. डी. बर्मन का संगीत और सुलक्षणा-किशोर की जोड़ी - मिलकर एक अमर रोमांटिक क्लासिक बनाते हैं।
  • 3. "Bandhi Re Kahe Preet" - Fakira (1976)
  • इस गीत में सुलक्षणा की आवाज़ में छिपी कोमलता और दर्द दोनों महसूस किए जा सकते हैं।
  • 4. "Tu Jo Mere Sur Mein" - Chor Machaye Shor (1974)
  • यह गीत 70 के दशक की रूमानी धुनों का प्रतीक है - सुलक्षणा ने इसमें मधुरता और जोश दोनों भर दिए।
  • 5. "Ka Karoon Sajni" - Swami (1977)
  • यह गीत सुलक्षणा के करियर का रत्न है - शुद्ध भावना, शास्त्रीयता और दर्द की पराकाष्ठा इसमें सुनाई देती है।
  • 6. "Mere Naina Sawan Bhadon" - लाइव रेंडिशन (कवर)
  • उन्होंने लता मंगेशकर के इस अमर गीत को अपने अंदाज़ में गाया था, जो बेहद सराहा गया।
  • 7. "Aaj Kal Paon Zameen Par" - Gharonda (1977) (युगल संस्करण)
  • इस गीत में उनकी आवाज़ ने गीत की भावनाओं को और भी कोमल बना दिया।
  • 8. "Bheegi Bheegi Raaton Mein" - स्टेज परफॉर्मेंस वर्ज़न (किशोर कुमार के साथ)
  • उनकी मंचीय प्रस्तुतियाँ आज भी यूट्यूब पर लोगों के दिल जीतती हैं।
  • 9. "Dil Ki Kalam Se" - Apnapan (1977)
  • गीत में प्रेम और विरह का ऐसा संतुलन है जो केवल सुलक्षणा जैसी आवाज़ से ही संभव था।
  • 10. "Mausam Pyar Ka" - Mausam (1975)
  • एक और दिल को छू जाने वाला गीत, जो उनके स्वर की मिठास को नए स्तर पर ले जाता है।

इस‍ लिंक को क्लिक कर सुने सारे चुनिंदा गाने

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