'अंधी' हो गई थीं श्वेता तिवारी, आंखों से दिखना हो गया था बंद, जानें क्यों हुई ऐसी हालत?
Shweta Tiwari: टीवी से लेकर भोजपुरी फिल्मों तक में अपनी एक्टिंग का जादू चलाने वाली एक्ट्रेस श्वेता तिवारी की खूबसूरती के लोग दीवाने हैं। श्वेता तिवारी काफी पॉपुलर एक्ट्रेस हैं। हालांकि वह अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं।
सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं श्वेता तिवारी
श्वेता तिवारी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और अपनी तस्वीरें और वीडियोज फैंस के लिए शेयर करती रहती हैं। हाल ही में श्वेता तिवारी फिल्म 'सिंघम अगेन' में नजर आई हैं। वह इंडस्ट्री में कई सालों से जी जान लगाकर मेहनत कर रही हैं। इस फेम को पाने के लिए उन्होंने जमकर मेहनत की है।

जब श्वेता तिवारी अंधी हो गई थीं
काम करते हुए ही श्वेता तिवारी के साथ कुछ ऐसा हुआ था जिसके बारे में जानकर कोई भी हैरान हो जाएगा। एक बार अपने एक इंटरव्यू में श्वेता तिवारी ने खुलासा किया था कि वो लगभग अंधी हो गई थीं लेकिन कैसे और क्यों ये शायद आपको पता नहीं होगा।
'मेरी आंखों में इन्फेक्शन हुआ था'
श्वेता तिवारी ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था- मेरी आंखों में इन्फेक्शन हुआ था, जब मैंने लेसिक करवाया था, क्योंकि मेरी आंखों में बहुत हाई नंबर था। मैं तब -10 नंबर पहनती थी, मैं -10 नंबर के लेंस लगाती थी। एक समय था जब मैं सुबह 5 बजे से लेकर सुबह 7 बजे तक रेडियो शो करती थी। फिर सुबह के 7 बजे से शाम के 7 बजे तक टीवी सीरियल में काम करती थी।
'मेरी आंखों के ब्लड वैसल्स फट गए थे'
श्वेता तिवारी ने आगे बताया था- फिर शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक डांस रिएलिटी शो 'नच बलिए' की रिहर्सल करती थी और उसके बाद रात 10 बजे से सुबह के 5 बजे तक भोजपुरी फिल्म का शूटिंग करती थी। मुझे 'बिग बॉस' में भी जाना था। मैंने एक महीना ये शेड्यूल लेंस पहनकर किया था और इसकी वजह से मेरी आंखों के ब्लड वैसल्स फट गए थे।
'मैंने लेसिक करवा लिया था'
श्वेता तिवारी ने बताया था- मेरी आंखों से खून बहता था। ऐसा लगता था आंसू की जगह खून निकल रहा है। टीवी के पॉपुलर डांस रिएलिटी शो नच बलिए के समय मैं अंधी हो गई थी। वो टाइम था, फिर मैंने लेसिक करवा लिया था। अब मेरा ट्रीटमेंट हो गया है। मैं बिना चश्मे के देख पाती हूं। हालांकि अब चश्मा वापस आ रहा है क्योंकि बूढ़ी हो रही हूं।
'मैंने इतनी मेहननत की और आंखें खराब हो गईं'
श्वेता तिवारी ने कहा था- वो जो पीरियड था न, उस पर मुझे गर्व है। मुझे गर्व है कि मैंने इतनी मेहनत की है और मेरे पास इतना काम है कि मेरी आंखें तक खराब हो गई थीं। आज लोग रोते हैं कि काम नहीं है, काम दे दो, लेकिन जब काम मिलता है तो ध्यान इस पर रहता है कि पैकअप कब हो रहा है। अब जब काम आता है तो उन्हें 12 घंटे नहीं, 8 घंटे काम करना होता है।












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